संकट टालने के लिए भारत से 1100 मेगावाट बिजली खरीदेगा नेपाल

काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने व्यापक तबाही मचाई है, जिसका सीधा असर देश के ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ा है। प्राकृतिक आपदा के कारण कई प्रमुख हाइड्रोपावर (जलविद्युत) प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है और बिजली उत्पादन क्षमता काफी गिर गई है। आगामी सर्दियों और गर्मियों के मौसम में संभावित बिजली संकट से निपटने के लिए नेपाल अब भारत से 1100 मेगावाट तक बिजली खरीदने की तैयारी कर रहा है।
640 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता हुई प्रभावित
नेपाल के बिजली प्राधिकरण (NEA) के अनुसार, देश की वर्तमान बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 3740 मेगावाट है। लेकिन, हाल की प्राकृतिक आपदाओं ने करीब 640 मेगावाट की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है।
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26 अगस्त को भोटेकोशी इलाके में आई अचानक बाढ़ से ऊर्जा ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा, जिससे 450 मेगावाट का उत्पादन पूरी तरह रुक गया।
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इसके बाद, 24 से 27 सितंबर के बीच हुई मूसलाधार बारिश ने 190 मेगावाट की कालीगंडकी हाइड्रोपावर परियोजना को भी ठप कर दिया।
दिसंबर 2026 से मई 2027 तक बढ़ेगी मांग
NEA के प्रवक्ता राजन ढकाल ने बताया कि नेपाल में दिसंबर 2026 से मई 2027 के बीच बिजली की मांग में भारी इजाफा होने का अनुमान है। विशेषकर फरवरी से मई के दौरान घरेलू मांग अपने चरम पर होगी। इसी मांग को पूरा करने के लिए भारत से बिजली आयात करने की योजना बनाई गई है।
प्राधिकरण ने जानकारी दी है कि बाढ़ प्रभावित कुछ परियोजनाओं में मरम्मत का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। फरवरी तक करीब 160 मेगावाट उत्पादन क्षमता के फिर से शुरू होने की उम्मीद है। वहीं, 190 मेगावाट वाली कालीगंडकी परियोजना को भी अगले कुछ महीनों में बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
फिलहाल भारत को बिजली निर्यात कर रहा है नेपाल
इस पूरे घटनाक्रम का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि भविष्य की जरूरतों के लिए भारत से बिजली आयात करने की योजना बना रहा नेपाल, मौजूदा समय में भारत को ही 600 से 700 मेगावाट बिजली का निर्यात कर रहा है।
इसके पीछे का मुख्य कारण मानसून है। मानसून के दौरान नेपाल की नदियों में जलस्तर काफी बढ़ जाता है, जिससे जलविद्युत परियोजनाओं में उत्पादन क्षमता से अधिक होता है। नेपाल इस अतिरिक्त बिजली को भारत को बेचता है। वहीं, सूखे मौसम (सर्दियों और गर्मियों) में जब नदियों का जलस्तर गिरता है और घरेलू उत्पादन घट जाता है, तब नेपाल अपनी जरूरत पूरी करने के लिए भारत से बिजली खरीदता है। बीते कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच सीमा-पार बिजली कारोबार के इस तंत्र में काफी मजबूती आई है।

