Iran Protest : दो बहनों को सजा, एक को मौत और दूसरी को 25 साल जेल

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने के लिए किस हद तक कठोर कदम उठाए जा रहे हैं, इसका एक ताजा और दहला देने वाला मामला सामने आया है। इस्फहान शहर की रहने वाली 19 साल की जुड़वां बहनों तारानेह और रोमिना रहीमी को ईरानी अदालत ने लंबी और क्रूर सजा सुनाई है। अदालत ने तारानेह को मौत (फांसी) और उसकी बहन रोमिना को 25 साल की कैद की सजा दी है। इस फैसले ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की चिंता बढ़ा दी है।
जनवरी के प्रदर्शनों से शुरू हुआ था मामला
जनवरी 2026 के पहले हफ्ते में ईरान के इस्फहान शहर में आर्थिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे। 8 और 9 जनवरी को प्रदर्शन अपने चरम पर थे, जहां भीड़ ने स्टेट टेलीविजन के स्टूडियो के गेट पर आग लगा दी थी और सरकार विरोधी नारे लगाए थे।
इन प्रदर्शनों में 19 साल की स्कूली छात्राएं तारानेह और रोमिना भी शामिल थीं। परिवार के मुताबिक, इससे पहले दोनों कभी किसी राजनीतिक प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनी थीं। प्रदर्शन के करीब एक महीने बाद फरवरी 2026 में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुखौटाधारी जवान रात के अंधेरे में उनके घर में घुसे और दोनों बहनों को जबरन उठा ले गए।
चार महीने तक परिवार को नहीं था पता
परिवार को चार महीने तक यह नहीं पता था कि उनकी बेटियां कहां हैं। मां मार्जिएह नूरमोहम्मदी ने अस्पतालों और अदालतों के चक्कर काटे, तब जाकर पता चला कि दोनों इस्फहान की दौलताबाद जेल में बंद हैं।
जब मां ने जेल में अपनी बेटियों से मुलाकात की, तो उनके शरीर की हालत देखकर वह उन्हें पहचान तक नहीं पाईं। परिवार के मुताबिक, दोनों को एकांत कारावास (सॉलिटरी कन्फाइनमेंट) में रखा गया था। उनके चेहरे सूजे हुए थे, शरीर पर गंभीर चोट के निशान थे और प्रताड़ना के कारण उनके पैर, कोहनियां व पोरें टूटी हुई थीं। परिवार का आरोप है कि जेल अधिकारियों ने रोमिना के साथ उसकी बहन के सामने सामूहिक बलात्कार की धमकी दी, जिसके बाद दबाव में आकर तारानेह ने कागजों पर दस्तखत कर दिए। वकीलों ने अदालत में बताया कि ये इकरारनामे पूरी तरह यातना के तहत लिए गए थे।
मानवाधिकार संगठनों ने जताई गहरी चिंता
ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 में अब तक प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सैकड़ों लोगों को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है और कम से कम 511 लोगों को मारा गया है।
अमनेस्टी इंटरनेशनल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ईरानी अधिकारी असहमति की हर आवाज को दबाने के लिए मौत की सजा को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। ब्रिटेन समेत 30 से अधिक देशों ने ईरान में बढ़ रही फांसी की सजाओं की कड़ी निंदा की है, जबकि यूरोपीय संघ ने भी IRGC और कई अधिकारियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।
