ग्रीनलैंड क्यों है इतना अहम? तेल, गैस और Golden Dome की पूरी कहानी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि रणनीतिक रूप से अहम ग्रीनलैंड में बड़े पैमाने पर तेल, गैस और खनिजों की खोज शुरू होने वाली है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले महीने ही अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच एक बड़ा सैन्य और सुरक्षा समझौता हुआ है। हालांकि, ट्रंप ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस प्रस्तावित खोज अभियान में अमेरिकी कंपनियों या सरकार की प्रत्यक्ष भूमिका क्या होगी।
ट्रंप का दावा- ‘दुनिया में सबसे ज्यादा तेल यहीं मौजूद’
बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप ने लिखा, “हमारे नए और खूबसूरत ग्रीनलैंड में बड़े पैमाने पर तेल, गैस और खनिजों की खोज शुरू होने जा रही है!” उन्होंने विशेषज्ञों का हवाला देते हुए दावा किया कि ग्रीनलैंड में आसानी से उपलब्ध तेल की मात्रा दुनिया में लगभग किसी भी अन्य जगह की तुलना में कहीं अधिक है।
इसके साथ ही ट्रंप ने ग्रीनलैंड की भू-रणनीतिक अहमियत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में अमेरिका पर होने वाले किसी भी हमले को ग्रीनलैंड के रास्ते से गुजरना होगा, जहां अमेरिकी रक्षा प्रणाली ड्रोन, मिसाइल या किसी भी अन्य हथियार को आसानी से मार गिराएगी।
सुरक्षा समझौता और ‘गोल्डन डोम’ डिफेंस सिस्टम
ट्रंप की इस घोषणा को सितंबर में अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच हुए नए सुरक्षा समझौते से जोड़कर देखा जा रहा है। इस त्रिपक्षीय समझौते के तहत ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना की भूमिका का विस्तार किया गया है।
समझौते के अनुसार, अमेरिका ग्रीनलैंड में दो नए सैन्य बेस स्थापित करेगा। इसके अलावा, व्हाइट हाउस के मुताबिक, इस द्वीप पर ट्रंप का प्रस्तावित ‘गोल्डन डोम’ (Golden Dome) मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी तैनात किया जाएगा। यह समझौता ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की ट्रंप की पुरानी मांगों के बाद पनपे तनाव को कम करने के इरादे से किया गया है। इसमें डेनमार्क की संप्रभुता और ग्रीनलैंड के आत्मनिर्णय के अधिकार को भी बरकरार रखा गया है।
चीन के दबदबे को चुनौती देने की अमेरिकी रणनीति
ग्रीनलैंड केवल तेल और गैस ही नहीं, बल्कि दुर्लभ खनिजों (Rare-Earth Minerals) का भी बड़ा भंडार है। 2023 के एक सर्वेक्षण के अनुसार, यूरोपीय आयोग द्वारा चिन्हित 34 महत्वपूर्ण कच्चे मालों में से 25 ग्रीनलैंड में पाए जाते हैं।
वर्तमान में, रेयर-अर्थ खनिजों के खनन और प्रोसेसिंग पर चीन का वैश्विक दबदबा है। अमेरिका और पश्चिमी देश इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले इन खनिजों के लिए चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं। वाशिंगटन के लिए ग्रीनलैंड केवल अपने भूमिगत संसाधनों के लिए ही नहीं, बल्कि आर्कटिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति के लिए भी बेहद मूल्यवान है।
क्या सच में आसान होगी खुदाई?
संसाधनों की मौजूदगी के बावजूद, ग्रीनलैंड में बड़े पैमाने पर खनन और तेल ड्रिलिंग आसान नहीं है। सबसे बड़ी बाधा खुद ग्रीनलैंड सरकार की नीतियां हैं। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन संबंधी चिंताओं के कारण ग्रीनलैंड ने 2021 में तेल और गैस की खोज के लिए नए लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी थी। हालांकि, पुराने और मौजूदा लाइसेंसों को रद्द नहीं किया गया था।
पूर्वी ग्रीनलैंड के जेमिसन लैंड (Jameson Land) में एक प्रोजेक्ट चर्चा में है, जहां यूके की कंपनी ’80 माइल’ के पास एक्सप्लोरेशन राइट्स हैं और अमेरिकी कंपनी ‘ग्रीनलैंड एनर्जी’ इसमें फंडिंग के जरिए शामिल होना चाहती है। रिपोर्टों के अनुसार, यह वेंचर दो कुओं की खुदाई पर लगभग 60 मिलियन डॉलर खर्च करने की योजना बना रहा है। दूसरी तरफ, ग्रीनलैंड सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी नए प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने से पहले सख्त पर्यावरण आकलन (Environmental Assessment) और कानूनी प्रक्रियाओं को पास करना अनिवार्य होगा।

