जानिए क्यों बढ़ी पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की मुश्किलें, क्या होगा अब ?

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राघवेन्द्र मिश्रा
राघवेन्द्र मिश्रा

लाहौर : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार के सामने राजनीतिक दबाव बढ़ता दिख रहा है। एक ओर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के इलाज को लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच खींचतान सामने आई है, तो दूसरी ओर सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) ने सरकार के साथ अपने सहयोग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। विपक्षी दल भी आपसी तालमेल बढ़ाने की कोशिश में जुटे हैं।

इमरान खान के इलाज से जुड़ा विवाद 18 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुआ। कोर्ट ने अधिकारियों को दो दिन के भीतर खान को अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाने का निर्देश दिया था। आदेश में विशेषज्ञों वाली मेडिकल टीम से उनका इलाज कराने की बात कही गई थी।

इमरान खान को लेकर सरकार और कोर्ट आमने-सामने

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने इस पर पुनर्विचार की मांग की। सरकार का तर्क था कि खान को सरकारी अस्पताल में इलाज उपलब्ध कराया जाना ज्यादा उचित होगा।

इसके बाद इमरान खान को अदियाला जेल से निकाला गया, उन्हें शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाया गया। मेडिकल जांच के कुछ घंटे बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया।

इमरान खान के परिवार और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है। वहीं अधिकारियों की ओर से सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया है।

इस मामले में आगे अदालत का रुख महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट आदेश की अवहेलना को लेकर संज्ञान लेती है, तो मामला तौहीन-ए-अदालत तक पहुंच सकता है।

PPP ने सरकार के कानूनों पर समर्थन रोकने की चेतावनी दी

शहबाज शरीफ सरकार के लिए दूसरी चुनौती उसके गठबंधन के भीतर से सामने आ रही है। PPP और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बढ़े हैं।

PPP चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा है कि जब तक उनकी पार्टी की चिंताओं का समाधान नहीं होता, वह संसद में सरकार के किसी भी कानून का समर्थन नहीं करेंगे। हाल के आजाद जम्मू-कश्मीर (AJK) चुनाव में कथित गड़बड़ी को लेकर भी दोनों दलों के बीच टकराव हुआ है।

बिलावल के रुख से साफ है कि PPP फिलहाल सरकार के साथ अपने संबंधों को लेकर संतुष्ट नहीं है। नए प्रांतों से जुड़े प्रस्तावों पर भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए हैं। PPP ने ऐसे मुद्दों पर राजनीतिक सहमति बनाने की मांग की है।

PML-N के साथ सहयोग पर बिलावल का कड़ा रुख

PPP और PML-N के बीच मौजूदा खींचतान केवल किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं है। बिलावल ने संकेत दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में PML-N के साथ meaningful cooperation मुश्किल हो रहा है।

PPP सरकार के लिए महत्वपूर्ण गठबंधन सहयोगी है। ऐसे में संसद में किसी कानून के समर्थन से पीछे हटने की उसकी चेतावनी शहबाज सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बढ़ा सकती है।

विपक्ष भी संयुक्त मंच बनाने की तैयारी में

सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों के बीच भी बातचीत तेज हुई है। JUI-F प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने कहा है कि कई विपक्षी नेता सैद्धांतिक रूप से एक संयुक्त मंच बनाने पर सहमत हुए हैं।

विपक्षी दलों के बीच आगे भी बातचीत होने की संभावना है। इसी क्रम में सोमवार, 24 अगस्त 2026 को विपक्ष की एक अहम बैठक होने की बात सामने आई है।

अगर विपक्षी दल किसी साझा रणनीति पर सहमत होते हैं और शहबाज सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव जैसे विकल्प पर विचार करते हैं, तो उस स्थिति में PPP का रुख अहम हो सकता है।

गठबंधन की राजनीति पर टिकी नजर

इमरान खान के इलाज का विवाद, PPP और PML-N के बीच बढ़ते मतभेद और विपक्षी दलों की एकजुटता की कोशिशें फिलहाल शहबाज सरकार के सामने तीन अलग-अलग राजनीतिक मोर्चे खोल रही हैं।

सरकार के लिए चुनौती सिर्फ विपक्ष से नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर मतभेदों को संभालने की भी है। दूसरी ओर, PPP ने कानूनों पर समर्थन को अपनी चिंताओं के समाधान से जोड़ दिया है और विपक्षी दल संयुक्त मंच बनाने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। सोमवार को प्रस्तावित विपक्षी बैठक के बाद राजनीतिक समीकरण को लेकर तस्वीर कुछ और स्पष्ट हो सकती है।