ओवैसी का पलटवार: ‘यह RSS की पुरानी चाल, कथनी और करनी अलग’

Asaduddin Owaisi
साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

हैदराबाद: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए गए ‘हिंदू-मुस्लिम’ वाले बयान पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने जोरदार पलटवार किया है। भागवत ने अमेरिका में कहा था कि ‘अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा।’ इस पर ओवैसी ने तंज कसते हुए इसे आरएसएस की ‘पुरानी चाल’ करार दिया और कहा कि संघ की कुछ बातें दुनिया को दिखाने के लिए होती हैं और कुछ अपने सदस्यों के लिए।

‘हिंदू-मुस्लिम एकता से हेडगेवार को था खतरा’

ओवैसी ने आरएसएस के संस्थापकों और विचारकों की किताबों का बकायदा हवाला देते हुए संघ की विचारधारा पर गंभीर सवाल खड़े किए।

  • कांग्रेस छोड़ने की वजह: ओवैसी ने डॉ. हेडगेवार की जीवनी (द एपोक मेकर: ए बायोग्राफी) का जिक्र करते हुए दावा किया कि हेडगेवार ने कांग्रेस इसलिए छोड़ी क्योंकि गांधीजी हमेशा हिंदू-मुस्लिम एकता की बात करते थे, और डॉ. हेडगेवार को इस कदम में खतरा महसूस होता था।

  • तानाशाही का आरोप: उन्होंने एसएस गोलवलकर की पुस्तक ‘श्री गुरुजी समग्र दर्शन’ का हवाला देते हुए कहा कि आरएसएस लोकतंत्र का विरोध करता है और हमेशा तानाशाही की मांग करता रहा है। ओवैसी के मुताबिक, गोलवलकर ने 1940 में कहा था कि आरएसएस एक ध्वज, एक नेता और एक विचारधारा से प्रेरित है।

‘मुसलमान और ईसाई आंतरिक खतरा’

एआईएमआईएम प्रमुख ने गोलवलकर की मशहूर किताब ‘बंच ऑफ थॉट्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि आरएसएस के लिए भारतीय मुसलमान नंबर एक और ईसाई नंबर दो के आंतरिक खतरे हैं। ओवैसी ने दावा किया कि गोलवलकर की विचारधारा के अनुसार मुस्लिम नागरिकों को हमेशा शक की नजर से देखा जाना चाहिए और ईसाइयों को सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरा माना गया है।

गुजरात दंगे और UCC का उठाया मुद्दा

ओवैसी ने 2002 के गुजरात दंगों की भयावहता की याद दिलाते हुए एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला दिया और पुलिस व प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने मौजूदा राजनीतिक माहौल पर भी निशाना साधा:

  • UCC की आड़: ओवैसी ने आरोप लगाया कि आरएसएस की विचारधारा के तहत ही समान नागरिक संहिता (UCC) के नाम पर मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपे जा रहे हैं।

  • ईसाइयों पर निशाना: उन्होंने कहा कि कठोर ‘धर्म-परिवर्तन विरोधी’ कानूनों के जरिए ईसाई समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है और UAPA जैसे सख्त कानूनों का जमकर दुरुपयोग हो रहा है।

अंत में ओवैसी ने मोहन भागवत को चुनौती देते हुए कहा कि वे दुनिया के सामने सावरकर, हेडगेवार और गोलवलकर की रचनाओं के कुछ चुने हुए हिस्से पढ़कर सुनाएं, ताकि लोग खुद तय कर सकें कि आरएसएस की असली सच्चाई क्या है।