12 आदिवासी घर तोड़े गए, शिवराज सिंह चौहान का अपनी ही सरकार पर गुस्सा

shivraj singh
संजीव पॉल
संजीव पॉल

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोस्मी गांव में वन विभाग (Forest Department) की बड़ी कार्रवाई से भारी विवाद खड़ा हो गया है। वन विभाग ने अतिक्रमण का हवाला देते हुए 12 आदिवासी परिवारों के घरों को मलबे में तब्दील कर दिया है।

यह क्षेत्र केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) के संसदीय क्षेत्र विदिशा के अंतर्गत आता है। रविवार को हुई इस कार्रवाई की जानकारी मिलते ही शिवराज सिंह चौहान खुद मौके पर पहुंचे और अपनी ही सरकार के अधिकारियों के खिलाफ रोते-बिलखते परिवारों के साथ धरने पर बैठ गए।

‘अन्याय की सारी हदें पार हो गईं’

प्रभावित आदिवासी परिवारों से मिलने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने बेहद तल्ख तेवर अपनाते हुए अधिकारियों को खूब खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा, “इस बर्बरता के पीछे जो लोग हैं, वे पूरी तरह बेरहम और इंसानियत से खाली हैं। यह खुलेआम किया गया घोर अन्याय है। ऐसे जालिमों को ऊपर वाला भी कभी बख्शेगा नहीं।”

उन्होंने मौके की भयावह स्थिति का वर्णन करते हुए कहा, “मेरे संसदीय क्षेत्र में आज जुल्म और अन्याय की सारी हदें पार कर दी गईं। जिन घरों में आज सुबह तक खुशहाली थी, वहां अब सिर्फ चीख-पुकार बची है। महिलाएं रो-रोकर अपना सीना पीट रही हैं। लोगों के सालों पुराने घर मलबे में तब्दील कर दिए गए हैं।”

फसलें बर्बाद कीं, कुएं पाट दिए गए

पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कार्रवाई में सिर्फ मकान ही नहीं तोड़े गए, बल्कि किसानों की मेहनत से उगाई गई फसलें भी मलबे के नीचे दबा दी गईं। खेतों में बने कुओं को मिट्टी डालकर पूर दिया गया। बरसों से बसे इन बरेला आदिवासी समुदाय (Barela Tribal Community) के परिवारों को एक झटके में बेघर कर सड़क पर ला पटका गया है। समुदाय के लोगों का दावा है कि वे कई वर्षों से वहां रह रहे थे।

‘सीएम के सामने रखूंगा सच्चाई, होगी कठोर कार्रवाई’

शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ितों को न्याय दिलाने का भरोसा देते हुए कहा कि वे इस पूरे मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने रखेंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “जिन वन विभाग के अधिकारियों ने यह तबाही मचाई है, उनके खिलाफ ऐसी कठोर और मिसाल बनने वाली कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि कोई भी बेकसूर के साथ ऐसा जुल्म करने की हिम्मत न जुटा सके।”

मौके से ही उन्होंने मुख्य सचिव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से बात की और नाराजगी जताई कि उनके पूर्व निर्देशों के बावजूद यह तोड़फोड़ कैसे हुई। उन्होंने ऐलान किया कि पीड़ितों के मकान फिर से बनवाए जाएंगे और जब तक स्थायी व्यवस्था नहीं होती, उनके रहने और खाने का पूरा इंतजाम किया जाएगा।

वन विभाग का क्या है तर्क?

दूसरी तरफ, इस पूरी कार्रवाई पर वन विभाग का अलग तर्क है। विभाग का कहना है कि साल 2021 के सरकारी प्लांटेशन को नष्ट करके वहां अवैध तरीके से खेती और झोपड़ियां बनाई गई थीं। विभाग के मुताबिक, नियमों के तहत बेदखली नोटिस देने के बाद ही यह अतिक्रमण हटाया गया है।

कांग्रेस ने भाजपा की अंदरूनी कलह को ठहराया जिम्मेदार

इस घटना के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार (Umang Singhar) ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की भाजपा सरकार की अंदरूनी कलह और गुटबाजी का नुकसान गरीब आदिवासियों को उठाना पड़ रहा है, जिन पर अब बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है।