रेवंत रेड्डी ने कोंडा सुरेखा को कैबिनेट से हटाया, बेटी के बयान से बढ़ा विवाद

तेलंगाना में सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर चल रहा अंदरूनी विवाद अब एक बड़े फेरबदल के रूप में सामने आया है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने प्रदेश की मंत्री कोंडा सुरेखा को तत्काल प्रभाव से अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया है। गुरुवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, सुरेखा को पद से हटाने की सिफारिश तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को भेज दी गई है। यह सख्त कार्रवाई सुरेखा की बेटी सुष्मिता द्वारा मुख्यमंत्री और पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक रूप से की गई विवादित टिप्पणियों के बाद हुई है।
विवाद की शुरुआत: सीएम का परकल दौरा
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की पृष्ठभूमि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के एक हालिया कार्यक्रम से जुड़ी है। परकल में आयोजित एक जनसभा के दौरान, मुख्यमंत्री ने वहां के मौजूदा विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया था। उन्होंने जनसभा में मौजूद लोगों से आगामी चुनाव में प्रकाश रेड्डी को दोबारा विधायक चुनने की अपील की थी।
बेटी सुष्मिता ने मुख्यमंत्री के फैसले पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री द्वारा रेवुरी प्रकाश रेड्डी का समर्थन किए जाने पर कोंडा सुरेखा की बेटी सुष्मिता ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। सुष्मिता ने खुले तौर पर मुख्यमंत्री की आलोचना की और परकल क्षेत्र में समर्थन मांगने के उनके फैसले पर सवाल खड़े किए। सुष्मिता ने अपने बयान में दावा किया कि परकल एक ‘कोंडा इलाका’ है, इसलिए वहां किसी अन्य नेता के लिए इस तरह का समर्थन नहीं मांगा जाना चाहिए।
विधायकों का विरोध और TPCC का नोटिस
सुष्मिता के इस बयान ने राज्य कांग्रेस इकाई में भूचाल ला दिया। बयान को मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मानते हुए कांग्रेस के कई विधायकों ने मंत्री कोंडा सुरेखा के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। पार्टी के भीतर बढ़ते दबाव के चलते तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) ने मामले का संज्ञान लिया और मंत्री सुरेखा को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा।
मंत्री कोंडा सुरेखा का बचाव: ‘वह बेटी का निजी विचार है’
TPCC की अनुशासनात्मक समिति को दिए अपने जवाब में कोंडा सुरेखा ने खुद को अपनी बेटी की बयानबाजी से पूरी तरह अलग कर लिया। उन्होंने कांग्रेस समिति के नोटिस के आधार को खारिज करते हुए तर्क दिया कि उनकी बेटी ने जो भी कहा, वह उसका अपना निजी विचार है। सुरेखा ने स्पष्ट किया कि पारिवारिक रिश्ते के आधार पर किसी एक व्यक्ति के निजी विचारों के लिए दूसरे व्यक्ति से राजनीतिक जवाबदेही मांगना अनुचित है और इसके लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
