सुप्रीम सुनवाई, क्या जाएगी 10 हजार शिक्षकों की नौकरी? जानें पूरा विवाद

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

उत्तर प्रदेश में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का बहुचर्चित मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर है। इस विवाद को लेकर शीर्ष अदालत में अहम सुनवाई हुई, जिसमें दोनों पक्षों के वकीलों ने जोरदार दलीलें पेश कीं। चयनित अभ्यर्थियों की ओर से पेश वकीलों ने अदालत में स्पष्ट किया कि यदि इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) के फैसले को बरकरार रखा जाता है, तो पिछले 6 साल से नौकरी कर रहे करीब 10 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जो सही होगा, उसी कानूनी आधार पर अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।

टीईटी (TET) और आरक्षण पर तीखी बहस

सुनवाई के दौरान चयनित अभ्यर्थियों के वकीलों ने आरक्षण प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए:

  • दोहरे आरक्षण का दावा: वकीलों ने तर्क दिया कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को पहले शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) में आरक्षण का लाभ दिया गया और उसके बाद मुख्य सहायक अध्यापक परीक्षा में भी आरक्षण दिया जा रहा है। यानी एक ही भर्ती में दो बार लाभ लिया गया।

  • सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘टीईटी कोई भर्ती परीक्षा नहीं है, यह केवल एक पात्रता परीक्षा (Eligibility Test) है।’ ऐसे में दो बार आरक्षण लेने की बात कैसे कही जा सकती है।

  • सामान्य वर्ग में माइग्रेशन पर सवाल: चयनित अभ्यर्थियों की वकील शोभा गुप्ता ने दलील दी कि जिन अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान आयु या अन्य छूट (आरक्षण) का लाभ लिया है, वे अधिक अंक लाने पर सामान्य (General) वर्ग में माइग्रेट करने का दावा नहीं कर सकते। उन्होंने इसके समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के ही पुराने फैसलों का हवाला दिया।

इस मामले में अगली सुनवाई 22 सितंबर को तय की गई है, जिसमें आरक्षण से प्रभावित हुए अभ्यर्थियों के वकीलों की दलीलें सुनी जाएंगी।

क्या है 69 हजार शिक्षक भर्ती का पूरा विवाद?

यह मामला 2018 से लगातार कानूनी दांव-पेंच में उलझा हुआ है। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • भर्ती का टाइमलाइन: 5 दिसंबर 2018 को 69 हजार पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी हुआ था। 6 जनवरी 2019 को परीक्षा हुई और 12 मई 2020 को आए परिणाम में 1.47 लाख अभ्यर्थी पास हुए थे। इसमें सामान्य वर्ग की कटऑफ 67.11% और ओबीसी की कटऑफ 66.73% तय की गई थी।

  • आरक्षण में गड़बड़ी का आरोप: परिणाम आने के बाद आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि ओबीसी (OBC) और एससी (SC) कोटे की हजारों सीटों पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति दे दी गई है।

  • हाईकोर्ट का फैसला: यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच पहुंचा, जिसने पुरानी मेरिट लिस्ट में विसंगतियां पाते हुए उसे रद्द कर दिया और सरकार को नई मेरिट लिस्ट जारी करने का आदेश दिया।

  • सुप्रीम कोर्ट का दखल: हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ कुछ अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए, जिससे काउंसलिंग पर रोक लग गई। सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में सुनवाई करते हुए 37,339 पदों की भर्ती को होल्ड कर दिया था और बचे हुए 31,661 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आदेश दिया था।