मिडटर्म चुनाव शुरू, मेल वोटिंग के नए नियमों पर ट्रंप और कोर्ट में तनातनी

President Trump Holds Press Conference At The White House

WASHINGTON, DC - AUGUST 11: U.S. President Donald Trump, accompanied by U.S. Defense Secretary Pete Hegseth (L) and U.S. Attorney General Pam Bondi (R), speaks during a news conference in the James S. Brady Press Briefing Room of the White House August 11, 2025 in Washington, DC. Trump announced he will use his authority to place the DC Metropolitan Police Department under federal control to assist in crime prevention in the nation's capital, and that the National Guard will be deployed to DC. (Photo by Andrew Harnik/Getty Images)

Jyoti Atmaram Ghag, Country Head
Jyoti Atmaram Ghag, Country Head

अमेरिका में अहम मिडटर्म चुनावों (Midterm elections) का आगाज शुक्रवार को भारी असमंजस के बीच हुआ। नॉर्थ कैरोलिना (North Carolina) आधिकारिक तौर पर मतपत्र (ballots) बांटने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इसके साथ ही उस चुनावी सीजन की शुरुआत हो गई है, जिसका समापन 3 नवंबर को होगा और जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के आखिरी दो वर्षों के लिए अमेरिकी कांग्रेस का कंट्रोल तय करेगा।

वोटिंग प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद, लाखों मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों को अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मेल वोटिंग को लेकर वास्तव में कौन से नियम लागू होंगे। दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप सुप्रीम कोर्ट में उन सख्त पाबंदियों को दोबारा लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, जिन पर एक संघीय जज (federal judge) ने रोक लगा दी थी। राज्य इस बात को लेकर परेशान हैं कि वोटिंग शुरू होने के बाद अगर नियमों में अचानक बदलाव होता है, तो उसकी तैयारी कैसे की जाएगी।

कोर्ट में अटका ट्रंप का एग्जीक्यूटिव ऑर्डर और जज की चेतावनी

मार्च में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लाए गए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के मुताबिक, राज्यों को एक नए संघीय पोर्टल के जरिए यूनाइटेड स्टेट्स पोस्टल सर्विस (USPS) को योग्य मेल मतदाताओं की सूची सौंपनी होगी। इसके अलावा, बैलेट लिफाफों पर अलग से बारकोड और अन्य खास डिजाइन फीचर होना अनिवार्य किया गया है। नए नियमों के तहत USPS को यह अधिकार दिया गया है कि वह अपनी शर्तों को पूरा न करने वाले मेल को खारिज कर दे।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये नियम चुनाव की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हैं। हालांकि, उन्होंने मेल वोटिंग में बड़े पैमाने पर धांधली का कोई सबूत पेश नहीं किया है। खुद ट्रंप ने पिछले महीने फ्लोरिडा के रिपब्लिकन प्राइमरी चुनाव में वोट डालने के लिए इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल किया था, जबकि वे सार्वजनिक तौर पर इसे भ्रष्ट बताते रहे हैं।

ट्रंप के प्लान पर लगी अस्थायी रोक को बढ़ाने पर विचार कर रहीं संघीय जज इंदिरा तलवानी ने गुरुवार को चेतावनी दी कि जल्दबाजी में किए गए बदलावों से भारी अव्यवस्था फैल सकती है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाबंदियों का बचाव कर रहे एक वकील से जज तलवानी ने कहा, “हम यहां कोई बौद्धिक पहेली नहीं खेल रहे हैं। हम लोगों के वोट देने के अधिकार पर बात कर रहे हैं।”

पोस्टल सर्विस सिस्टम पर व्हिसलब्लोअर का सनसनीखेज खुलासा

यह विवाद तब और गहरा गया जब एक गुमनाम USPS व्हिसलब्लोअर ने आरोप लगाया कि नया पोस्टल सर्विस वेरिफिकेशन सिस्टम जल्दबाजी में और बिना पर्याप्त टेस्टिंग के तैयार किया गया है। व्हिसलब्लोअर ने चेतावनी दी कि प्रस्तावित “जीरो-परसेंट फेलियर” नीति के तहत, यदि हजारों बैलेट वाले किसी बैच में एक भी बारकोड स्कैन या मैच नहीं होता है, तो पूरे के पूरे बैच को खारिज किया जा सकता है।

इन आरोपों पर USPS ने अपनी सफाई में कहा है कि फिलहाल कोई अनिवार्य वेरिफिकेशन प्रक्रिया लागू नहीं की जा रही है और चुनाव अधिकारी शुरुआत में इस पोर्टल का इस्तेमाल केवल स्वैच्छिक (voluntary) आधार पर करेंगे।

‘राष्ट्रपति नहीं, राज्य तय करते हैं चुनाव के नियम’

वोटिंग राइट्स प्लेटफॉर्म ‘डेमोक्रेसी डॉकेट’ (Democracy Docket) के संस्थापक मार्क इलियास ने अपने यूट्यूब शो पर कहा, “इस देश में चुनावों का समय, स्थान और तरीका राज्य तय करते हैं, राष्ट्रपति नहीं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस कई मामलों में राज्यों के फैसलों को पलट सकती है, लेकिन राष्ट्रपति को संघीय चुनावों पर ऐसा कोई अधिकार नहीं है।

अमेरिका में वोटिंग सिस्टम हर राज्य में अलग-अलग होता है। कुछ राज्य रजिस्टर्ड वोटरों को अपने आप बैलेट भेज देते हैं, जबकि अन्य राज्यों में वोटरों को इसके लिए आवेदन करना पड़ता है। नॉर्थ कैरोलिना के अधिकारियों ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि उनके यहां बैलेट भेजने की प्रक्रिया सामान्य रूप से चलेगी और राज्य की इस विवादित संघीय पोर्टल का उपयोग करने की कोई योजना नहीं है।

दांव पर कांग्रेस का कंट्रोल, डेमोक्रेट्स का पलड़ा भारी

राजनीतिक लिहाज से इस चुनाव और वोटिंग विवाद के बड़े मायने हैं। वर्तमान में कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी के पास मामूली बहुमत है। लेकिन ट्रंप की कमजोर अप्रूवल रेटिंग, बढ़ती महंगाई और ईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर मतदाताओं की नाराजगी के चलते डेमोक्रेट्स के निचले सदन (House) पर कब्जा करने की संभावना मजबूत मानी जा रही है।

कॉर्नेल यूनिवर्सिटी (Cornell University) के एक नए पूर्वानुमान के मुताबिक, डेमोक्रेट्स के पास इस बार सदन में कब्जा जमाने की 10 में से 8 संभावनाएं हैं। अनुमान लगाया गया है कि डेमोक्रेट्स को 226-209 सीटों के अंतर से बहुमत मिल सकता है।

शुक्रवार को चुनाव के दिन (3 नवंबर) में ठीक 60 दिन बचे हैं। अन्य 18 राज्यों में चुनाव से लगभग 45 दिन पहले बैलेट बांटने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। यदि अदालतें अचानक ट्रंप प्रशासन की पाबंदियों को लागू करने की अनुमति दे देती हैं, तो चुनाव अधिकारियों के पास लिफाफों को फिर से डिजाइन करने, कंप्यूटर सिस्टम अपडेट करने और कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने के लिए न के बराबर समय बचेगा।