आजम की जौहर यूनिवर्सिटी फिर जांच के घेरे में, 416 करोड़ के अंतर पर सवाल

azam khan
गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ी कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिख रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर रामपुर के अजीमनगर थाने में आजम खान और ट्रस्ट से जुड़े लोगों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की गई है।

इस रिपोर्ट में जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण खर्च, सरकारी परियोजनाओं के धन व सामग्रियों के कथित इस्तेमाल, सरकारी ठेकों में रसूख के दुरुपयोग और ट्रस्ट को मिले चंदों की प्रामाणिकता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। एजेंसी के अनुसार यूनिवर्सिटी निर्माण की अनुमानित लागत और ट्रस्ट द्वारा आयकर रिटर्न में घोषित खर्च के बीच 416 करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा अंतर सामने आया है।

13 अक्टूबर को दर्ज हुई FIR, BNS और भ्रष्टाचार निवारण की धाराएं लगीं

ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने 10 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र भेजकर आपराधिक धाराओं में कार्रवाई का अनुरोध किया था। इसके बाद 13 अक्टूबर को अजीमनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।

मामले में ईडी के उप निदेशक पीयूष एस. थॉर्स्ट शिकायतकर्ता बने हैं, जबकि जांच का जिम्मा उप निरीक्षक पंकज पंत को सौंपा गया है। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61 (आपराधिक षड्यंत्र), 316(5) और 318(4) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 7, 13(1)(d) और 13(2) के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं।

416 करोड़ रुपये के अंतर पर टिकी है जांच

ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ा वित्तीय अंतर यूनिवर्सिटी के निर्माण खर्च में सामने आया है:

  • आयकर विभाग का मूल्यांकन: जिला मूल्यांकन अधिकारी (DVO) की 10 नवंबर 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी परिसर के विभिन्न भवनों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

  • ट्रस्ट का घोषित खर्च: मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 के आयकर रिटर्न में कुल पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) 78.32 करोड़ रुपये दर्शाया।

  • लागत में अंतर: जांच एजेंसी का दावा है कि घोषित खर्च और वास्तविक निर्माण लागत के बीच करीब 416.14 करोड़ रुपये का अंतर है, जिसका कोई ठोस विवरण ट्रस्ट के खातों में नहीं मिला है।

सरकारी ठेकों और सामग्री के कथित डायवर्जन का आरोप

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि आजम खान के मंत्री कार्यकाल के दौरान कुछ ठेकेदारों को मिले सरकारी ठेकों से खरीदी गई निर्माण सामग्री का एक हिस्सा जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगाया गया।

एजेंसी ने सीके एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी पवन कुमार जैन के बयान का हवाला दिया है, जिन्हें 2013-14 से 2016-17 के बीच करीब 186 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके मिले थे। बयान के आधार पर दावा किया गया है कि ठेका राशि का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा सामग्री खरीद में इस्तेमाल हुआ, जिससे एजेंसी ने करीब 55.8 करोड़ रुपये के सरकारी फंड के कथित उपयोग का आकलन किया है।

सरकारी धन से बने ढांचे और 85.81 करोड़ रुपये का दायरा

जांच रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश जल निगम की सीटीएस यूनिट-18 के एक अधिकारी के बयान का भी जिक्र है। इसके अनुसार:

  • राज्य सरकार ने यूनिवर्सिटी परिसर में बड़ा पंडाल, ओबीसी छात्रावास और अस्पताल के निर्माण के लिए 23.41 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। एजेंसी इन ढांचों का मालिकाना हक यूनिवर्सिटी को स्थानांतरित किए जाने के पहलू की जांच कर रही है।

  • विधायक एवं विधान परिषद सदस्य (MLA/MLC) निधि से भी परिसर में 6.60 करोड़ रुपये के काम कराए गए।

ईडी ने इन तीनों मदों—55.8 करोड़ रुपये (ठेकेदार सामग्री आकलन), 23.41 करोड़ रुपये (सरकारी निर्माण) और 6.60 करोड़ रुपये (विधायक निधि)—को मिलाकर कुल 85.81 करोड़ रुपये के ऐसे संसाधनों को चिह्नित किया है, जिनके सरकारी धन से जुड़े होने का संदेह है।

चंदे के स्रोत और ट्रस्ट के संचालन पर सवाल

एजेंसी ने ठेकेदारों और अन्य संस्थाओं द्वारा ट्रस्ट को दिए गए चंदे की भी पड़ताल शुरू की है:

  • आरोप है कि लगभग 25 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके मिलने के बाद सितंबर 2015 में एएस एंटरप्राइजेज ने ट्रस्ट को 40 लाख रुपये का चंदा दिया।

  • मेरठ के केएसडी चैरिटेबल ट्रस्ट और सिटी एजुकेशनल सोशल वेलफेयर सोसाइटी से मिले कुल 6.235 करोड़ रुपये के चंदे के स्रोतों की भी जांच चल रही है।

इसके अलावा, ट्रस्ट के कुछ सदस्यों के बयानों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें कार्यकारी बैठकों की सूचना नहीं होती थी और वे निर्णयों में शामिल नहीं थे। इसके आधार पर एजेंसी ने ट्रस्ट पर आजम खान के कथित एकाधिकार का मुद्दा उठाया है।

27 पुराने मुकदमों से जुड़ी कड़ियां

ईडी ने अजीमनगर और रामपुर कोतवाली में पहले दर्ज 27 मुकदमों का भी उल्लेख किया है, जो किसानों की जमीन और केंद्र सरकार की शत्रु संपत्ति (Enemy Property) को कब्जाने के आरोपों से जुड़े थे। इन्हीं मामलों के आधार पर पीएमएलए (PMLA) की जांच शुरू हुई थी। अब PMLA की धारा 66(2) के तहत इनपुट राज्य पुलिस को साझा किए जाने के बाद यह नई प्राथमिकी दर्ज हुई है।

एफआईआर में शामिल सभी बिंदु फिलहाल जांच एजेंसी की रिपोर्ट और दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की पुष्टि और कानूनी वैधता अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही तय होगी। रामपुर पुलिस और संबंधित एजेंसियां अब वित्तीय लेनदेन और अभिलेखों के सत्यापन में जुटी हैं।