Islamabad MoU को फिर से पटरी पर लाने में जुटा पाक, प्रगति का दावा

ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य टकराव को खत्म कराने की कोशिशों के बीच पाकिस्तान ने तेहरान में हुई उच्चस्तरीय बातचीत में ‘महत्वपूर्ण प्रगति’ होने का दावा किया है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर ने सोमवार को ईरानी राजधानी का दौरा किया। दोनों ने शीर्ष ईरानी नेताओं के साथ मुलाकात कर युद्ध को और बढ़ने से रोकने और पाकिस्तान की मध्यस्थता वाले Islamabad MoU को फिर से पटरी पर लाने के उपायों पर चर्चा की।
नकवी ने कहा कि बातचीत में ईरान-अमेरिका संघर्ष, मध्य पूर्व में तनाव, आगे की रणनीति और Islamabad MoU को बहाल करने के लिए जरूरी कदमों पर चर्चा हुई। उनके अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति ने अपनी सरकार का नजरिया और चिंताएं सामने रखीं और बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई।
ईरान के शीर्ष नेतृत्व से हुई मुलाकात
पाकिस्तानी सैन्य बयान के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी से मुलाकात की।
वार्ता में सैन्य तनाव को आगे बढ़ने से रोकने, युद्ध को जल्द खत्म करने और Strait of Hormuz को दोबारा खोलने के लिए ठोस कदमों पर चर्चा हुई।
पाकिस्तान ने कहा कि ईरानी नेतृत्व ने बातचीत और तनाव कम करने की दिशा में इस्लामाबाद की भूमिका तथा उसके प्रयासों की सराहना की।
पेजेश्कियन ने अमेरिका को दी चेतावनी
बैठक के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका से बल और दबाव की नीति छोड़ने को कहा। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन को ईरान के साथ बातचीत में अपना लहजा और तरीका बदलना होगा।
पेजेश्कियन ने चेतावनी दी कि दबाव और धमकाने पर निर्भर रहने से किसी समझौते को लागू करने की प्रक्रिया और मुश्किल हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए कानूनी और नैतिक रूप से बाध्य है।
क्या है Islamabad MoU?
पाकिस्तान की मध्यस्थता से ईरान और अमेरिका के बीच 17 जून को 14 सूत्रीय Islamabad Memorandum of Understanding पर सहमति बनी थी। इसका मकसद तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकना, आगे की बातचीत का रास्ता तैयार करना और Strait of Hormuz को दोबारा खोलना था।
हालांकि, समझौते का ढांचा ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सका। अमेरिकी पक्ष की ओर से ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहने और दक्षिणी तट पर हवाई हमले दोबारा शुरू होने के बाद स्थिति बिगड़ गई।
तेहरान ने बाद में समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियां निलंबित करने का ऐलान किया। ईरान ने इसके लिए अमेरिका की आक्रामक कार्रवाई, खराब नीयत और अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करने को जिम्मेदार ठहराया।
Hormuz को लेकर भी बढ़ा दबाव
ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर आर्थिक युद्ध जारी रहा तो तेहरान Persian Gulf से तेल निर्यात की अनुमति नहीं देगा। इस मामले में Strait of Hormuz सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बन जाता है, क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम समुद्री मार्ग है।
तेहरान में हुई पाकिस्तान की बातचीत का अगला लक्ष्य इसी व्यापक तनाव को कम करना और पहले से कमजोर पड़ चुके Islamabad MoU को फिर से बातचीत की मेज पर लाना है।
