सीट पर दशकों तक आजम खान का दबदबा रहा, वहां BJP की जीत कैसे हुई?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में शुमार रामपुर विधानसभा क्षेत्र का चुनावी इतिहास चार दशकों तक मोहम्मद आजम खान की सियासत के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। 1980 से 2022 के बीच हुए 11 आम विधानसभा चुनावों में से 10 बार आजम खान ने जीत दर्ज की और विधानसभा पहुंचे। हालांकि, 2022 के अंत में हुए उपचुनाव ने इस सीट का सियासी रुख बदल दिया। आपराधिक मामले में सजा मिलने के बाद आजम खान की विधायकी रद्द हुई और उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आकाश सक्सेना ने पहली बार इस सीट पर जीत दर्ज की। अब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच रामपुर का सियासी इतिहास और नया समीकरण फिर चर्चा में है।
1980 से 1993: जनता पार्टी से सपा के संस्थापक सदस्य तक का सफर
मोहम्मद आजम खान पहली बार 1980 में रामपुर विधानसभा से चुनकर लखनऊ पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने 1985, 1989, 1991 और 1993 में लगातार जीत हासिल की।
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1991 का चुनाव 1990 के अयोध्या गोलीकांड के बाद हुआ था। उस समय आजम खान जनता पार्टी के प्रत्याशी थे। उन्होंने 27,318 वोट पाकर बीजेपी के जोगेश चंद्र अरोड़ा (24,684 वोट) को 2,634 वोटों से हराया था। निर्दलीय अफरोज अली खान 24,118 वोट लेकर तीसरे और कांग्रेस के मुकर्रम हुसैन सिद्दीकी 13,295 वोट लेकर चौथे स्थान पर रहे थे।
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1992 में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी का गठन किया, जिसमें आजम खान संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। 1993 में आजम खान पहली बार सपा के टिकट पर मैदान में उतरे और कांटे की टक्कर में जनता दल के अफरोज अली खान को महज 600 वोटों से हराया। आजम खान को 40,324 और अफरोज अली खान को 39,724 वोट मिले थे, जबकि बीजेपी के जोगेश चंद्र अरोड़ा 33,739 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
1996 की एकमात्र हार और 2002 से 2017 का दौर
1980 से 2022 के बीच आजम खान को केवल एक बार 1996 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के टिकट पर लड़े अफरोज अली खान ने उन्हें 13,906 वोटों के अंतर से हराया था। इस चुनाव में अफरोज अली खान को 69,184 और आजम खान को 55,278 वोट मिले थे।
हार के बाद 2002 के चुनाव में आजम खान ने फिर वापसी की और अफरोज अली खान को 37,991 वोटों के बड़े अंतर से मात दी। इसके बाद जीत का सिलसिला आगे बढ़ता गया:
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2007: उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी, लेकिन रामपुर में आजम खान सपा के टिकट पर 53,091 वोट पाकर जीते। उन्होंने कांग्रेस के अफरोज अली खान (19,719 वोट) को 33,372 वोटों से हराया।
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2012: सपा की पूर्ण बहुमत सरकार बनने के दौरान आजम खान ने जीत का अंतर दोगुना कर लिया। उन्होंने कांग्रेस के डॉ. तनवीर अहमद खान को 63,269 वोटों से शिकस्त दी।
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2017: प्रदेश भर में बीजेपी गठबंधन की लहर में एनडीए को 325 सीटें मिलीं और सपा 47 सीटों पर सिमट गई, लेकिन आजम खान ने अपनी सीट बचा ली। उन्होंने बीजेपी के शिव बहादुर सक्सेना को 46,842 वोटों के अंतर से हराया।
2019 उपचुनाव से 2022 के ऐतिहासिक बदलाव तक
2019 में आजम खान के लोकसभा सांसद बनने के बाद रामपुर सीट खाली हुई। उपचुनाव में सपा ने आजम खान की पत्नी डॉ. तजीन फातमा को मैदान में उतारा, जिन्होंने बीजेपी के भरत भूषण को 7,716 वोटों से हराया।
2022 के आम चुनाव में आजम खान फिर विधानसभा चुनाव लड़े और 1,31,225 वोट हासिल कर बीजेपी के आकाश सक्सेना (76,084 वोट) को 55,141 वोटों के अंतर से मात दी।
विधानसभा चुनाव जीतने के कुछ ही महीनों बाद एक आपराधिक मामले में कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने पर आजम खान की सदस्यता समाप्त हो गई। 2022 के अंत में हुए उपचुनाव में बीजेपी ने फिर आकाश सक्सेना पर दांव लगाया, जबकि सपा ने आसिम राजा को टिकट दिया। इस उपचुनाव में आकाश सक्सेना ने 81,432 वोट पाकर सपा के आसिम राजा (47,296 वोट) को 34,136 वोटों से हरा दिया और रामपुर सीट पर पहली बार भाजपा का परचम लहराया।
रामपुर विधानसभा चुनाव परिणाम (1991 से 2022 उपचुनाव तक)
| वर्ष | विजेता प्रत्याशी | पार्टी | मिले वोट | उप-विजेता प्रत्याशी | पार्टी | मिले वोट | जीत का अंतर |
| 1991 | मोहम्मद आजम खान | JP | 27,318 | जोगेश चंद्र अरोड़ा | BJP | 24,684 | 2,634 |
| 1993 | मोहम्मद आजम खान | SP | 40,324 | अफरोज अली खान | JD | 39,724 | 600 |
| 1996 | अफरोज अली खान | INC | 69,184 | मोहम्मद आजम खान | SP | 55,278 | 13,906 |
| 2002 | मोहम्मद आजम खान | SP | 73,920 | अफरोज अली खान | INC | 35,929 | 37,991 |
| 2007 | मोहम्मद आजम खान | SP | 53,091 | अफरोज अली खान | INC | 19,719 | 33,372 |
| 2012 | मोहम्मद आजम खान | SP | 95,772 | डॉ. तनवीर अहमद खान | INC | 32,503 | 63,269 |
| 2017 | मोहम्मद आजम खान | SP | 1,02,100 | शिव बहादुर सक्सेना | BJP | 55,258 | 46,842 |
| 2019 (उप.) | डॉ. तजीन फातमा | SP | 79,043 | भरत भूषण | BJP | 71,327 | 7,716 |
| 2022 | मोहम्मद आजम खान | SP | 1,31,225 | आकाश सक्सेना | BJP | 76,084 | 55,141 |
| 2022 (उप.) | आकाश सक्सेना | BJP | 81,432 | आसिम राजा | SP | 47,296 | 34,136 |
(स्त्रोत: भारत निर्वाचन आयोग)
2027 का चुनावी समीकरण
रामपुर विधानसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की आबादी 40 प्रतिशत से अधिक है। इसी सामाजिक बनावट के कारण 1951 से लेकर 2022 के आम चुनाव तक केवल एक बार को छोड़कर हर बार मुस्लिम उम्मीदवार ही यहां से विधायक चुना गया।
2027 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजबूत और स्वीकार्य उम्मीदवार उतारने की होगी, क्योंकि आजम खान फिलहाल जेल में हैं। वहीं, बीजेपी 2022 के उपचुनाव में मिली अपनी जीत को बरकरार रखने के लिए जमीन तैयार कर रही है। राजनीतिक मोर्चे पर इस बार मुकाबला सपा-कांग्रेस गठबंधन और बीजेपी-आरएलडी गठबंधन के बीच तय माना जा रहा है।

