BJP का पंजाब प्लान: 25 हजार बूथों पर संगठन, 117 सीटों पर अकेले मैदान

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य की सभी 117 सीटों पर अकेले दम पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। पार्टी के पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया ने दावा किया है कि बीजेपी आगामी विधानसभा चुनाव में ‘चमत्कार’ करेगी और अपनी संगठनात्मक रणनीति, बूथ प्रबंधन और आक्रामक प्रचार के बलबूते 58 सीटों के बहुमत के आंकड़े को पार कर लेगी।
2022 के विधानसभा चुनाव में नए दलों के साथ गठबंधन के बावजूद बीजेपी को राज्य में सिर्फ दो सीटों पर जीत मिली थी। ऐसे में पार्टी अब पूरी तरह अपने संगठन और जमीनी विस्तार के सहारे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
1997 में मिली थीं 18 सीटें, 2022 में सिमटी 2 पर
पंजाब विधानसभा के इतिहास में बीजेपी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1997 में रहा था, जब उसने शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन में 18 सीटें जीती थीं। उस दौर में मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस और अकाली-बीजेपी गठबंधन के बीच था।
वर्तमान में पंजाब का राजनीतिक परिदृश्य काफी बदल चुका है। 2022 के प्रचंड बहुमत के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) सत्ता में है, जबकि शिरोमणि अकाली दल राजनीतिक रूप से कमजोर स्थिति में पहुंचा है। दूसरी ओर, ‘वारिस पंजाब दे’ का प्रभाव पारंपरिक सिख वोटरों के बीच देखा गया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 26.30 प्रतिशत वोटों के साथ 7 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को 18.56 प्रतिशत वोट हासिल करने के बावजूद एक भी सीट पर जीत नहीं मिल सकी थी।
25 हजार बूथों पर संगठन विस्तार, तोड़ा जा रहा ‘शहरी पार्टी’ का ठप्पा
पंजाब में बीजेपी की पहचान लंबे समय तक केवल शहरी और हिंदू मतदाताओं तक सीमित पार्टी के तौर पर रही है, जबकि राज्य में लगभग 60 प्रतिशत आबादी सिखों की है। पार्टी नेताओं का दावा है कि पिछले पांच वर्षों में संगठन ने इस छवि को बदलने के लिए व्यापक काम किया है।
पार्टी के पास अब रवनीत सिंह बिट्टू, मनप्रीत सिंह बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह और केवल सिंह ढिल्लों जैसे प्रमुख जाट सिख चेहरे मौजूद हैं। इसके अलावा अन्य दलों से आए रणनीतिकारों को भी संगठन में जिम्मेदारी दी गई है।
राज्य में कुल 25 हजार पोलिंग बूथ हैं। संगठन के प्लान के अनुसार, जून तक 15 हजार बूथों पर 11-11 कार्यकर्ताओं की कमेटियां गठित कर दी गई थीं, जबकि सितंबर तक बाकी बचे 10 हजार बूथों पर भी यह संगठनात्मक ढांचा तैयार करने का लक्ष्य तय किया गया है।
‘नशा मुक्ति यात्रा’ के बाद तय होंगे प्रत्याशी
बीजेपी ने चुनावी प्रचार की रणनीति में भी बदलाव किया है। अब पार्टी केवल बड़ी रैलियों तक सीमित रहने के बजाय सीधे जमीनी संपर्क पर जोर दे रही है। जाट सिख चेहरों को शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भेजा जा रहा है। प्रचार अभियान के तहत राज्य में किसी न किसी केंद्रीय नेता की नियमित मौजूदगी तय की गई है।
वर्तमान में पार्टी का पूरा फोकस ‘नशा मुक्ति यात्रा’ पर है। इसके तहत पार्टी का प्रचार रथ 117 विधानसभा क्षेत्रों में 4 हजार किलोमीटर का सफर तय कर रहा है। इस यात्रा के पूरा होने के बाद ही उम्मीदवारों के चयन की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
2024 के लोकसभा चुनाव में 23 विधानसभा क्षेत्रों में मिली थी बढ़त
बीजेपी को 2024 के लोकसभा चुनाव में 18.56 प्रतिशत वोट मिले थे, जो 2022 के विधानसभा चुनाव की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक था। इस लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी 23 विधानसभा क्षेत्रों में पहले नंबर पर रही थी, जबकि कांग्रेस 37 और आम आदमी पार्टी 33 विधानसभा क्षेत्रों में आगे थी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बहुकोणीय मुकाबले में बिना किसी गठबंधन के 58 सीटों का बहुमत हासिल करना आसान नहीं है, लेकिन संगठन विस्तार और वोट शेयर में लगातार बढ़ोतरी के दम पर पार्टी खुद को मुख्य विपक्षी ताकत के रूप में स्थापित करने और 26 से 28 सीटें जीतने के लक्ष्य पर काम कर रही है।

