‘हमारी ताकत से डरकर 400 किमी दूर भागे अमेरिकी युद्धपोत’- ईरान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी सेना और नौसेना के तबाह होने के दावों को ईरान की सेना ने सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमीनिया ने कहा कि ईरानी नौसैनिक बलों की ताकत और मुस्तैदी के कारण ही अमेरिकी युद्धपोत ईरान के तटों के करीब आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं और भारी दूरी बनाकर तैनात हैं।
ईरानी सेना का यह बयान ट्रंप के उस दावे के जवाब में आया है जिसमें उन्होंने ईरानी सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचने की बात कही थी।
‘तटों के पास आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा अमेरिका’
ब्रिगेडियर जनरल अकरमीनिया ने कहा कि ओमान की खाड़ी, अरब सागर और उत्तरी हिंद महासागर में ईरानी नौसेना पूरी तरह तैनात है और पूरे क्षेत्र पर कड़ा नियंत्रण बनाए हुए है।
उन्होंने ट्रंप के बयानों पर तंज कसते हुए कहा, “अमेरिकी जहाजों को हमारे तटों के पास आने की इजाजत नहीं दी गई है। अगर ट्रंप के दावे के अनुसार ईरानी नौसेना नष्ट हो चुकी होती, तो दुश्मन हमारे तटों के बिल्कुल करीब आ गया होता, लेकिन उनमें ऐसी हिम्मत नहीं है। अमेरिकी युद्धपोतों का तटों से इतनी लंबी दूरी पर बने रहना ही ईरान की सैन्य ताकत का सबसे बड़ा सबूत है।”
इससे पहले 9 सितंबर को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता ने दावा किया था कि टकराव और दबाव के चलते अमेरिकी युद्धपोत होर्मुज जलडमरूमध्य से कम से कम 400 किलोमीटर दूर चले गए हैं और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के भीतर एक भी अमेरिकी युद्धपोत मौजूद नहीं है।
वाशिंगटन को नई चेतावनी: ‘गलती की तो होगा भारी नुकसान’
ईरानी सेना के प्रवक्ता ने अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उन्होंने दोबारा कोई गलत आकलन (Miscalculation) किया या कोई नया हमला करने का प्रयास किया, तो ईरान पहले से कहीं अधिक आक्रामक, व्यापक और निर्णायक पलटवार करेगा, जिससे अमेरिका को भारी पराजय का सामना करना पड़ेगा।
इसके साथ ही, अकरमीनिया ने अप्रैल में ईरान के भीतर एक अमेरिकी पायलट को बचाने के ऑपरेशन और उस पर बने सीबीएस न्यूज के ’60 मिनट्स’ इंटरव्यू को हॉलीवुड शैली का प्रोपेगैंडा बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया के सामने अपनी ‘अजेय’ होने की झूठी छवि पेश करने की नाकाम कोशिश कर रहा है।
पेंटागन की रिपोर्ट: अमेरिकी ठिकानों को पहुंचा भारी नुकसान
ईरान के दावों के बीच पेंटागन के महानिरीक्षक (Inspector General) के एक आंतरिक आकलन ने भी पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य स्थिति को पहुंचे नुकसान की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार:
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सैकड़ों इमारतों को नुकसान: क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए ईरानी हमलों में सैकड़ों इमारतों और बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचा या वे पूरी तरह नष्ट हो गए।
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हथियारों और गोला-बारूद की कमी: हमलों के चलते प्रमुख हथियारों और गोला-बारूद के स्टॉक में भारी गिरावट आई है।
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सैन्य ढांचे में फेरबदल: हमलों के दबाव के कारण अमेरिका को अपने सैनिकों, हथियारों और रसद गोदामों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ा, जिससे नौसैनिक और मेडिकल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई।
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राजनयिक संपत्ति का नुकसान: मध्य पूर्व क्षेत्र में अमेरिकी राजनयिक प्रतिष्ठानों को लगभग 184 मिलियन डॉलर (करीब 1,500 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि इस सैन्य और राजनयिक फेरबदल के कई असर स्थायी हो सकते हैं।
