7 सीटें, दो समुदाय और बदलती सियासत, गुरदासपुर में किसका कितना दम?

रावी और ब्यास नदियों के दोआब में बसा पंजाब का गुरदासपुर जिला केवल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा एक संवेदनशील सरहदी इलाका ही नहीं है, बल्कि सूबे की चुनावी राजनीति में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाला जिला भी है। पाकिस्तान की सीमा से लगे इस ऐतिहासिक क्षेत्र में 1556 में मुगल बादशाह अकबर का कलानौर में राज्याभिषेक हुआ था, जबकि दीनानगर और बहरामपुर जैसे कस्बे महाराजा रणजीत सिंह और ऐतिहासिक दौर के साक्षी रहे हैं।
17वीं सदी में गुरिया दास जी द्वारा बसाया गया यह शहर आज सीमा सुरक्षा, किसानी, उद्योग और बहुकोणीय चुनावी जंग का प्रमुख केंद्र बन चुका है। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर गुरदासपुर जिले की 7 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच शह-मात का खेल शुरू हो चुका है।
जनसांख्यिकी और सामाजिक ताना-बाना (जनगणना 2011)
2011 की जनगणना के अनुसार गुरदासपुर जिले की कुल आबादी 22,99,026 दर्ज की गई थी:
| श्रेणी | आंकड़े |
| कुल आबादी | 22,99,026 |
| पुरुष आबादी | 12,12,995 |
| महिला आबादी | 10,86,031 |
| लिंगानुपात | 895 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष |
| औसत साक्षरता दर | 81.10% |
| पुरुष साक्षरता | 85.90% |
| महिला साक्षरता | 75.70% |
धार्मिक आबादी का अनूठा संतुलन:
पंजाब के सामान्य सिख-बहुल राजनीतिक परिदृश्य के विपरीत गुरदासपुर में हिंदू और सिख आबादी लगभग बराबरी के अनुपात में है, जो यहां के चुनावी गणित को राज्य के अन्य जिलों से अलग बनाता है:
-
हिंदू: 46.74% (10,74,332)
-
सिख: 43.64% (10,02,874)
-
ईसाई: 7.68% (1,76,587)
-
मुस्लिम: 1.20% (27,667)
-
अन्य: शेष आबादी
ईसाई समुदाय की 7.68% मौजूदगी भी जिले की कई ग्रामीण सीटों पर हार-जीत के अंतर में निर्णायक भूमिका निभाती है।
गुरदासपुर जिले की 7 विधानसभा सीटें
प्रशासनिक और निर्वाचन आयोग की व्यवस्था के अनुसार गुरदासपुर जिले में कुल 7 विधानसभा क्षेत्र आते हैं:
-
गुरदासपुर
-
दीनानगर
-
कादियां
-
बटाला
-
श्री हरगोबिंदपुर
-
फतेहगढ़ चूड़ियां
-
डेरा बाबा नानक
2022 के नतीजे और 2024 उपचुनाव का बड़ा मोड़
2022 का जनादेश:
2022 के विधानसभा चुनाव में जब राज्यभर में आम आदमी पार्टी की आंधी चल रही थी, तब गुरदासपुर जिले में कांग्रेस ने मजबूती से अपनी जमीन बचाए रखी थी। 7 में से 4 सीटों—गुरदासपुर, दीनानगर, कादियां और फतेहगढ़ चूड़ियां पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। वहीं, आम आदमी पार्टी ने औद्योगिक केंद्र बटाला और श्री हरगोबिंदपुर सीट पर जीत दर्ज की थी।
डेरा बाबा नानक उपचुनाव (2024):
2024 में डेरा बाबा नानक विधानसभा सीट के विधायक सुखजिंदर सिंह रंधावा के गुरदासपुर से सांसद चुने जाने के बाद यह सीट रिक्त हुई। इसके बाद हुए उपचुनाव में आम आदमी पार्टी के गुरदीप सिंह रंधावा ने जीत हासिल कर कांग्रेस के इस गढ़ में सेंध लगाई। इस जीत के साथ जिले में AAP विधायकों की संख्या बढ़कर 3 हो गई, जबकि कांग्रेस 3 सीटों (गुरदासपुर, दीनानगर, कादियां) पर रह गई।
सियासी समीकरण: त्रिकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ता जिला
-
कांग्रेस बनाम AAP की मुख्य जंग: 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सुखजिंदर सिंह रंधावा ने 3,64,043 वोट हासिल कर गुरदासपुर सीट जीती थी। हालांकि, विधानसभा स्तर पर AAP का कैडर लगातार मजबूत हो रहा है, जिससे दोनों दलों के बीच सीधी टक्कर बनी हुई है।
-
भाजपा का मजबूत शहरी आधार: गुरदासपुर लोकसभा सीट पर लंबे समय तक अभिनेता विनोद खन्ना और बाद में सनी देओल सांसद रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के दिनेश सिंह बाबू 2,81,182 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे, जो AAP प्रत्याशी (2,77,252) से अधिक था। हिंदू-बहुल और शहरी सीटों जैसे गुरदासपुर, दीनानगर और बटाला में भाजपा का प्रभाव किसी भी दल के चुनावी समीकरण को बिगाड़ने या बनाने की क्षमता रखता है।
-
अकाली दल का पंथिक वोट: ग्रामीण इलाकों में शिरोमणि अकाली दल का पारंपरिक पंथिक आधार भी कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला खड़ा करता है।
जमीनी मुद्दे जो तय करेंगे 2027 का फैसला
-
सीमा सुरक्षा व कंटीली तार के पार खेती: अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे किसानों की जमीन, फेंसिंग के पार जाने की मुश्किलें और मुआवजे का सवाल।
-
बटाला का औद्योगिक संकट: ‘आयरन एंड मशीन टूल्स’ के लिए मशहूर बटाला के ढलवां उद्योग (Foundry Industry) को पुनर्जीवित करने और बिजली-टैक्स रियायतों की मांग।
-
धार्मिक पर्यटन और करतारपुर कॉरिडोर: डेरा बाबा नानक में करतारपुर साहिब कॉरिडोर के जरिए धार्मिक पर्यटन, स्थानीय व्यापार और आधारभूत ढांचे का विकास।
-
नशा और बेरोजगारी: सीमा पार से होने वाली ड्रोन तस्करी, नशीले पदार्थों के नेटवर्क पर रोक और युवाओं के लिए सीमावर्ती क्षेत्र में रोजगार के साधन।
गुरदासपुर की राजनीतिक प्रकृति हमेशा से मिली-जुली रही है। 2027 के चुनाव में कांग्रेस अपने बचे हुए प्रभाव को बचाने, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी अपने विस्तार को बरकरार रखने और भाजपा अपने पारंपरिक हिंदू वोट बैंक को सीटों में तब्दील करने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगी।

