Punjab Election : जालंधर में 39% SC आबादी क्यों है बड़ा सियासी फैक्टर?

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

पंजाब की सियासत में दोआबा क्षेत्र के दिल कहे जाने वाले जालंधर का स्थान बेहद निर्णायक माना जाता है। यह जिला न केवल अपने खेल उद्योग (Sports Goods), चमड़ा कारोबार, सर्जिकल टूल्स और अनिवासी भारतीयों (NRIs) के मजबूत नेटवर्क के लिए जाना जाता है, बल्कि राज्य की चुनावी राजनीति में भी ‘सत्ता का रुख’ तय करने की ताकत रखता है।

जालंधर जिले में एक लोकसभा और कुल नौ विधानसभा सीटें आती हैं। 2008 के परिसीमन के बाद जिले की चार विधानसभा सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित की गई थीं, जिसके चलते इस पूरे क्षेत्र में दलित राजनीति और सामाजिक समीकरण चुनावी नतीजों की दिशा तय करते हैं।

जनसांख्यिकी और सामाजिक ताना-बाना (जनगणना 2011)

2011 की आधिकारिक जनगणना के अनुसार, जालंधर जिले की कुल आबादी 21,93,590 दर्ज की गई थी:

श्रेणी आंकड़े
कुल आबादी 21,93,590
पुरुष आबादी 11,45,211 (52.21%)
महिला आबादी 10,48,379 (47.79%)
लिंगानुपात 915 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष
शहरी आबादी 52.93% (11,61,171)
ग्रामीण आबादी 47.07% (10,32,419)

साक्षरता दर:

जिले की प्रभावी साक्षरता दर 82.48% है। पुरुष साक्षरता दर 86.15% और महिला साक्षरता दर 78.48% दर्ज की गई है, यानी स्त्री-पुरुष साक्षरता में करीब 7.67% अंकों का अंतर है।

धार्मिक ढांचा:

  • हिंदू: 63.56% (13,94,329)

  • सिख: 32.75% (7,18,363)

  • मुस्लिम: 1.38% (30,233)

  • ईसाई: 1.19% (26,016)

  • अन्य: 1.12%

जिले के ग्रामीण और शहरी हिस्सों में धार्मिक संरचना का अंतर साफ दिखाई देता है। जालंधर शहर (शहरी क्षेत्र) में हिंदू आबादी का प्रतिशत ज्यादा है, जबकि शाहकोट और नकोदर जैसी ग्रामीण तहसीलों में सिख समुदाय का अनुपात अधिक है।

39% दलित वोट बैंक: जालंधर की असली राजनीतिक ताकत

जालंधर जिले की राजनीति की सबसे बड़ी धुरी यहां की अनुसूचित जाति (SC) आबादी है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, जिले में अनुसूचित जाति के नागरिकों की संख्या 8,54,444 है, जो कुल आबादी का लगभग 38.95 प्रतिशत बैठती है।

जिले की 9 में से 4 विधानसभा सीटें सुरक्षित हैं:

  1. फिल्लौर (SC)

  2. करतारपुर (SC)

  3. जालंधर वेस्ट (SC)

  4. आदमपुर (SC)

यही कारण है कि डेरा सचखंड बल्लां का प्रभाव, रविदासिया और वाल्मीकि समाज के सरोकार, सामाजिक प्रतिनिधित्व, आरक्षण और कल्याणकारी योजनाएं यहां के चुनावी विमर्श के केंद्र में रहते हैं।

2022 विधानसभा नतीजे: कांग्रेस और AAP में बंटीं सीटें

2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में जब पूरे राज्य में आम आदमी पार्टी की लहर थी, तब जालंधर में मुकाबला बेहद कड़ा रहा। जिले की 9 सीटों में से कांग्रेस ने 5 और आम आदमी पार्टी (AAP) ने 4 सीटों पर कब्जा जमाया था:

  • कांग्रेस के खाते में (5 सीटें): फिल्लौर, शाहकोट, जालंधर नॉर्थ, जालंधर कैंट और आदमपुर।

  • AAP के खाते में (4 सीटें): नकोदर, करतारपुर, जालंधर वेस्ट और जालंधर सेंट्रल।

नकोदर और जालंधर सेंट्रल जैसी सीटों पर जीत का अंतर बेहद कम रहा था, जिसने साबित किया कि जालंधर में हर एक सीट पर जमीनी टक्कर काफी नजदीकी होती है।

2024 जालंधर वेस्ट उपचुनाव: AAP ने दिखाया अपना दम

जालंधर वेस्ट (SC) सीट 2024 में राज्य की सबसे चर्चित सीट बनी। 2022 में AAP के टिकट पर जीते शीतल अंगुराल ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था।

इसके बाद हुए उपचुनाव में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी मोहिंदर भगत ने जबर्दस्त प्रदर्शन करते हुए 55,246 वोट हासिल किए और भाजपा के शीतल अंगुराल को 37,325 वोटों के भारी अंतर से करारी शिकस्त दी। कांग्रेस की सुरिंदर कौर इस मुकाबले में तीसरे स्थान पर रहीं। इस उपचुनाव ने दिखाया कि आरक्षित सीटों पर मतदाता उम्मीदवार की विश्वसनीयता और स्थानीय विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।

शहरी बनाम ग्रामीण सियासत और आगे की राह

जालंधर का राजनीतिक परिदृश्य दो स्पष्ट भागों में बंटा हुआ है:

  • शहरी हलके (जालंधर सेंट्रल, नॉर्थ, वेस्ट, कैंट): यहां व्यापारी वर्ग, छोटे व मध्यम उद्योग (MSMEs), स्थानीय निकाय सुविधाएं, बुनियादी ढांचा, बिजली की दरें और कानून-व्यवस्था मुख्य चुनावी मुद्दे होते हैं। यहां हिंदू और व्यापारी वर्ग का वोट परिणाम तय करता है।

  • ग्रामीण हलके (नकोदर, शाहकोट, फिल्लौर, करतारपुर, आदमपुर): यहां कृषि, मंडियों की स्थिति, ग्रामीण सड़कें, नशा उन्मूलन, आवारा पशु और सामाजिक समीकरण मुख्य भूमिका निभाते हैं।

2024 के लोकसभा चुनाव में पूरे जालंधर संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस ने बढ़त हासिल की थी, जबकि जालंधर वेस्ट उपचुनाव में AAP ने शानदार जीत दर्ज की। ऐसे में आने वाले चुनावों में कांग्रेस का पारंपरिक जनाधार, AAP की सरकारी मशीनरी और जनहितैषी योजनाएं, अकाली दल का ग्रामीण पंथिक आधार और भाजपा का शहरी हिंदू वोट बैंक मिलकर जालंधर के चुनावी महासंग्राम को बहुकोणीय और रोमांचक बनाते हैं।