‘वंदे मातरम्’ विवाद में बंकिम चंद्र के वंशज की एंट्री, सोनिया से माफी की मांग

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नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पार्टी की सियासी लड़ाई से आगे बढ़कर उस परिवार तक पहुंच गया है, जिससे इस गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चटोपाध्याय का संबंध है। पश्चिम बंगाल के भाजपा विधायक और बंकिम चंद्र चटोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को 14 पेज की चिट्ठी लिखकर कथित घटना पर बिना शर्त माफी मांगने की अपील की है।

सुमित्रो चटर्जी ने अपनी चिट्ठी में 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में हुई घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनका कहना है कि वहां एक ऐतिहासिक गलती को दोहराया गया और ‘वंदे मातरम्’ के कथित अपमान से वह व्यक्तिगत रूप से आहत हैं। उन्होंने सोनिया गांधी से इस पूरे मामले पर आत्ममंथन करने और देशवासियों से माफी मांगने की अपील की।

वंशज ने क्यों लिखी चिट्ठी

नहाटी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक सुमित्रो चटर्जी ने खुद को इस मामले में एक आम नागरिक के साथ-साथ बंकिम चंद्र चटोपाध्याय के वंशज के रूप में पेश किया है। चिट्ठी में उन्होंने कहा कि कांग्रेस मुख्यालय में हुई घटना से उनके भीतर गहरा दुख और खालीपन पैदा हुआ है।

उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए श्री अरबिंदो के विचारों का भी हवाला दिया। सुमित्रो चटर्जी के मुताबिक, श्री अरबिंदो ने इस गीत को देशभक्ति की भावना से जोड़ते हुए इसकी प्रशंसा की थी।

चटर्जी ने यह भी कहा कि स्वतंत्र भारत में ‘वंदे मातरम्’ को पूरा गाने को लेकर किसी तरह की हिचकिचाहट उन लोगों के बलिदान के संदर्भ में गंभीर सवाल खड़े करती है, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था। उन्होंने इस संदर्भ में खुदीराम बोस जैसे क्रांतिकारियों का उल्लेख किया।

आजादी की लड़ाई से जोड़ा इतिहास

14 पेज की चिट्ठी में सुमित्रो चटर्जी ने ‘वंदे मातरम्’ और स्वतंत्रता आंदोलन के बीच संबंधों का विस्तार से उल्लेख किया है। उन्होंने 1906 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन का हवाला देते हुए कहा कि वहां सरला देवी चौधरानी ने ‘वंदे मातरम्’ गाया था।

उन्होंने 1909 में राजद्रोह के मुकदमे के दौरान बाल गंगाधर तिलक और उनके समर्थकों द्वारा ‘वंदे मातरम्’ गाए जाने का भी जिक्र किया। इसके अलावा चटर्जी ने 1938 में हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी से जुड़ी घटना का उल्लेख किया, जहां उनके मुताबिक राष्ट्रवादी छात्रों ने निजाम की पाबंदियों के बावजूद ‘वंदे मातरम्’ का इस्तेमाल नारे के तौर पर किया था।

इन ऐतिहासिक घटनाओं को आधार बनाते हुए चटर्जी ने चिट्ठी में ‘वंदे मातरम्’ को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की महत्वपूर्ण विरासत बताया है।

कांग्रेस की नीति पर सवाल

चटर्जी ने चिट्ठी में कांग्रेस पर ‘वंदे मातरम्’ को लेकर दोहरी नीति अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने 1937 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय कांग्रेस ने मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के बाद गीत के स्वरूप को लेकर समझौता किया और उसी वर्ष अक्टूबर में इसे छोटा कर दिया गया।

यह चटर्जी की ओर से किया गया ऐतिहासिक और राजनीतिक दावा है। उन्होंने इसी संदर्भ को 15 अगस्त की कथित घटना से जोड़ते हुए कांग्रेस के मौजूदा रवैये पर सवाल उठाया है।

चिट्ठी में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की छात्र शाखा छात्र परिषद का भी उल्लेख है। चटर्जी ने कहा कि छात्र परिषद ‘मंत्र मोदेर संजीवनी वंदे मातरम्’ नारे का इस्तेमाल करती है। इसी आधार पर उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया कि यदि पार्टी की छात्र शाखा इस गीत का इस्तेमाल करती है तो शीर्ष नेतृत्व इसे लेकर असहज क्यों दिखाई देता है।

‘वंदे मातरम् किसी पार्टी की संपत्ति नहीं’

सुमित्रो चटर्जी ने अपनी चिट्ठी में इस बात पर जोर दिया कि ‘वंदे मातरम्’ किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। उनके मुताबिक यह देश की सामूहिक स्मृति, बंकिम चंद्र चटोपाध्याय की विरासत और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा राष्ट्रीय प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि इस गीत का सम्मान करना स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और उससे जुड़े बलिदानों का सम्मान करने के समान है।

पश्चिम बंगाल के लोगों का भी जिक्र

चटर्जी ने दावा किया कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में हुई घटना से पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने सोनिया गांधी से इस पूरे मामले पर विचार करने और बिना शर्त माफी मांगने की अपील की।

उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के लोगों से भी माफी मांगने की मांग की है।

विवाद की शुरुआत कहां से हुई

यह पूरा राजनीतिक विवाद 15 अगस्त को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में हुए कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ। उपलब्ध कच्ची जानकारी के मुताबिक वहां राष्ट्रगान के बाद ‘वंदे मातरम्’ का गायन शुरू हुआ और इसी दौरान सोनिया गांधी के कथित तौर पर इसे रोकने की कोशिश करने को लेकर विवाद खड़ा हुआ।

भाजपा ने इस घटना को लेकर कांग्रेस और सोनिया गांधी पर हमला बोला। कांग्रेस की ओर से इससे पहले सफाई दी गई थी कि सोनिया गांधी ‘वंदे मातरम्’ को रोकने के लिए नहीं कह रही थीं, बल्कि वह पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी मांग रही थीं।

अब बंकिम चंद्र चटोपाध्याय के वंशज और भाजपा विधायक सुमित्रो चटर्जी की 14 पेज की चिट्ठी ने विवाद को एक नया राजनीतिक आयाम दे दिया है। चटर्जी ने जिस तरह इस मुद्दे को बंकिम चंद्र की विरासत, स्वतंत्रता आंदोलन और बंगाल की भावनाओं से जोड़ा है, उससे साफ है कि ‘वंदे मातरम्’ का विवाद अब केवल कांग्रेस मुख्यालय में हुई एक कथित घटना तक सीमित नहीं रहने वाला है।