PM मोदी ने SRCC में क्यों कहा- ‘दिमागी नक्सल’ होम्योपैथी की गोली?

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शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित श्रीराम कॉलेज में जेन-जी (Gen-Z) छात्रों के साथ 48 मिनट तक सीधा संवाद किया। एक विकसित राष्ट्र के दृष्टिकोण पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण का संदर्भ दिया और ‘दिमागी नक्सल’ (Intellectual Naxals) के मुद्दे पर विपक्ष पर तीखा प्रहार किया।

‘दिमागी नक्सल’ और होम्योपैथी का उदाहरण

प्रधानमंत्री ने आलोचकों पर निशाना साधने के लिए एक दिलचस्प तुलना की।

  • उन्होंने कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ शब्द ने एक होम्योपैथिक गोली की तरह काम किया है।

  • जिस तरह होम्योपैथी इलाज पहले बीमारी को कुछ समय के लिए उभार देता है और फिर जड़ से खत्म करता है, उसी तरह इस शब्द के इस्तेमाल के बाद देश के सारे ‘दिमागी नक्सल’ छटपटाकर बाहर आ गए हैं।

  • पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि जंगलों का सशस्त्र नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है, लेकिन देश के विकास को बाधित करने वाले ये ‘दिमागी नक्सली’ अब भी युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। अब जनता उनका असली चेहरा पहचान चुकी है।

2013 की आपदा बनाम मौजूदा वैश्विक संकट

युवाओं को अतीत और वर्तमान के बीच का अंतर समझाते हुए प्रधानमंत्री ने पुरानी और नई सरकार के संकट प्रबंधन (Crisis Management) की तुलना की:

  • केदारनाथ आपदा (2013): उन्होंने याद दिलाया कि जब 2013 में केदारनाथ में भयंकर आपदा आई थी, तब तत्कालीन सरकार पूरी तरह हिल गई थी और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि कैसे प्रतिक्रिया दी जाए।

  • मौजूदा चुनौतियां: इसके विपरीत, वर्तमान सरकार ने कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, सप्लाई चेन के संकट और पश्चिम एशिया के तनाव जैसी बड़ी वैश्विक चुनौतियों का डटकर सामना किया है।

आलोचकों को दिया कड़ा संदेश

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि हर संकट के समय उनके आलोचक यह सोचकर खुश होते थे कि अब मोदी फंस गया है या सरकार गिर जाएगी। लेकिन, 140 करोड़ देशवासियों के आशीर्वाद और ताकत ने भारत को विफल देखने वालों की हर मुराद को अधूरा छोड़ दिया है।