जानिए आखिर आंधी-तूफान झेलने वाले विमान ‘राख’ में क्यों हो जाते हैं बेबस?

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Prabhash Bahadur Civil Services Mentor
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क्या आपने कभी सोचा है कि जो आधुनिक विमान भारी आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश को चीरते हुए उड़ान भर सकते हैं, वे हवा में फैली थोड़ी सी राख के आगे बेबस क्यों हो जाते हैं? यह सवाल इसलिए चर्चा में है क्योंकि इंडोनेशिया में अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी फटने के कारण रविवार और सोमवार को 2,961 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिससे लगभग 3.41 लाख यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

अनाक क्राकाटोआ में विस्फोट और राख का गुबार

रविवार तड़के 3:53 बजे इंडोनेशिया के जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच सुंडा स्ट्रेट में स्थित अनाक क्राकाटोआ (Anak Krakatoa) ज्वालामुखी अचानक फट गया। करीब 30 सेकंड के इस विस्फोट के बाद राख के दो विशाल गुबार निकले। पहला गुबार 20,000 फीट और दूसरा 50,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया। इसके चलते जकार्ता, बैंटन, पश्चिमी जावा और हिंद महासागर के कई हिस्से राख की चपेट में आ गए।

राख में क्यों नहीं उड़ सकते विमान?

जब भी ज्वालामुखी फटता है, तो एयरलाइंस तुरंत अपनी उड़ानें रोक देती हैं। इसका कारण यह है कि ज्वालामुखी की राख कोई सामान्य राख नहीं होती, बल्कि यह विमानों के लिए बेहद खतरनाक होती है:

  • विंडस्क्रीन का अंधा होना: ज्वालामुखी की राख के कण सैंडपेपर की तरह बेहद खुरदुरे होते हैं। जब विमान तेज गति से इन कणों से टकराता है, तो कॉकपिट की विंडस्क्रीन पूरी तरह खरोंच खाकर धुंधली हो सकती है, जिससे पायलट को बाहर कुछ भी दिखाई नहीं देता।

  • सेंसर और वेंटिलेशन जाम होना: राख विमान के बाहरी सेंसर्स को जाम कर सकती है, जिससे स्पीड और ऊंचाई की गलत रीडिंग मिलने लगती है। इसके अलावा, यह वेंटिलेशन सिस्टम के जरिए केबिन में घुसकर हवा को दूषित कर सकती है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो सकता है।

सबसे बड़ा खतरा: जेट इंजन का फेल होना

सबसे जानलेवा असर विमान के इंजनों पर पड़ता है। ज्वालामुखी की राख में सिलिका की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो कांच के बारीक टुकड़ों की तरह काम करती है। जेट इंजन के अंदर का तापमान 1400 से 1700 डिग्री सेल्सियस तक होता है। जब यह सिलिका युक्त राख इंजन के अंदर जाती है, तो अत्यधिक गर्मी के कारण पिघलकर तरल कांच बन जाती है। यह पिघला हुआ कांच जब टरबाइन के ब्लेड्स और नोजल पर पहुंचता है, तो ठंडा होकर जम जाता है। इससे इंजन के अंदर हवा का फ्लो रुक जाता है और बीच हवा में ही इंजन पूरी तरह काम करना बंद कर देते हैं।

1982 का ब्रिटिश एयरवेज का खौफनाक वाकया

“1982 में British Airways की Flight 9 के साथ यही हुआ था। Boeing 747-200 इंडोनेशिया के Mount Galunggung से निकले राख के बादल में अनजाने में प्रवेश कर गया। कुछ ही देर में उसके चारों इंजन बंद हो गए। विमान करीब 37,000 फीट से नीचे गिरा और राख के बादल से बाहर निकलने के बाद चालक दल ने इंजनों को दोबारा शुरू किया। आखिरकार विमान Jakarta में सुरक्षित उतरा।”