1 अक्टूबर से बिना PUC वाले वाहनों पर 10 हजार का जुर्माना, जानें नए नियम

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

सर्दियों की दस्तक के साथ ही दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है। 1 अक्टूबर से राजधानी में बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट (PUC) वाले वाहनों के खिलाफ सघन जांच अभियान शुरू होने जा रहा है। इस दौरान बिना पीयूसी के कार या बाइक चलाते पकड़े जाने पर वाहन चालकों को सीधा 10,000 रुपये का चालान भरना होगा।

10 हजार का जुर्माना और लाइसेंस सस्पेंड होने का खतरा

मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) के तहत प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रशासन कड़ा रुख अपना रहा है। अगर जांच के दौरान वाहन का पीयूसी सर्टिफिकेट एक्सपायर या अवैध पाया जाता है, तो 10,000 रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा नियम तोड़ने वाले चालकों को जेल की सजा हो सकती है या उनका ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है।

चौराहों और पेट्रोल पंपों पर विशेष टीमों का पहरा

इस चेकिंग अभियान को प्रभावी बनाने के लिए परिवहन विभाग और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की विशेष टीमें तैयार की गई हैं। इन टीमों को मुख्य रूप से शहर के पेट्रोल पंपों और प्रमुख चौराहों पर तैनात किया जाएगा, जहां वाहनों को रोककर उनके सर्टिफिकेट की वैधता जांची जाएगी। सरकार ने वाहन मालिकों से अपील की है कि वे सड़क पर उतरने से पहले अपने वाहनों का प्रदूषण चेक करवा लें ताकि किसी भी तरह की परेशानी और कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।

बुराड़ी में नए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन की शुरुआत

वाहनों की फिटनेस और प्रदूषण जांच की प्रक्रिया को सुलभ बनाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज बुराड़ी में एक नए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार राजधानी के प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 1 अक्टूबर से शुरू हो रहे जांच अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली के हर नागरिक को सांस लेने के लिए साफ हवा मिल सके।

PUC सेंटर्स की कैमरों से होगी मॉनिटरिंग

प्रदूषण जांच में किसी भी तरह की धांधली रोकने के लिए अब तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जानकारी दी कि पीयूसी सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सरकार सभी पीयूसी सेंटरों पर कैमरे लगा रही है। इन कैमरों के जरिए सेंटर्स की कार्यप्रणाली की मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि बिना जांच के फर्जी सर्टिफिकेट जारी करने की शिकायतों पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके।