ट्रंप-नेतन्याहू को ईरान का संदेश, ‘बदलेगी कूटनीति, पुराने हालात में वापसी नहीं’

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सैयद सरवर हुसैन - कंट्री हेड- ईरान
सैयद सरवर हुसैन – कंट्री हेड- ईरान

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) के सचिव मेजर जनरल मोहसिन रेजाई ने चल रहे युद्ध को सुलझाने के लिए तेहरान की सात शर्तों पर अमेरिका की आंशिक रियायतों को “अपर्याप्त” बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, रेजाई ने माना कि वाशिंगटन ने इस्लामी गणराज्य द्वारा रखी गई कुछ शर्तों पर सहमति जताई है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि यह जवाब तेहरान की मांगों से कोसों दूर है।

‘पुरानी स्थिति में कोई वापसी नहीं’

रेजाई ने स्पष्ट किया कि ईरानी कूटनीति बदल गई है और अब पुरानी स्थिति में कोई वापसी नहीं होगी। उन्होंने संकेत दिया कि तेहरान अब वाशिंगटन के साथ कैसे जुड़ता है, इसमें एक बुनियादी और स्थायी बदलाव आया है। ईरान अब आंशिक या अधूरे मन से दी गई रियायतों के बजाय पूर्ण अनुपालन की मांग कर रहा है।

ट्रंप और नेतन्याहू पर सीधा निशाना

अपनी दूसरी पोस्ट में, रेजाई ने अमेरिकी प्रशासन की रणनीतिक क्षमता और युद्ध की उत्पत्ति पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “ईरान को जीतने की कल्पना के भ्रम में पड़कर और नेतन्याहू द्वारा धोखा खाकर मानव इतिहास के सबसे बेवकूफी भरे युद्धों में से एक की शुरुआत की।”

‘अमेरिकी सेना कभी इतनी नहीं गिरी थी’

रेजाई ने युद्ध के मैदान में अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में अमेरिकी सेना की विफलता को भी उजागर किया। उन्होंने वाशिंगटन द्वारा ईरानी समुद्री नियंत्रणों को बायपास करने के हालिया प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा, “हर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने में अमेरिकी बेड़े के विफल होने के बाद, वह अब तस्करी का सहारा ले रहा है।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी सेना कभी भी इतने शर्मनाक स्तर तक नहीं गिरी थी।

इस्लामाबाद समझौता और मौजूदा स्थिति

रेजाई की यह तीखी प्रतिक्रिया इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) की पृष्ठभूमि में आई है, जिसने अमेरिका-इजरायल युद्ध को रोकने की रूपरेखा तैयार की थी।

इस समझौते के तहत वाशिंगटन ने अपनी अवैध नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करने और समुद्री यातायात को चरणबद्ध तरीके से सामान्य करने के बदले में सभी सैन्य अभियानों को रोकने की प्रतिबद्धता जताई थी।

समझौते की अहम शर्त यह थी कि जलडमरूमध्य के माध्यम से वाणिज्यिक पारगमन (Commercial Transit) की किसी भी बहाली के लिए इस्लामी गणराज्य ईरान के साथ समन्वय और उसकी मंजूरी आवश्यक होगी।

अमेरिकी उल्लंघनों पर ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने तय ढांचे का पालन करने के बजाय, बिना ईरानी समन्वय के वाणिज्यिक जहाजों को जबरन या चोरी-छिपे हर्मुज जलडमरूमध्य से निकालने का प्रयास किया है।

ईरानी सशस्त्र बलों ने इन उल्लंघनों का निर्णायक जवाब देते हुए अनधिकृत जहाजों को रोका है और युद्ध के दौरान स्थापित रक्षात्मक व्यवस्थाओं को लागू किया है।

तेहरान का स्पष्ट रुख है कि हर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण तब तक रहेगा जब तक कि अमेरिका ईरान की सभी सात शर्तों को पूरी तरह से लागू नहीं कर देता।