ग्रीनलैंड में EU : उर्सुला वॉन डेर लेयेन का दौरा, ट्रंप के दावों को चुनौती

यूरोपीय आयोग (European Commission) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन दो दिवसीय यात्रा पर डेनमार्क के आर्कटिक क्षेत्र ग्रीनलैंड (Greenland) पहुंच गई हैं। वॉन डेर लेयेन सोमवार को इस स्वायत्त क्षेत्र के लिए यूरोपीय संघ (EU) की ओर से भारी निवेश और करीबी राजनीतिक संबंधों की रूपरेखा पेश करने वाली हैं। राजधानी नूक (Nuuk) पहुंचने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दौरा डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारों के प्रति ईयू का खुला समर्थन है।
यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि दुनिया के इस सबसे बड़े द्वीप पर अमेरिका का अधिकार होना चाहिए। डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारों ने उनके इन दावों को सिरे से खारिज किया है।
निवेश की नई योजना: किन क्षेत्रों पर है EU की नजर?
राजधानी नूक में रविवार को वॉन डेर लेयेन ने बताया कि यह निवेश पैकेज काफी बड़ा होगा। उन्होंने सटीक आंकड़े का खुलासा नहीं किया, लेकिन यूरोपीय अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत ईयू क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज), सैटेलाइट संचार और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) जैसे क्षेत्रों में निवेश करेगा।
अब तक ईयू ग्रीनलैंड को मुख्य रूप से मछली पकड़ने के अधिकारों और शिक्षा प्रणाली के लिए फंड देता रहा है। नए पैकेज से न सिर्फ फंड में बड़ा इजाफा होगा, बल्कि निवेश का दायरा भी बढ़ेगा। ग्रीनलैंड के प्रीमियर (प्रधानमंत्री) जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने कहा कि उनका देश ईयू के साथ अपनी गहरी दोस्ती और अच्छी साझेदारी को और मजबूत करना चाहता है।
भू-राजनीतिक अहमियत: पिघलती बर्फ और नई चुनौतियां
आर्कटिक क्षेत्र तेजी से अमेरिका, रूस, चीन और यूरोप जैसी वैश्विक शक्तियों के लिए नया भू-राजनीतिक अखाड़ा बन रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण यहां की बर्फ पिघल रही है, जिससे नए समुद्री व्यापारिक मार्ग खुल रहे हैं और बर्फ के नीचे दबे बेशकीमती खनिजों तक पहुंच आसान हो रही है। नाव से इस क्षेत्र का जायजा लेने के बाद वॉन डेर लेयेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि बर्फ पिघलने के साथ ही यहां एक नई वास्तविकता आकार ले रही है।
अमेरिका की नजर और ट्रंप के दावों से बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल उस समय कूटनीतिक उथल-पुथल मचा दी थी, जब उन्होंने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग तेज कर दी। ट्रंप का तर्क था कि नाटो सदस्य डेनमार्क इस क्षेत्र की रक्षा करने में सक्षम नहीं है। उनके इस दावे से अमेरिका और यूरोप के संबंधों में खटास आ गई थी और नाटो के भीतर भी तनाव पैदा हो गया था।
जनवरी में दावोस (Davos) में ट्रंप और नाटो प्रमुख मार्क रुटे के बीच हुई बैठक में त्रिपक्षीय वार्ता शुरू करने पर सहमति बनी थी। इसका उद्देश्य मतभेदों को सुलझाना और आर्कटिक सुरक्षा में नाटो की भूमिका बढ़ाना था। त्रिपक्षीय वार्ता अब तक बेनतीजा रही है। जुलाई में तुर्किये में हुए नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की अपनी मांग दोहराई।
यूरोपीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड नाटो क्षेत्र का हिस्सा है और यह गठबंधन के सामूहिक रक्षा समझौते के दायरे में आता है। एक पुराने समझौते के तहत अमेरिका को यहां अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने का अधिकार पहले से ही प्राप्त है।
ईयू और ग्रीनलैंड का पुराना नाता
ग्रीनलैंड कानूनी तौर पर डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है। वर्ष 1985 में ग्रीनलैंड ने खुद को यूरोपीय संघ से अलग कर लिया था। डेनमार्क का नागरिक होने के नाते वहां के लोग ईयू के भी नागरिक माने जाते हैं। नई निवेश योजना और राजनीतिक साझेदारी इसी ऐतिहासिक जुड़ाव को विस्तार देने का प्रयास है।
