Philippines Senate: सारा दुतेर्ते के महाभियोग में बदला वोटिंग फॉर्मूला

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

फिलीपींस की सीनेट ने उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते-कार्पियो (Sara Duterte-Carpio) के खिलाफ चल रहे महाभियोग परीक्षण (impeachment trial) में बड़ा फैसला लेते हुए दोषसिद्धि के लिए जरूरी वोटों की संख्या कम कर दी है। इस फैसले ने पहले से ही विभाजित महाभियोग की लड़ाई को और तेज कर दिया है।

बुधवार को महाभियोग अदालत के रूप में बैठी सीनेट ने फैसला सुनाया कि दोषसिद्धि (conviction) के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत तय करने में केवल उन्हीं सीनेटर-जजों को गिना जाएगा जो परीक्षण में हिस्सा लेने में सक्षम हैं।

कैसे और क्यों कम हुआ बहुमत का आंकड़ा?

फिलीपींस के संविधान के तहत, किसी भी अधिकारी को महाभियोग में दोषी ठहराने के लिए सीनेट में दो-तिहाई (two-thirds) वोटों की जरूरत होती है। हालांकि, मौजूदा समय में चार सीनेटर-जज नियमित रूप से परीक्षण में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं:

  • रोडांटे मार्कोलेटा और जिंगोय एस्ट्राडा भ्रष्टाचार के मामलों में हिरासत में हैं।

  • रोनाल्ड ‘बाटो’ डेला रोजा फरार हैं और उनके खिलाफ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) का अरेस्ट वारंट जारी है।

  • लोरेन लेगार्डा लंबी मेडिकल लीव पर विदेश में हैं।

अदालत ने तय किया है कि इन चार सांसदों की गैरमौजूदगी को दो-तिहाई बहुमत की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। इस फैसले के बाद दोषसिद्धि के लिए जरूरी वोटों की संख्या 16 से घटकर 14 हो गई है। सीनेट में इस फैसले के पक्ष में 13 वोट पड़े, जबकि एक ने इसके खिलाफ मतदान किया। दुतेर्ते गुट के करीबी माने जाने वाले छह सीनेटरों ने कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया।

सुप्रीम कोर्ट के चार रिटायर्ड जजों की गवाही के बाद यह फैसला लिया गया। इनमें से तीन जजों ने सलाह दी थी कि दो-तिहाई नियम से उन सीनेटरों को बाहर रखा जाना चाहिए जो परीक्षण में भाग लेने में असमर्थ हैं।

किन आरोपों का सामना कर रही हैं सारा दुतेर्ते?

सीनेट में दुतेर्ते-कार्पियो के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही दो मुख्य आरोपों पर आधारित है:

  1. राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर और उनके परिवार को गंभीर धमकियां देना।

  2. 2022 से 2024 के बीच शिक्षा सचिव रहते हुए 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के गोपनीय फंड का दुरुपयोग।

यदि दुतेर्ते-कार्पियो को दोषी ठहराया जाता है, तो उनके भविष्य में सार्वजनिक पद पर चुनाव लड़ने पर रोक लग जाएगी, जिससे 2028 का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की उनकी उम्मीदें खत्म हो जाएंगी।

‘दोषसिद्धि की राह अब काफी हद तक संभव’

यूनिवर्सिटी ऑफ द फिलीपींस कॉलेज ऑफ लॉ में संवैधानिक कानून के असिस्टेंट प्रोफेसर पाओलो तमासे ने कहा कि इस फैसले ने दोषसिद्धि की संभावनाओं को बढ़ा दिया है।

तमासे ने कहा, “संविधान का मकसद महाभियोग को मुश्किल बनाना है, असंभव नहीं। सीनेट के लिए यह असामान्य समय है, क्योंकि इसके कई सदस्य भ्रष्टाचार की शिकायतों का सामना कर रहे हैं। नई सीमा महाभियोग को जवाबदेही के तंत्र के रूप में जारी रखने की अनुमति देती है।”

मोमेंटम रिसर्च के संस्थापक और राजनीतिक वैज्ञानिक क्लीव अर्गुएल्स ने कहा कि अब अभियोजन (prosecution) का ध्यान उन सीनेटरों को मनाने पर होगा जो अपना रुख बदल सकते हैं। उनके मुताबिक, “13 सीनेटरों के इस नए नियम के पक्ष में मतदान करने के बाद 14 वोट हासिल करना अब काफी हद तक संभव है। हालांकि इन 13 वोटों को सीधे तौर पर दोषसिद्धि का वोट नहीं माना जा सकता, लेकिन गणित बताता है कि दोषसिद्धि अब दूर की कौड़ी नहीं है।”

प्रक्रिया की वैधता पर उठ सकते हैं सवाल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दुतेर्ते-कार्पियो के समर्थक सीनेटर अब जनता के बीच इस प्रक्रिया की वैधता को कमजोर करने की कोशिश कर सकते हैं।

नियम में बदलाव के पक्ष में वोट करने वाली सीनेटर रीसा होंटिवरोस ने अपने फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा, “कुछ सीनेटरों की अनुपस्थिति के कारण पूरी संस्था को पंगु नहीं बनाया जा सकता। हमें यह तय करना है कि वर्तमान में अदालत में कौन मौजूद है और अपनी शपथ पूरी करने में कौन सक्षम है।”

क्लीव अर्गुएल्स ने कहा कि इस परीक्षण के नतीजे 2028 के राष्ट्रपति चुनाव पर गहरा असर डालेंगे। उन्होंने कहा, “सबकी निगाहें इस पर होंगी कि कौन पाला बदलता है। एक भी दल-बदल केवल महाभियोग के फैसले के लिए ही नहीं, बल्कि 2028 में जाने वाले राजनीतिक गठबंधनों के व्यापक ढांचे के लिए भी काफी मायने रखेगा।”