डेटा पर कोर्ट सख्त, निजी कंपनियों की पहुंच और इस्तेमाल पर उठे गंभीर सवाल

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शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

नई दिल्ली: लोगों के व्यक्तिगत और वित्तीय डेटा की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत के सामने ऐसे आरोप रखे गए हैं जिनमें निजी कंपनियों द्वारा कर्मचारियों और करदाताओं से जुड़े संवेदनशील सरकारी रिकॉर्ड तक संभावित पहुंच और उनके व्यावसायिक इस्तेमाल का मुद्दा उठाया गया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार और संबंधित विभागों से शिकायतों तथा प्रस्तुतियों पर व्यापक विचार करने को कहा है। अदालत ने सरकार से डेटा के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने और इस मामले पर करीब चार महीने के भीतर फैसला लेने की उम्मीद जताई।

EPFO और आयकर रिकॉर्ड से जुड़ा मामला

मामला कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के UAN और रोजगार संबंधी रिकॉर्ड के साथ-साथ PAN और आयकर विभाग से जुड़ी वित्तीय सूचनाओं के इस्तेमाल से संबंधित है।

याचिका में कुछ निजी वेरिफिकेशन संस्थाओं की डिजिटल सेवाओं पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इन सिस्टम के जरिए किसी व्यक्ति की नौकरी और वित्तीय पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी तक पहुंच संभव हो सकती है।

याचिकाकर्ता ने अदालत में ‘EPFO Passbook API’, ‘Form 26AS API’ और ‘Income Tax Return API’ जैसी सेवाओं के बाजार में प्रचारित होने का भी दावा किया। इसके बाद यह सवाल उठाया गया कि सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद संवेदनशील जानकारी निजी संस्थाओं तक किस कानूनी और तकनीकी व्यवस्था के तहत पहुंच रही है।

PAN और UAN से रोजगार की जानकारी मिलने का दावा

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अपनी जांच का हवाला देते हुए दावा किया कि एक निजी वेरिफिकेशन सिस्टम में सिर्फ PAN और UAN जैसी जानकारी उपलब्ध कराने पर संबंधित व्यक्ति की रोजगार हिस्ट्री सामने आ गई।

याचिकाकर्ता के अनुसार, इस प्रक्रिया में OTP के जरिए ऑथेंटिकेशन या स्पष्ट सहमति की व्यवस्था नहीं थी। पहचान सत्यापन के लिए स्पष्ट authorization आधारित प्रक्रिया होने पर भी सवाल उठाए गए।

हालांकि, याचिका में सरकारी एजेंसियों पर सीधे डेटा लीक का आरोप नहीं लगाया गया। मुख्य चिंता अलग-अलग कानूनों के तहत सरकार के पास जमा व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और निजी संस्थाओं की उस तक संभावित पहुंच को लेकर है।

रोजगार वेरिफिकेशन में डेटा इस्तेमाल का आरोप

याचिका में कहा गया कि कुछ निजी रोजगार वेरिफिकेशन सिस्टम कानूनी रोजगार और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े डेटा पर निर्भर कर रहे हैं। इसमें रोजगार सत्यापन के अलावा मूनलाइटिंग की जांच, दोहरी नौकरी का पता लगाने, लेबर मार्केट प्रोफाइलिंग और रोजगार से जुड़े फैसलों के लिए डेटा के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि EPFO और आयकर डेटा को नियंत्रित करने वाले कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन इनके बावजूद निजी कंपनियों द्वारा ऐसे रिकॉर्ड के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

केंद्र और कई विभागों में शिकायत

इस मामले को लेकर श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, EPFO, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और CERT-In में शिकायतें किए जाने की जानकारी अदालत को दी गई। वित्त मंत्रालय, आयकर विभाग और CBDT के सामने भी कर संबंधी डेटा के संभावित इस्तेमाल की जांच की मांग रखी गई।

याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार को इस संबंध में दो विस्तृत ज्ञापन सौंपे हैं। अदालत ने इन्हीं प्रस्तुतियों और शिकायतों पर सरकार को व्यापक स्तर पर विचार करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने नीति स्तर पर समाधान की बात कही

CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने मामले को मुख्य रूप से नीति से जुड़ा मुद्दा बताया। अदालत ने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद व्यक्तिगत जानकारी तक निजी कंपनियों की संभावित पहुंच और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल का सवाल गंभीर है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि निजी कंपनियों द्वारा व्यक्तिगत डेटा के संभावित गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं और उचित नीति तैयार की जाए।

फिलहाल अदालत के सामने सवाल यह है कि EPFO और आयकर जैसे सरकारी डेटाबेस में मौजूद संवेदनशील जानकारी तक निजी संस्थाओं की पहुंच को किस कानूनी और तकनीकी ढांचे के तहत नियंत्रित किया जाए।