मोहम्मदाबाद-गोहना में बदलता रहा सियासी समीकरण, जानिए पूरा गणित

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। मऊ जिले की चार विधानसभा सीटों में शुमार मोहम्मदाबाद-गोहना (Muhammadabad Gohna) का सियासी मिजाज हमेशा से बदलाव पसंद रहा है। इस सीट की खासियत यह है कि पिछले कुछ चुनावों से मतदाता लगातार नए चेहरों और दलों पर भरोसा जताते रहे हैं।
1951-52 के पहले आम चुनाव में जब मऊ जिला नहीं बना था, तब मोहम्मदाबाद-गोहना दक्षिण सीट से पदमाकर निर्वाचित हुए थे। इसके बाद से यहां भाकपा, कांग्रेस, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, बसपा, भाजपा और सपा के बीच दिलचस्प चुनावी मुकाबले देखने को मिले हैं।
जातीय समीकरण: दलित, यादव, मुस्लिम और चौहान वोट बैंक निर्णायक
मोहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा क्षेत्र में किसी एक जाति का एकतरफा दबदबा नहीं है, बल्कि कई जातियों का संतुलन यहां हार-जीत तय करता है:
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अनुसूचित जाति (SC): लगभग 24% (सबसे बड़ा मतदाता वर्ग)
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यादव: करीब 17%
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मुस्लिम: लगभग 16%
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चौहान: करीब 8%
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राजभर: लगभग 7%
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पासी और राजपूत: लगभग 4-4%
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अन्य समुदाय: वैश्य, मौर्य, ब्राह्मण, भूमिहार, विश्वकर्मा, निषाद आदि 1% से 2% की हिस्सेदारी रखते हैं।
दलित, यादव और मुस्लिम मतदाताओं की गोलबंदी इस सीट पर चुनावी नतीजे तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाती है।
शुरुआती दौर: वामपंथ, समाजवाद और कांग्रेस के बीच झूलती सत्ता
1957 में यह एक द्विसदस्यीय सीट थी, जहां से भाकपा के चंद्रजीत यादव और कांग्रेस के श्रीनाथ जीते। 1962 में एकल सीट होने पर भाकपा के चंद्रजीत यादव ने जीत दोहराई।
1967 में कांग्रेस के एस. नाथ ने जनसंघ को हराकर जीत हासिल की। 1969 के मध्यावधि चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के श्याम लाल विजयी हुए। 1974 में भारतीय क्रांति दल के शिव प्रसाद ने बाजी मारी। आपातकाल के बाद 1977 में शिव प्रसाद ने जनता पार्टी के टिकट पर दोबारा जीत दर्ज की। 1980 में भाकपा के टापेश्वर और 1985 में कांग्रेस के राम बदन ने चुनाव जीता।
90 का दशक: बसपा और भाजपा का उभार
1989 के बाद यूपी की सियासत में आए बदलाव का असर मोहम्मदाबाद-गोहना पर भी दिखा:
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1989: बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने पहली बार यहां कदम जमाया और फौजदार विधायक बने।
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1991: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पहली बार खाता खोला और श्रीराम ने भाकपा को हराया।
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1993: बसपा के फौजदार ने भाजपा के श्रीराम को हराकर वापसी की।
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1996: भाजपा के श्रीराम ने बसपा के बनवारी को मात देकर फिर से कमल खिलाया।
2002 से 2022: सपा, बसपा और भाजपा के बीच ‘म्यूजिकल चेयर’
2000 के बाद मोहम्मदाबाद-गोहना सीट पर किसी भी एक दल का लगातार वर्चस्व कायम नहीं रहा है। हर चुनाव में सत्ता बदलती रही है:
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2002: समाजवादी पार्टी (SP) ने पहली बार जीत हासिल की। सपा के बैजनाथ ने बसपा के बनवारी को कड़े मुकाबले में 929 वोटों से हराया।
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2007: बसपा के राजेंद्र कुमार ने सपा के बनवारी को हराकर सीट पर कब्जा किया।
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2012: सपा के बैजनाथ ने बसपा के राजेंद्र कुमार को 3,139 वोटों से हराकर जोरदार वापसी की।
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2017: मोदी लहर में भाजपा के श्रीराम सोनकर ने बसपा के राजेंद्र कुमार को मात्र 538 वोटों के मामूली अंतर से हराकर भगवा फहराया।
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2022: 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के राजेंद्र कुमार ने भाजपा की पूनम सरोज को 26,649 वोटों के बड़े अंतर से मात दी। बसपा तीसरे स्थान पर रही।
