80 सीटों का दावा, फिर क्यों अटका BJP-अकाली गठबंधन? सामने 3 बड़े मुद्दे

पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से सियासी बिसात बिछने लगी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच एक बार फिर गठबंधन को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है।
हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी कोई घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के एक आंतरिक सर्वे (Internal Survey) में यह बात सामने आई है कि अगर दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ते हैं, तो वे राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से 80 से अधिक सीटें जीत सकते हैं और पंजाब में आसानी से सरकार बना सकते हैं।
गठबंधन की घोषणा में देरी पर उठ रहे सवाल
पार्टी सूत्रों का कहना है कि गठबंधन की घोषणा में हो रही देरी को लेकर बीजेपी के भीतर से ही सवाल उठने लगे हैं। कई नेताओं का मानना है कि अब अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी का समय नहीं बचा है। कार्यकर्ताओं को चुनाव के लिए तैयार करने और सीटों के बंटवारे के बाद अपनी-अपनी सीटों पर फोकस करने के लिए गठबंधन का जल्द ऐलान होना जरूरी है।
नेताओं का तर्क है कि अगर दोनों दल अलग-अलग लड़ते हैं, तो इसका सीधा फायदा आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस (Congress) को मिलेगा।
वोट शेयर के आंकड़े: दोनों के साथ आने पर बनेगी मजबूत ताकत
बीजेपी के आंतरिक आकलन का मुख्य आधार हाल ही में हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों के वोट शेयर हैं:
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2024 लोकसभा चुनाव: बीजेपी को 18.56% (करीब 25 लाख वोट) और अकाली दल को 13.42% (करीब 18 लाख वोट) मिले। दोनों का वोट शेयर मिलाकर लगभग 32% (43 लाख वोट) तक पहुंचता है।
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2022 विधानसभा चुनाव: अकाली दल को 18.38% (28.61 लाख) और बीजेपी व उसके सहयोगियों को 8% (12 लाख) वोट मिले थे। यहां भी दोनों का कुल वोट लगभग 41 लाख होता है।
बीजेपी नेताओं का मानना है कि अगर यह 40-43 लाख वोटों की संयुक्त ताकत (Joint Strength) एक साथ आती है, तो यह सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (2024 में 35.43 लाख वोट) और कांग्रेस (35.06 लाख वोट) के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाएगी।
इन 3 प्रमुख मुद्दों पर फंसा है पेंच
सूत्रों के अनुसार, गठबंधन को लेकर बातचीत अभी तीन अहम मुद्दों पर अटकी हुई है:
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सीटों की संख्या: पुराने गठबंधन (1996-2020) में बीजेपी जूनियर पार्टनर के रूप में 117 में से केवल 23 सीटों पर ही लड़ती आई है। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में 45 विधानसभा सीटों पर अकाली दल से आगे रहने (और 23 सीटों पर बढ़त हासिल करने) के बाद बीजेपी इस बार ज्यादा सीटों की मांग कर रही है।
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सीटों की पहचान: परंपरागत रूप से बीजेपी शहरी इलाकों और अकाली दल ग्रामीण इलाकों में चुनाव लड़ता रहा है। लेकिन इस बार अकाली दल ‘सेमी-अर्बन’ (अर्ध-शहरी) सीटों पर भी दावेदारी जता रहा है, जो अमूमन बीजेपी का गढ़ मानी जाती हैं।
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मुख्यमंत्री पद का चेहरा: अकाली दल चाहता है कि सुखबीर सिंह बादल गठबंधन के सीएम उम्मीदवार हों, लेकिन बीजेपी के कुछ नेताओं का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक हालात में उनकी छवि गठबंधन के लिए फायदेमंद नहीं हो सकती है। बीजेपी बिना सीएम चेहरा घोषित किए चुनाव में उतरने पर विचार कर रही है।
पुराने इतिहास पर नजर
बीजेपी और अकाली दल का गठबंधन 1996 से 2020 तक रहा है।
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1997 में दोनों ने मिलकर प्रचंड जीत हासिल की (SAD-75, BJP-18)।
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2007 (SAD-49, BJP-19) और 2012 (SAD-56, BJP-12) में भी इस गठबंधन ने सरकार बनाई थी।
कृषि कानूनों के मुद्दे पर 2020 में यह गठबंधन टूट गया था। अब चूंकि दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक ताकत का अंदाजा लगा चुके हैं, ऐसे में कागजों और आंकड़ों के आधार पर फिर से साथ आने की जमीन तैयार की जा रही है। अगर यह गठबंधन होता है, तो पंजाब में 2027 का चुनाव दिलचस्प और त्रिकोणीय होने के पूरे आसार हैं।

