Sugar Price Hike: चीनी 13% महंगी, सरकार ने स्टॉक लिमिट घटाई

नई दिल्ली: गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 13% बढ़कर 54 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। कीमतों पर लगाम लगाने और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने बड़े कारोबारियों और डीलरों के लिए चीनी रखने की अधिकतम अवधि घटाकर 15 दिन कर दी है।
नई स्टॉक सीमा 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। इससे पहले 1 अगस्त से डीलरों के लिए 30 दिन की स्टॉक सीमा लागू की गई थी।
एक महीने में 13% महंगी हुई चीनी
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 19 जुलाई 2026 को चीनी की औसत खुदरा कीमत 47.82 रुपये प्रति किलो थी। 19 अगस्त तक यह बढ़कर 54.06 रुपये प्रति किलो हो गई।
इस हिसाब से एक महीने में खुदरा कीमत में करीब 13.04% की बढ़ोतरी हुई। पिछले साल 19 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 46.27 रुपये प्रति किलो थी।
यानी सालाना आधार पर भी इस बार चीनी महंगी है और त्योहारों की मांग बढ़ने से आने वाले हफ्तों में बाजार पर दबाव बना रह सकता है।
हफ्तेभर में भी तेजी
चीनी के दामों में तेजी सिर्फ एक महीने तक सीमित नहीं रही। पिछले एक सप्ताह में औसत खुदरा कीमत 50.77 रुपये से बढ़कर 54.06 रुपये प्रति किलो हो गई। यानी सात दिनों में करीब 6.48% की वृद्धि दर्ज की गई।
तेजी के बीच उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने चीनी की मांग, उपलब्धता और बाजार में आपूर्ति की निगरानी बढ़ा दी है।
कारोबारियों के लिए 15 दिन की सीमा
सरकार के नए फैसले के मुताबिक, हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल या व्यापार करने वाले डीलर और कारोबारी 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
इससे पहले सरकार ने 1 अगस्त से 30 दिन की स्टॉक सीमा लागू की थी। इसके अलावा एक स्थान पर 4,000 क्विंटल से अधिक चीनी रखने की सीमा भी तय की गई थी।
नई व्यवस्था का उद्देश्य बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने और जमाखोरी के जरिए कीमतों को ऊपर ले जाने की संभावना को सीमित करना है।
थोक बाजार में भी दबाव
चीनी के थोक बाजार में भी तेजी देखी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कानपुर और कोलकाता जैसे प्रमुख बाजारों में थोक भाव 6,000 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच चुके हैं। वहीं मुजफ्फरपुर और कोल्हापुर में औसत भाव 5,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर बताए गए हैं।
इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को देश में औसत एक्स-मिल चीनी की कीमत करीब 5,400 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल रही। एक साल पहले यह करीब 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी।
त्योहारों से पहले क्यों बढ़ी मांग?
भारत में अगस्त से नवंबर के बीच चीनी की मांग आमतौर पर बढ़ती है। इस अवधि में गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आते हैं।
मिठाई, बिस्कुट और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने वाले कारोबारी त्योहारों से पहले अतिरिक्त स्टॉक रखते हैं। मांग में इस मौसमी बढ़ोतरी के बीच अगर बाजार में उपलब्धता को लेकर दबाव बनता है तो खुदरा कीमतों पर भी उसका असर पड़ सकता है।
सरकार की नजर नए सीजन के स्टॉक पर
चीनी का नया 2026-27 सीजन अक्टूबर से सितंबर तक चलेगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नए सीजन की शुरुआत में शुरुआती स्टॉक 50 लाख टन की घरेलू जरूरत से कम रहने की संभावना जताई गई है।
सरकार का कहना है कि घरेलू खपत की जरूरत पूरी करने के लिए देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। अब सरकार की कोशिश है कि मांग बढ़ने के दौरान बाजार में सप्लाई बनी रहे और स्टॉक सीमा के जरिए जमाखोरी पर नियंत्रण रखा जा सके।
नई स्टॉक सीमा का असर आने वाले हफ्तों में खुदरा बाजार में दिखाई देगा। खासकर त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर कीमतें किस स्तर पर टिकती हैं, इससे सरकार के फैसले का असर साफ होगा।
