नेपाल: बाढ़ से तबाही, 105 भारतीयों समेत 400 लापता; बिहार में हाई अलर्ट

काठमांडू/पटना: नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में बुधवार को अचानक आई विकराल बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। तिब्बत में आए भूकंप और हिमस्खलन के बाद नदी का जलस्तर एकाएक बढ़ गया, जिसने किनारों पर बसे रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले 105 भारतीयों और 37 एनआरआई (NRI) समेत लगभग 400 लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ का असर भारत तक पहुंच गया है; नेपाल से आ रहे पानी के भारी रेले को देखते हुए बिहार सरकार ने गंडक बेसिन वाले इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
सीमा पर फंसे भारतीय, बाढ़ से टूटा संपर्क
बाढ़ की चपेट में आने वाले अधिकांश भारतीय नागरिक तीर्थयात्री हैं, जो विभिन्न ट्रेवल एजेंसियों के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल के रास्ते तिब्बत जाने की तैयारी में थे। नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, ये यात्री नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी में मौजूद थे। अचानक आई बाढ़ ने सीमावर्ती गांवों, सड़कों और बुनियादी ढांचे को पूरी तरह बहा दिया, जिससे इन यात्रियों का संपर्क टूट गया है। लापता लोगों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
तबाही की वजह: भूकंप, हिमस्खलन और ‘ग्लेशियल लेक’ फटने की आशंका
वैज्ञानिकों और नेपाल के जल व मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, यह तबाही सामान्य मानसूनी बारिश का नतीजा नहीं है। काठमांडू विश्वविद्यालय के जलवायु शोधकर्ता रिजनभक्त कायस्थ और चीनी वैज्ञानिकों के शुरुआती आकलन के मुताबिक, बुधवार सुबह तिब्बती क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। इस भूकंप से हुए हिमस्खलन ने ल्हेन्दे नदी (जो आगे भोटेकोशी कहलाती है) के प्रवाह को रोक दिया। इसके साथ ही इस बात की प्रबल आशंका है कि क्षेत्र में कोई बड़ा हिमताल (Glacial Lake) फटा है, जिससे पानी का यह विकराल रेला एक साथ नदी में आ गया।
सेना और हेलीकॉप्टरों से रेस्क्यू ऑपरेशन तेज
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के निर्देश पर नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन युद्ध स्तर पर राहत व बचाव कार्य में जुटे हैं। हवाई निगरानी और सुरक्षित निकासी के लिए 14 हेलीकॉप्टरों (छह सैन्य और आठ निजी) को लगाया गया है।
सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, अब तक 25 लोगों को सुरक्षित निकालकर रसुवा जिला अस्पताल पहुंचाया गया है, जबकि गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को एयरलिफ्ट कर काठमांडू भेजा गया है। घायलों के त्वरित इलाज के लिए त्रिशूली नदी के किनारे 10 डॉक्टरों की एक विशेष मेडिकल यूनिट तैनात की गई है और निचले इलाकों (नुवाकोट, धादिङ, चितवन) को तुरंत खाली कराया जा रहा है।
बिहार पर मंडराया खतरा, वाल्मीकिनगर बराज के सभी फाटक खुले
नेपाल की इस बाढ़ ने बिहार के सीमावर्ती जिलों की चिंता बढ़ा दी है। रसुवा की भोटेकोशी का पानी त्रिशूली नदी से होते हुए सीधे भारत की गंडक नदी में पहुंचता है। गंडक नदी में पानी का बहाव अचानक बढ़ने के खतरे को देखते हुए एहतियात के तौर पर वाल्मीकिनगर बराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। बुधवार दोपहर तक यहां पानी का बहाव 86,000 क्यूसेक दर्ज किया गया, जो लगातार बढ़ रहा है।
बिहार सरकार ने हालात की गंभीरता को देखते हुए आपात बैठक कर राज्य प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है। तटबंधों के भीतर रहने वाले लोगों को लाउडस्पीकर के जरिए सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी जा रही है। संभावित बाढ़ वाले क्षेत्रों में एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों की तैनाती कर दी गई है। साथ ही, पटना में केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण सेल को 24 घंटे के लिए सक्रिय कर दिया गया है।
