KALI: क्या सच में मिसाइलों को पिघला सकता है ये हथियार? जानें पूरा सच

भारत के ‘काली’ (KALI) प्रोजेक्ट को लेकर सोशल मीडिया और रक्षा मंचों पर लगातार चर्चाएं होती रहती हैं। दावा किया जाता है कि यह एक ऐसा शक्तिशाली निर्देशित ऊर्जा हथियार (Directed Energy Weapon) है, जो दुश्मन की मिसाइलों और लड़ाकू विमानों के इलेक्ट्रॉनिक्स को पल भर में नष्ट कर सकता है। हाल ही में इस प्रोजेक्ट को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से भी जोड़ा गया। रक्षा मामलों की आधिकारिक जानकारी और जमीनी हकीकत के आधार पर इस प्रोजेक्ट से जुड़े मिथक और तथ्यों को समझना जरूरी है।
असल में क्या है काली (KALI)?
काली का पूरा नाम किलो एम्पीयर लीनियर इंजेक्टर (Kilo Ampere Linear Injector) है। इसे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। यह कोई मिसाइल या पारंपरिक बम नहीं, बल्कि एक रैखिक इलेक्ट्रॉन एक्सेलेरेटर (Linear Electron Accelerator) है।
यह मशीन बेहद शक्तिशाली इलेक्ट्रॉन बीम पैदा करती है। इन बीम को हाई-पावर माइक्रोवेव (HPM) या एक्स-रे में बदला जा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य लक्ष्य को विस्फोट से उड़ाना नहीं, बल्कि ‘सॉफ्ट-किल’ है। यह दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, सेंसर और कंप्यूटर सिस्टम को पूरी तरह ठप करने का काम करता है।
1980 के दशक से जारी है प्रोजेक्ट का सफर
इस परियोजना की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी। इसके तहत अब तक काली-80, काली-200, काली-1000 और काली-5000 जैसे संस्करण विकसित किए गए हैं। काली-5000 को वर्ष 2004 के आसपास कमीशन किया गया था। वर्तमान में इसका मुख्य उपयोग रक्षा अनुसंधान और परीक्षण के लिए किया जाता है। सेना इसका इस्तेमाल स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान और मिसाइलों के इलेक्ट्रॉनिक्स को माइक्रोवेव हमलों के खिलाफ मजबूत (Hardening) करने के लिए करती है।
युद्ध के मैदान में तैनाती की क्या है स्थिति?
काली को लेकर कई तरह की अफवाहें फैलती रही हैं, जिनमें 2012 के सियाचिन हिमस्खलन से जुड़ी निराधार कहानियां भी शामिल हैं। अभी तक किसी भी आधिकारिक मंच से काली के युद्ध में तैनात होने या किसी ऑपरेशन में इसके इस्तेमाल की पुष्टि नहीं की गई है। सरकार ने भी संसद में इसे संवेदनशील विषय बताते हुए इसकी विस्तृत जानकारी साझा करने से हमेशा परहेज किया है। यह मुख्य रूप से प्रयोगशाला-स्तर की क्षमता और एक अनुसंधान परियोजना है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इस्तेमाल के दावों का सच
मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी ठिकानों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया था।
इस सैन्य कार्रवाई से जुड़ी विश्वनीय रिपोर्ट्स में ब्रह्मोस, क्रूज मिसाइल, एयर स्ट्राइक और एस-400 जैसी प्रणालियों के इस्तेमाल का जिक्र मिलता है। रक्षा मंत्रालय के बयान या किसी भी स्वतंत्र सैन्य विश्लेषण में काली या किसी अन्य निर्देशित ऊर्जा हथियार के इस्तेमाल का कोई प्रमाण नहीं है। ऑपरेशन सिंदूर में काली का जिक्र केवल सोशल मीडिया की अफवाहों का हिस्सा है।
भारत वर्तमान में एंटी-ड्रोन लेजर सिस्टम जैसे निर्देशित ऊर्जा हथियारों के क्षेत्र में काम कर रहा है, लेकिन अभी ज्यादातर प्रणालियां परीक्षण या सीमित तैनाती के चरण में हैं। रक्षा अनुसंधान के मोर्चे पर काली की मौजूदा भूमिका सैन्य उपकरणों की इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तक ही सीमित है।
