यूपी में एक नहीं, 75 घोषणापत्र! अखिलेश का जिला-दर-जिला प्लान क्या है?

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (SP) ने अपनी प्रचार रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। राज्य भर के लिए एक ही साझा घोषणापत्र जारी करने की पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने ‘यूपी के 75 जिलों के लिए 75 घोषणापत्र’ के नए फॉर्मूले पर मुहर लगा दी है।
यूपी सरकार के ‘एक जिला, एक उत्पाद’ अभियान की तर्ज पर सपा ने यह योजना तैयार की है। इसके पीछे मुख्य सोच यह है कि राज्य के हर जिले की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, लोगों की उम्मीदें और स्थानीय चुनौतियां अलग-अलग होती हैं, जिन्हें एक राज्य-स्तरीय दस्तावेज में पूरी तरह से समेटना संभव नहीं हो पाता। पार्टी का ध्यान इस बात पर होगा कि सत्ता में आने पर वह उस विशिष्ट जिले को कैसे बदलना चाहती है।
‘थिंक ग्लोबल, एक्ट लोकल’ की रणनीति
इस जिला-विशिष्ट घोषणापत्र से समाजवादी पार्टी को हर जिले के अलग-अलग जातीय और सामुदायिक समीकरणों के हिसाब से वादे करने में मदद मिलेगी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने इसे ‘सोच ग्लोबल, काम लोकल’ का तरीका बताया है।
पार्टी नेताओं के मुताबिक, पश्चिमी यूपी के नोएडा और बुंदेलखंड के बांदा के लिए एक जैसा घोषणापत्र काम नहीं कर सकता। नोएडा में शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्याएं हैं, लेकिन यह रोजगार पैदा करने वाला जिला है। दूसरी ओर, बांदा में बुनियादी ढांचा खराब है और यह रोजगार चाहने वाला क्षेत्र है। लोकसभा चुनावों में जहां राष्ट्रीय मुद्दे हावी रहते हैं, वहीं विधानसभा चुनाव में रोजी-रोटी, बिजली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी जरूरतें मतदान तय करती हैं।
5 मुख्य समस्याओं और युवाओं पर फोकस
समाजवादी पार्टी के जिला-स्तरीय नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों की 5 मुख्य समस्याओं, रुके हुए प्रोजेक्ट्स और रोजगार के मौकों की विस्तृत सूची तैयार करने को कहा गया है। इसके लिए पांच मुख्य क्षेत्रों की पहचान की गई है—शिक्षा और स्वास्थ्य, रोजगार और उद्योग, किसान और कारीगर, बुनियादी ढांचा और पर्यटन।
फीडबैक इकट्ठा करने वाली टीमों को खास तौर पर ‘जेन-जी’ (Gen-Z) और युवा वोटरों की उम्मीदों से जुड़ा डेटा जुटाने का निर्देश दिया गया है। युवाओं को लुभाने के लिए हर जिले के घोषणापत्र में पेपर लीक रोकने के उपाय, गिग वर्कर्स, BPO और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए विशेष योजनाएं शामिल की जाएंगी। इसके साथ ही पिछले पांच सालों में हुए विरोध-प्रदर्शनों की मांगों और सरकार के अधूरे वादों की लिस्ट भी तैयार की जा रही है।
आगरा की बैठक से शुरू हुई थी कवायद
अखिलेश यादव ने सबसे पहले 12 सितंबर 2025 को आगरा में हुई पार्टी की एक बैठक में यह विचार रखा था। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा था कि पूर्वांचल, पश्चिमी यूपी, अवध और बुंदेलखंड की चुनौतियां एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। पूरे यूपी के लिए एक ही घोषणापत्र होने से अलग-अलग क्षेत्रों की खास मांगें छूट जाती हैं।
इस विचार के सामने आने के बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने इसे लागू करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
गठबंधन के बावजूद अपना घोषणापत्र लाती रही है सपा
साल 2017 से समाजवादी पार्टी बड़े दलों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ती आ रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन के तहत 10-सूत्रीय साझा न्यूनतम कार्यक्रम जारी किया गया था, लेकिन बाद में दोनों पार्टियों ने अपने अलग-अलग घोषणापत्र निकाले थे। 2019 में BSP के साथ गठबंधन में भी कोई संयुक्त मेनिफेस्टो नहीं था।
हाल ही में 2024 के लोकसभा चुनावों में भी सपा और कांग्रेस ने अपने अलग घोषणापत्र जारी किए थे। कांग्रेस के ‘न्याय पत्र’ में पुरानी पेंशन योजना का जिक्र नहीं था, जबकि सपा ने इसे अपने वादों में प्रमुखता से शामिल किया था।
सपा इस बार सिर्फ वादों की लिस्ट तक सीमित नहीं रहना चाहती। नए विजन के तहत पुरानी मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को दोबारा जिंदा करने पर जोर रहेगा। इनमें कन्नौज का इत्र, अलीगढ़ के ताले, मुरादाबाद का पीतल और फिरोजाबाद का कांच उद्योग शामिल है, जिनके लिए जिलेवार इंडस्ट्री-स्पेसिफिक फैसिलिटेशन सेंटर शुरू करने का खाका तैयार किया जा रहा है।

