PM Modi Birthday: चाय की दुकान से 3 बार प्रधानमंत्री बनने का सफर

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

17 सितंबर 1950 का दिन भारत के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखने वाला साबित हुआ। गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित एक छोटे से कस्बे वडनगर में नरेंद्र दामोदरदास मोदी का जन्म हुआ था। आज 17 सितंबर 2026 को नरेंद्र मोदी अपने जीवन के 76 गौरवशाली वर्ष पूरे कर चुके हैं। उनका यह सफर केवल एक साधारण राजनीतिक करियर की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे इंसान की दास्तान है जिसने जमीन से उठकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की कमान अपने हाथों में संभाली है।

एक छोटे से शहर के रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने से लेकर लगातार तीन बार भारत का प्रधानमंत्री बनने तक का उनका यह ऐतिहासिक सफर अनुशासन, कड़े संघर्ष और अनूठी नेतृत्व क्षमता की एक बेमिसाल कहानी पेश करता है।

वडनगर का संघर्षपूर्ण बचपन

नरेंद्र मोदी का बचपन बेहद साधारण और आर्थिक रूप से संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में बीता। उनके पिता दामोदरदास मोदी और मां हीराबेन का जीवन बेहद सादगी भरा था। पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ बालक नरेंद्र अपने पिता के काम में हाथ बंटाते थे और वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने का काम करते थे।

बचपन में चाय की दुकान पर लोगों की बातें सुनना और समाज के विभिन्न वर्गों को करीब से देखना उनके शुरुआती जीवन का सबसे बड़ा अनुभव बना। यही वह दौर था जिसने उनके भीतर अनुशासन, कड़ी मेहनत और आम जनता के दर्द को समझने की गहरी संवेदनशीलता जगाई। बचपन का यह अमूल्य अनुभव आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बन गया।

RSS का अनुशासन और संगठन की सीढ़ियां

किशोरावस्था से ही नरेंद्र मोदी का झुकाव समाज सेवा और राष्ट्रवाद की ओर होने लगा था। वे जल्द ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संपर्क में आए और संगठन के काम से गहराई से जुड़ गए। वर्ष 1972 में वे संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए।

अहमदाबाद में आरएसएस के दफ्तर में रहकर उन्होंने जमीन पर काम करना शुरू किया। संघ में रहते हुए उन्होंने पूरे गुजरात के कोने-कोने की यात्राएं कीं और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत बनाया। संगठन में उनकी इस अद्भुत कार्यकुशलता और कुशल रणनीति बनाने की क्षमता को देखते हुए 1980 के दशक में उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) में भेजा गया। बीजेपी में आने के बाद भी उन्होंने संगठन महासचिव के रूप में गुजरात और बाद में राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को एक नई और मजबूत दिशा प्रदान की।

2001: गुजरात के CM बनने का ऐतिहासिक मोड़

नरेंद्र मोदी के पूरे जीवन का सबसे बड़ा और निर्णायक राजनीतिक मोड़ 7 अक्टूबर 2001 को आया। इसी दिन उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उस समय गुजरात 2001 के भयानक भूकंप की त्रासदी और गंभीर आर्थिक संकटों से जूझ रहा था। उनके सामने राज्य को फिर से खड़ा करने की एक विशाल चुनौती थी।

अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और दूरदर्शी सोच के बल पर उन्होंने गुजरात में विकास का एक नया मॉडल (Gujarat Model) पेश किया। वे लगातार मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। लगभग 13 साल के इस लंबे कार्यकाल में उन्होंने गुजरात को औद्योगिक और आर्थिक रूप से देश का एक अग्रणी राज्य बना दिया, जिसने उनकी छवि को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में मजबूती से स्थापित कर दिया।

2014 से 2026: दिल्ली की गद्दी और लगातार हैट्रिक

गुजरात में मिली अभूतपूर्व सफलता के बाद भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। 2014 के आम चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल कर 26 मई 2014 को उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। वे आजाद भारत में जन्म लेने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री बने।

इसके बाद 2019 में बीजेपी ने उनके नेतृत्व में एक बार फिर और भी बड़ी जीत दर्ज की। फिर साल 2024 के लोकसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर उन्होंने इतिहास रच दिया। वडनगर की तंग गलियों से शुरू हुआ सफर अब दिल्ली के 7 लोक कल्याण मार्ग तक मजबूती से कायम है।

76 साल की उम्र और शासन के 25 साल

17 सितंबर 2026 को 76 वर्ष की उम्र में पहुंचे नरेंद्र मोदी के लिए यह जन्मदिन सिर्फ उम्र का एक आंकड़ा नहीं है। अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से लेकर अब तक लगातार 25 सालों तक (बिना ब्रेक) किसी भी सरकार (राज्य और केंद्र) के प्रमुख के रूप में जनता की सेवा करने का एक दुर्लभ और ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज हो रहा है।

इस ऐतिहासिक मौके पर भारतीय जनता पार्टी देश भर में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक एक महीने का ‘सेवा संकल्प अभियान’ चला रही है। चाय की टपरी से लेकर देश की सबसे बड़ी कुर्सी तक का यह सफर इस बात का प्रमाण है कि अटूट संकल्प, निष्ठा और राष्ट्रप्रेम से भारत का कोई भी नागरिक किसी भी ऊंचाई को छू सकता है।