सैलरी बढ़ोतरी में NBFC आगे, एनर्जी और रियल एस्टेट सेक्टर भी दिखा रहे दम

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Gautam Kumar Agarwal
Gautam Kumar Agarwal

देश में नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत भरी खबर है। ग्लोबल टेंशन और कंपनियों के बढ़ते ऑपरेटिंग खर्चों के बावजूद, भारत में कॉर्पोरेट सेक्टर अपने कर्मचारियों की सैलरी में औसतन 9.1 फीसदी का इजाफा कर सकता है। यह अनुमान ग्लोबल प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म एऑन (Aon) के ताजा सर्वे में सामने आया है।

एऑन ने 45 अलग-अलग इंडस्ट्रीज की 1,200 से अधिक कंपनियों के आंकड़ों का विश्लेषण कर अपनी ‘एनुअल सैलरी इंक्रीज एंड टर्नओवर सर्वे फॉर इंडिया 2026-27’ (Annual Salary Increase and Turnover Survey for India 2026-27) रिपोर्ट जारी की है।

2026 के मुकाबले मामूली बढ़त

रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में कंपनियों ने औसतन 9% का इंक्रीमेंट दिया था। अब 2027 के लिए यह अनुमान 9.1% लगाया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 0.1 प्रतिशत अधिक है। मजबूत घरेलू खपत, कॉर्पोरेट निवेश और एक्सपोर्ट ग्रोथ से कंपनियों का भरोसा बढ़ा है, जिससे वे अपने कर्मचारियों पर निवेश कर पा रही हैं।

किस सेक्टर में कितनी बढ़ सकती है सैलरी?

एऑन के सर्वे के अनुसार, 2027 में इंक्रीमेंट के मामले में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) सेक्टर सबसे आगे रहेगा, जहां देश के औसत से 1 प्रतिशत ज्यादा इंक्रीमेंट मिलने का अनुमान है:

  • NBFC: 10.1%

  • एनर्जी: 9.9%

  • रियल एस्टेट: 9.8%

  • इंफ्रास्ट्रक्चर: 9.8%

  • सभी सेक्टर्स का औसत: 9.1%

परफॉर्मेंस और खास स्किल पर फोकस

कंपनियां अब आंख मूंदकर सभी कर्मचारियों की एक जैसी सैलरी नहीं बढ़ा रही हैं। एऑन के टैलेंट सॉल्यूशंस इंडिया में पार्टनर और रिवॉर्ड्स कंसल्टिंग लीडर, रूपांक चौधरी के मुताबिक, कंपनियां अब लक्षित (Targeted) रणनीति अपना रही हैं।

अब जोर इस बात पर है कि किस तरह के कर्मचारियों, खास स्किल (Specialized Skills) और अहम पदों पर निवेश करने से कारोबार को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर में ‘नॉन-मेरिट एडजस्टमेंट’ भी देखने को मिल रहा है। इसका मतलब है कि सिर्फ प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि बाजार में उस स्किल की डिमांड और टैलेंट को रोककर रखने की जरूरत के हिसाब से भी सैलरी बढ़ाई जा रही है।

नौकरी छोड़ने (Attrition) की दर में तेज उछाल

कंपनियों के सामने अच्छी सैलरी देने के साथ-साथ कर्मचारियों को रोककर रखने की बड़ी चुनौती भी खड़ी हो गई है। सर्वे के मुताबिक, कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने (Attrition Rate) की दर 2026 में पिछले तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है:

  • 2024: 17.1%

  • 2025: 16.2%

  • 2026: 18%

यह बढ़ा हुआ एट्रिशन रेट कंपनियों के लिए दोहरी चुनौती पेश कर रहा है—उन्हें टैलेंट को बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धी सैलरी और प्रमोशन देने पड़ रहे हैं, जबकि दूसरी ओर उन्हें अपनी लागत (Cost) पर भी नियंत्रण रखना है।

AI का बढ़ता इस्तेमाल और वेज कोड का असर

एऑन की रिपोर्ट में एक दिलचस्प आंकड़ा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से भी जुड़ा है। कंपनियों में काम को आसान बनाने वाले एआई प्रोडक्टिविटी टूल्स को अपनाने का अनुपात 2025 के 46.1% से बढ़कर 2026 में 56% हो गया है। इसके चलते कंपनियां कर्मचारियों की री-स्किलिंग और उत्पादकता पर अधिक ध्यान दे रही हैं।

इसके अलावा, रिपोर्ट में नए ‘वेज कोड’ (Wage Code) को लेकर भी अलर्ट किया गया है। एऑन के एसोसिएट पार्टनर अमित कुमार ओटवानी ने कहा कि कंपनियों को नए वेज कोड के मामले में केवल नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इससे कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी और कंपनी की लागत पर पड़ने वाले व्यापक असर का भी पहले से आकलन करना होगा।