EVM हटाकर बैलेट पेपर से हों चुनाव! मायावती ने दोहराई पुरानी मांग

देश की चुनावी व्यवस्था और मतदान की शुचिता को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। बसपा सुप्रीमो ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) पर्चियों के शत-प्रतिशत मिलान की मांग को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता के भरोसे पर टिकी होती है, और जब तक वोटर के मन में अपने वोट को लेकर रत्ती भर भी संदेह रहेगा, व्यवस्था पर सवाल उठते रहेंगे।
‘अगर नागरिक के मन में संशय है, तो यह गंभीर स्थिति’
मायावती ने कहा कि मतदान देश के हर नागरिक का सबसे बड़ा संवैधानिक अधिकार है। यदि किसी वोटर के मन में यह हिचकिचाहट रह जाए कि उसका वोट सही प्रत्याशी को मिला भी है या नहीं, तो यह पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक चिंताजनक स्थिति बन जाती है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया इतनी पारदर्शी और स्पष्ट होनी चाहिए कि समाज के हर तबके को उस पर अटूट विश्वास रहे।
मतपत्रों के दौर से मशीनों तक: ‘सुविधा से बढ़कर निष्पक्षता’
चुनावी इतिहास का हवाला देते हुए बसपा प्रमुख ने याद दिलाया कि आजादी के बाद दशकों तक देश में मतपत्रों (Ballot Papers) के जरिए चुनाव होते थे। उस दौर में वोटर अपने हाथ से मुहर लगाकर मतपेटी में पर्ची डालता था, जिससे उसे अपनी पसंद पर पूरा भरोसा रहता था।
उन्होंने कहा कि बसपा शुरुआत से ही मशीनी मतदान के तौर-तरीकों पर ऐतराज जताती रही है। आधुनिक तकनीक भले ही सुविधा लाती हो, लेकिन चुनावी व्यवस्था में सुविधा से कहीं ज्यादा महत्व निष्पक्षता और जनभावना के सम्मान का होना चाहिए।
कमजोर और वंचित वर्ग के भरोसे पर जोर
मायावती ने रेखांकित किया कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में एक बड़ा तबका आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा हुआ है। ग्रामीण अंचलों और कम पढ़े-लिखे मतदाताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब कोई गरीब, वंचित या मजदूर कतार में लगकर वोट डालता है, तो उसके मन में कोई असमंजस नहीं होना चाहिए।
यदि यह वर्ग चुनावी प्रक्रिया पर संदेह करने लगेगा, तो उसका विश्वास लोकतांत्रिक संस्थाओं से डगमगा जाएगा। इसलिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक व्यवस्था की निष्पक्षता का संदेश पहुंचाना चुनाव आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
वीवीपैट पर्चियों की 100% गिनती की मांग
वर्तमान वीवीपैट व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ स्क्रीन पर 7 सेकंड तक पर्ची दिख जाना ही पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है। मौजूदा नियमों के तहत हर विधानसभा क्षेत्र में केवल कुछ चुनिंदा बूथों की पर्चियों का मिलान किया जाता है।
बसपा प्रमुख ने मांग की कि जब तक प्रत्येक मतदान केंद्र पर दर्ज कुल मतों और वीवीपैट से निकली पर्चियों का शत-प्रतिशत मिलान नहीं किया जाता, तब तक लोगों की आशंकाएं खत्म नहीं होंगी। मतदाता को यह पूर्ण संतुष्टि मिलनी चाहिए कि स्क्रीन पर दिखा निशान और बक्से में दर्ज फैसला पूरी तरह एक ही है।
‘जनता का विश्वास ही लोकतंत्र की असली बुनियाद’
मायावती ने चुनाव आयोग और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं से आग्रह किया कि वे आगे आकर इन तमाम संशयों का स्थायी समाधान निकालें। उन्होंने कहा कि चुनाव केवल सरकार बनाने या बिगाड़ने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह करोड़ों नागरिकों की उस आस्था का प्रतीक हैं जो वे संविधान और देश की व्यवस्था पर जताते हैं। पारदर्शी प्रक्रिया से न केवल राजनीतिक दलों की आशंकाएं दूर होंगी, बल्कि आम मतदाता का मनोबल भी बढ़ेगा।

