जंतर-मंतर से कनॉट प्लेस तक विरोध की गूंज, कांग्रेस और विपक्ष हमलावर

cjp-protest-centre-government-promises-24-august-meeting
शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और उसके बाद हुई गिरफ्तारियों को लेकर राजधानी दिल्ली का सियासी और सड़क का पारा चढ़ गया है। बुधवार को विपक्षी नेताओं ने जहां एक तरफ सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर तीखे हमले किए, वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन कर रहे नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है।

संसद मार्ग थाने के बाहर NSUI का धरना और हिरासत

बुधवार दोपहर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध जताने और साथी कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर NSUI और युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता संसद मार्ग थाने के बाहर जमा हो गए। उन्होंने थाने के सामने बैठकर धरना शुरू कर दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

स्थिति को देखते हुए पुलिस ने एक्शन लिया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। जानकारी के मुताबिक, राज्यसभा सांसद जेबी माथेर की मौजूदगी में विनोद जाखड़ सहित पांच लोग (जिनमें दो घायल NSUI कार्यकर्ता शामिल हैं) बातचीत के लिए थाने के अंदर गए हैं।

राहुल गांधी का अल्टीमेटम: ‘लोकतंत्र की आवाज दबाने वालों को कठोर न्याय मिलेगा’

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने युवाओं और छात्रों से पुलिस की ज्यादतियों के रिकॉर्ड (वीडियो/फोटो) सुरक्षित रखने की अपील की है।

राहुल ने अपने बयान में कहा, “वो दिन आ रहा है जब हमारे लोकतंत्र की आवाज को दबाने वालों को कठोर न्याय का सामना करना पड़ेगा। चाहे वो नरेंद्र मोदी हों, अमित शाह हों, ज्ञानेश कुमार हों या कोई भी हवलदार। शांतिपूर्ण विरोध आपका अधिकार है, हम इसे किसी को छीनने नहीं देंगे।”

ओवैसी का सवाल- जंतर-मंतर से सरकार को ऐतराज क्यों?

AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई करने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने विरोध करने के अधिकार का समर्थन किया है, तो सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ क्यों है?

ओवैसी ने गिरफ्तारियों पर सवाल उठाते हुए कहा, “इन लड़कों को आज गिरफ्तार किया गया है, लेकिन यह बिल्कुल जरूरी नहीं था। इन्हें आसानी से जमानत दी जा सकती थी या नोटिस जारी किया जा सकता था। जब एक लड़के को रिहा कर दिया गया है, तो बाकी दो को न्यायिक हिरासत में क्यों भेजा गया?”

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके का तीखा हमला

जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने वाले सीजेपी (CJP) नेताओं—आशुतोष और सौरव—को 5 दिन की जेल भेजे जाने पर सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस कार्रवाई की तुलना ब्रिटिश राज से करते हुए कहा, “जब अंग्रेज राज कर रहे थे, तब जो भी फ्रीडम फाइटर्स पब्लिक प्लेस में तिरंगा लहराते थे, उनको जेल में बंद कर देते थे।” दीपके ने पीएम मोदी पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए सवाल पूछा कि क्या भारत में तिरंगा लहराना अपराध हो गया है।

DMRC का जवाब: 10 अक्टूबर को नहीं रोकी गई थी मेट्रो सेवाएं

इस बीच, 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की सख्ती और मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने के मामले में कल होने वाली सुनवाई से पहले दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है।

DMRC ने स्पष्ट किया है कि उस दिन मेट्रो ट्रेनों की संख्या में कोई कटौती या कैंसिलेशन नहीं किया गया था। अपने निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक 271 ट्रेनें चलाई गईं, जिन्होंने 4,157 ट्रिप पूरी कीं। हालांकि, यात्रियों की संख्या सामान्य 56 लाख से घटकर 32 लाख रही। DMRC ने बताया कि कुल 303 स्टेशनों में से केवल 45 स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट रोकी गई थी, जिन्हें उसी रात 10 बजे तक खोल दिया गया था।