डोभाल और वांग यी की बीजिंग वार्ता, राजनीतिक समाधान पर सहमति

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बीजिंग: भारत और चीन ने वर्षों से चले आ रहे अपने सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए ‘राजनीतिक समाधान’ खोजने पर सहमति जताई है। मंगलवार को बीजिंग में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों के स्तर की 25वें दौर की बातचीत की। इस उच्च स्तरीय मुलाकात में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा पर तनाव कम करने की कोशिशें जारी रखने का फैसला किया है।

शांति बहाली और सीमांकन पर क्या हुई बात?

भारतीय पक्ष की ओर से इस वार्ता को ‘साफ और विस्तृत’ बताया गया है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के रिश्तों में किसी भी तरह की प्रगति के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता का होना सबसे जरूरी शर्त है।

दूसरी तरफ, चीन के आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस बैठक में सीमांकन वार्ता को आगे बढ़ाने और सीमा नियंत्रण को मजबूत करने के मुद्दे पर गहन चर्चा की गई। बीजिंग ने कहा है कि विशेष प्रतिनिधियों की यह बैठक सीमा विवाद का एक निष्पक्ष, उचित और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान खोजने का प्रयास करेगी। साथ ही बातचीत और सलाह-मशविरे के जरिए विवादों को ठीक से सुलझाना जारी रखा जाएगा।

मोदी-जिनपिंग की सहमति को लागू करने पर जोर

बीजिंग में हुई इस बैठक में डोभाल और वांग यी ने दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बनी सहमति की समीक्षा भी की। विशेष प्रतिनिधियों ने अक्टूबर 2024 में कजान और अगस्त 2025 में तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकातों और उनमे बनी सहमति को जमीन पर लागू करने की दिशा में हुई प्रगति पर ध्यान केंद्रित किया।

2005 के समझौते का हवाला और चीन का रुख

चीन ने अपने बयान में सीमा विवाद सुलझाने के लिए 2005 के ऐतिहासिक समझौते का भी जिक्र किया। ‘भारत-चीन सीमा विवाद को सुलझाने के लिए राजनीतिक पैरामीटर और मार्गदर्शक सिद्धांत’ नामक इस समझौते को पिछले साल अगस्त में हुई विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत में भी आधार बनाया गया था।

चीनी पक्ष ने कहा कि वह रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। इसके तहत आपसी समझ बढ़ाना, मतभेदों को दूर करना, बाधाओं को पार करना और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व हासिल करते हुए एक-दूसरे के लिए फायदेमंद साझेदार बनना शामिल है।

LAC का विवाद और आगामी BRICS समिट

भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर 3,448 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती है। यह सीमा स्पष्ट रूप से तय नहीं है, जिसके कारण अक्सर दोनों देशों की सेनाओं के बीच विवाद की स्थिति पैदा होती है।

सीमा पर यह कूटनीतिक बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब भारत जल्द ही BRICS 2026 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है। ट्रम्प की सत्ता वापसी और ‘इस्लामिक नाटो’ की चर्चाओं के बीच इस सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आने का कार्यक्रम प्रस्तावित है।