स्वीडन में Climate March: 10 हजार लोग सड़क पर, ग्रेटा ने सरकार को घेरा

Greta Thunberg
शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

स्टॉकहोम:  स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में रविवार को जलवायु परिवर्तन के खिलाफ करीब 10 हजार लोगों ने मार्च निकाला। आम चुनाव से कुछ सप्ताह पहले हुए इस प्रदर्शन में युवाओं, ट्रेड यूनियनों, ग्रामीण संगठनों, खेल समूहों और अधिकार संगठनों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जलवायु परिवर्तन के खिलाफ तत्काल कदम उठाने की मांग की।

प्रदर्शन में स्वीडन की चर्चित जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग भी शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि स्वीडन में कोई भी राजनीतिक दल ऐसी नीतियां पेश नहीं कर रहा, जो जलवायु संकट से बचने के लिए वैज्ञानिक आकलनों के अनुरूप हों।

थनबर्ग ने चेतावनी दी कि मौजूदा रफ्तार जारी रही तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उनके मुताबिक, इसके संकेत पहले से दिखाई दे रहे हैं।

चुनाव से पहले जलवायु बना बड़ा मुद्दा

स्वीडन में 13 सितंबर को नई संसद के लिए चुनाव होना है। चुनाव से पहले जलवायु परिवर्तन मतदाताओं की प्रमुख चिंताओं में शामिल है।

सार्वजनिक प्रसारक SVT के लिए Verian की ओर से गुरुवार को प्रकाशित एक opinion poll में 37 प्रतिशत लोगों ने जलवायु को चुनाव में प्रमुख मुद्दा बताया। इससे चुनावी बहस में climate policy की अहमियत का अंदाजा मिलता है।

स्टॉकहोम में हुए मार्च के आयोजकों ने सरकार की मौजूदा नीतियों को लेकर चिंता जताई और उत्सर्जन कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।

सरकार की climate policy पर सवाल

स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टेरसन की दक्षिणपंथी सरकार 2022 में सत्ता में आई थी। इसके बाद सरकार ने पेट्रोल पर टैक्स में कटौती की और पेट्रोल आपूर्तिकर्ताओं के लिए ईंधन में कम-कार्बन विकल्प मिलाने की आवश्यकताओं को कम किया।

जलवायु नीति को लेकर सरकार पर देश के उत्सर्जन कम करने के लक्ष्यों को कमजोर करने के आरोप लगते रहे हैं। स्वीडन का लक्ष्य 2030 तक परिवहन क्षेत्र से होने वाले CO2 उत्सर्जन को 2010 के स्तर से 70 प्रतिशत कम करना और 2045 तक net-zero emissions हासिल करना है।

सरकार ने 2030 के लक्ष्य को हासिल करने के उपायों पर बनी एक आयोग की सिफारिशों को भी स्वीकार नहीं किया। इन सिफारिशों में पेट्रोल और डीजल पर टैक्स बढ़ाकर जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल को धीरे-धीरे खत्म करने का सुझाव शामिल था।

‘जलवायु संकट वास्तविक है’

प्रदर्शन का सह-आयोजन करने वाली Swedish Society for Nature Conservation की प्रमुख बीट्रिस रिंडेवाल ने कहा कि जलवायु संकट वास्तविक है और इसका असर अभी दिखाई दे रहा है।

उन्होंने तत्काल ऐसी climate policy लागू करने की जरूरत बताई, जिससे उत्सर्जन में अभी कमी लाई जा सके। रिंडेवाल ने यूरोप में इस गर्मी में पड़ी भीषण गर्मी का भी उल्लेख किया।

सरकार का तर्क है कि जीवाश्म ईंधन को खत्म करने की प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़नी चाहिए। उसका कहना है कि ऐसा करने से स्वीडन की competitiveness और कंपनियों की स्थिति को बनाए रखने तथा मजबूत करने में मदद मिलेगी।