Aravali: भारत में बनेगा हेलीकॉप्टर का महाबली इंजन, जानें इसकी खासियत

नई दिल्ली: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत ने एक और बड़ा कदम उठाया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और फ्रांस की सफ्रान हेलीकॉप्टर इंजिन्स (Safran) ने मिलकर नई पीढ़ी के हाई-पावर हेलीकॉप्टर इंजन ‘अरावली’ के डिजाइन और विकास के लिए समझौता किया है। यह इंजन दोनों कंपनियों के संयुक्त उपक्रम SAFHAL (SAFHAL Helicopter Engines Pvt Ltd) के जरिए तैयार किया जाएगा। भारत में यह पहला मौका है जब 3500 से 4000 शाफ्ट हॉर्सपावर (shp) क्षमता वाला इंजन विकसित हो रहा है, जो भविष्य के 13 टन वाले इंडियन मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (IMRH) और इसके नेवी वैरिएंट (DBMRH) को ताकत देगा।
सियाचिन और लद्दाख में बढ़ेगी वायुसेना की ताकत
अरावली इंजन को विशेष तौर पर भारत की भौगोलिक और सामरिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह 6700 मीटर (करीब 22,000 फीट) की अत्यधिक ऊंचाई पर भी अपना पूरा थ्रस्ट देने में सक्षम होगा। लद्दाख और सियाचिन जैसे बेहद ठंडे और कम ऑक्सीजन वाले इलाकों में यह इंजन नए IMRH हेलीकॉप्टर को 24 से 36 पूर्ण हथियारों से लैस जवानों के साथ एक साथ उड़ान भरने की क्षमता देगा। नौसेना के वैरिएंट के लिए इस इंजन में खास कोटिंग का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि समुद्री खारेपन और नम हवाओं से जंग लगने से बचाव हो सके और यह एंटी-सबमरीन ऑपरेशंस के लिए हमेशा तैयार रहे।
रूसी Mi-17 हेलीकॉप्टरों की लेगा जगह
भारतीय वायुसेना वर्तमान में रसद पहुंचाने और रेस्क्यू ऑपरेशंस के लिए करीब 250 रूसी Mi-17 हेलीकॉप्टरों का संचालन करती है। साल 2028-29 से इन हेलीकॉप्टरों के पुराने वर्जन रिटायर होना शुरू हो जाएंगे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति में आई अनिश्चितता ने भारत को विदेशी निर्भरता खत्म करने पर जोर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अगले 15 सालों में इस श्रेणी के हेलीकॉप्टरों की खरीद और रखरखाव पर करीब 2 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। स्वदेशी इंजन बनने से इस बड़े आयात बजट में सीधे तौर पर कमी आएगी।
तुमकुरु में होगा निर्माण, 2032 तक तैयार होने की उम्मीद
‘अरावली’ इंजन का निर्माण कर्नाटक के तुमकुरु स्थित प्लांट में किया जाएगा। HAL के मुताबिक, इंजन के डिजाइन और विकास का काम 2032-33 तक पूरा होने की उम्मीद है। फिलहाल IMRH और DBMRH प्रोजेक्ट्स को रक्षा मंत्रालय और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। इस प्रोजेक्ट के जरिए भारतीय इंजीनियरों को हाई-प्रेशर कंप्रेसर, पावर टर्बाइन, और इंजन एक्सटर्नल सिस्टम जैसी अहम तकनीकों तक पहुंच मिलेगी।
पहाड़ों के नाम पर रखा गया ‘अरावली’
रक्षा प्रोजेक्ट्स के नाम आमतौर पर तकनीकी होते हैं, लेकिन इसका नाम ‘अरावली’ रखे जाने के पीछे एक दिलचस्प वजह है। फ्रांसीसी कंपनी सफ्रान की पुरानी परंपरा है कि वह अपने हेलीकॉप्टर इंजनों का नाम पहाड़ों, चोटियों या झीलों के नाम पर रखती है। भारत के साथ हुए इस अहम करार के चलते इस शक्तिशाली इंजन को भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला ‘अरावली’ का नाम दिया गया है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह इंजन केवल सैन्य इस्तेमाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में इसका इस्तेमाल समुद्री परिवहन, वीवीआईपी हेलीकॉप्टर और नागरिक उड्डयन सेवाओं में भी किया जा सकेगा।
