VIP रूम के सोफे में खटमल मिलने पर जज नाराज, DRM से मांगा जवाब

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भोजराज नावानी
भोजराज नावानी

महाराष्ट्र के औरंगाबाद से भारतीय रेलवे की लापरवाही का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां रेलवे स्टेशन के VIP वेटिंग रूम में लगे सोफों पर खटमल मिलने और चार महीने तक इस पर कोई कार्रवाई न होने से नाराज औरंगाबाद रेलवे के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने नांदेड़ डिवीजन के डीआरएम (DRM) को ‘शो कॉज नोटिस’ (कारण बताओ नोटिस) जारी कर दिया है।

अदालत ने रेलवे अधिकारियों की इस लापरवाही को ‘घिनौनी स्थिति’ करार देते हुए डीआरएम को ‘अदालत की अवमानना’ (Contempt of Courts Act) के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी है।

4 महीने तक नहीं हुआ आदेश का पालन

यह पूरा विवाद 20 मई 2026 से जुड़ा है। उस वक्त VIP रूम के पुराने सोफों में भारी तादाद में खटमल मिलने के बाद ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने DRM को पत्र लिखा था। रेलवे अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे तुरंत पेस्ट कंट्रोल करवाएं, पुराने सोफों को नए सोफों से बदलें और VIP रूम का ठीक से रखरखाव सुनिश्चित करें।

हालांकि, लगभग चार महीने बीत जाने के बाद 19 सितंबर तक रेलवे की ओर से न तो सोफे बदले गए और न ही पेस्ट कंट्रोल कराया गया। यथास्थिति बरकरार रहने पर मजिस्ट्रेट ने सख्त रुख अपनाते हुए यह नोटिस जारी किया।

‘घिनौनी स्थिति’: कारों में इंतजार करने को मजबूर जज

मजिस्ट्रेट की ओर से जारी नोटिस में रेलवे की व्यवस्था पर कड़ी फटकार लगाई गई है। नोटिस में कहा गया है कि मौजूदा सोफों में अभी भी खटमल मौजूद हैं, जो हाई कोर्ट के जजों के बैठने के लिहाज से एक ‘घिनौनी स्थिति’ है।

वेटिंग रूम की इस दुर्दशा के कारण जजों को VIP रूम का इस्तेमाल करने के बजाय स्टेशन के बाहर अपनी कारों में ही बैठकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ रहा है। नोटिस में याद दिलाया गया है कि बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच में 15 से ज्यादा हाई कोर्ट जज कार्यरत हैं। इनमें से ज्यादातर जज ट्रेन से यात्रा करते हैं और उन्हें इसी VIP रूम में रुकना पड़ता है।

30 सितंबर को अदालत में व्यक्तिगत पेशी का आदेश

मजिस्ट्रेट ने नांदेड़ डिवीजन के DRM से कारण बताने को कहा है कि 20 मई के निर्देशों का पालन न करने पर उनके खिलाफ ‘अदालत की अवमानना’ का मामला क्यों न चलाया जाए।

  • पेशी का आदेश: संबंधित अधिकारी को 30 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत के सामने पेश होने का कड़ा निर्देश दिया गया है।

  • RPF को जिम्मेदारी: औरंगाबाद में RPF इंस्पेक्टर को यह नोटिस तामील कराने और अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

  • इस नोटिस की एक कॉपी साउथ सेंट्रल रेलवे (SCR) के जनरल मैनेजर को भी भेजी गई है, ताकि उच्च स्तर पर रेलवे प्रशासन की इस लापरवाही का संज्ञान लिया जा सके।