चुनाव आयोग पर संग्राम: CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव लाने की तैयारी?

gyanesh kumar
शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

नई दिल्ली: चुनाव आयोग (Election Commission) की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर देश में राजनीतिक पारा गरम है। चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ाने और एकजुटता दिखाने के लिए विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के शीर्ष नेता बुधवार (29 सितंबर 2026) को एक अहम बैठक करने जा रहे हैं।

इस बैठक का मुख्य एजेंडा चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करना और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना है।

CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रस्ताव पर हो सकती है चर्चा

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में प्रस्ताव लाने का एक ड्राफ्ट नोटिस तैयार किया गया है। बुधवार को होने वाली इस उच्चस्तरीय बैठक में इस ड्राफ्ट नोटिस पर विस्तार से चर्चा होगी और इसे अंतिम मंजूरी मिलने की संभावना है।

बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी सहित लेफ्ट, एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

अखिलेश यादव नहीं होंगे शामिल, सपा से जाएगा प्रतिनिधि

समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं होंगे। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा चुनाव के नामांकन (Nomination) के कारण अखिलेश यादव व्यस्त हैं, इसलिए उनकी जगह पार्टी का कोई अन्य वरिष्ठ नेता इस बैठक में सपा का प्रतिनिधित्व करेगा।

AAP और DMK ने बनाई बैठक से दूरी

इस महत्वपूर्ण बैठक से आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने दूर रहने का फैसला किया है। केसी वेणुगोपाल ने इन दलों को साथ लाने के सवाल पर कहा कि बैठक में इन मुद्दों पर भी चर्चा होगी।

बैठक में शामिल न होने के बावजूद डीएमके (DMK) ने चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का सैद्धांतिक समर्थन किया है। डीएमके प्रवक्ता टी.के.एस. एलांगोवन ने साफ किया कि अगर संसद में सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव लाया जाता है, तो उनकी पार्टी उसका पूरा समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि वैचारिक रूप से डीएमके विपक्ष के साथ है, भले ही वह औपचारिक रूप से ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठकों में शामिल न हो।

चुनाव आयोग को लेकर क्यों मचा है घमासान?

विपक्ष का यह कड़ा रुख द इंडियन एक्सप्रेस की हालिया रिपोर्ट के बाद और तेज हो गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार अपनी लिखित आपत्तियां (ऑन-रिकॉर्ड) दर्ज कराई थीं। उनका आरोप था कि ये आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए।

इन विवादों पर चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा है कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना एक सामान्य बात है। आयोग ने स्पष्ट किया कि उसके सभी आदेशों को पूर्ण कानूनी मान्यता प्राप्त है और स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।

इससे पहले 8 जून को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में नीट-सीबीएसई विवाद पर एकजुटता दिखाते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई थी, साथ ही SIR और वोट चोरी के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखने का निर्णय लिया गया था।