कांग्रेस दफ्तर में जूते चले, अब दिल्ली में होगी पूछताछ! ममता चौधरी तलब

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी अब सरेआम सड़क पर आ गई है। रविवार को लखनऊ में यूपी कांग्रेस की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ (Aradhana Mishra Mona) के पदभार ग्रहण समारोह के दौरान जमकर बवाल हुआ।

इस कार्यक्रम में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय (Ajay Rai) के समर्थकों और लखनऊ नगर निगम की कांग्रेस पार्षद ममता चौधरी (Mamta Chaudhary) के बीच तीखी बहस हो गई, जिसने देखते ही देखते मारपीट और ‘जूतम-पैजार’ का रूप ले लिया।

बीच-बचाव करने उतरे बड़े नेता

रविवार को जब यह विवाद हुआ, तो वहां मौजूद कई बड़े नेताओं को बीच-बचाव के लिए उतरना पड़ा। इस हंगामे से अजय राय खासे नाराज हो गए और कार्यक्रम छोड़कर जाने लगे। हालांकि, कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी और इमरान मसूद ने किसी तरह उन्हें मनाकर वापस कार्यालय में रोका।

इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यूपी कांग्रेस में मची गुटबाजी को पूरी तरह उजागर कर दिया है।

दिल्ली हाईकमान हुआ सख्त, ममता चौधरी तलब

वायरल वीडियो और सरेआम हुई इस मारपीट से कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व (Central Leadership) बेहद नाराज बताया जा रहा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पार्टी हाईकमान ने तत्काल एक्शन लिया है और पार्षद ममता चौधरी को दिल्ली तलब कर लिया है।

माना जा रहा है कि दिल्ली में उनसे इस पूरी घटना को लेकर कड़ी पूछताछ की जाएगी। इसके साथ ही, यूपी कांग्रेस के कई अन्य नेताओं से भी जवाब-तलब किया जा सकता है।

क्या हैं ममता चौधरी के आरोप?

ममता चौधरी लखनऊ नगर निगम में कांग्रेस की पार्षद और पार्टी दल की नेता हैं। इसके अलावा, वह यूपी कांग्रेस कमेटी महिला संगठन के मध्य क्षेत्र की अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने साल 2022 में मोहनलाल गंज से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था।

ममता चौधरी ने पूर्व अध्यक्ष अजय राय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि अजय राय ने जानबूझकर उन्हें अपशब्द कहे और सबके सामने बुरी तरह जलील किया। ममता ने यह भी आरोप लगाया कि अजय राय के समर्थकों ने उनके साथ हाथापाई और मारपीट की है।

चुनाव से पहले पार्टी के अनुशासन पर उठे सवाल

यूपी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस ने हाल ही में अपना प्रदेश अध्यक्ष बदला था, ताकि राज्य में संगठन को मजबूत किया जा सके। लेकिन नई प्रदेश अध्यक्ष के ताजपोशी के दिन ही इस तरह की घटना ने पार्टी की फजीहत करा दी है। इस पूरे प्रकरण ने कांग्रेस प्रदेश कमेटी के पदाधिकारियों और पार्टी के अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।