यूक्रेन को 70 ATACMS मिसाइलें मिलेंगी? रूस ने अमेरिका-तुर्की को दी ‘Pandora’s Box’ की चेतावनी
अमेरिका और तुर्की से यूक्रेन को बड़ी खेप में हथियार दिए जाने की खबरों के बीच मॉस्को ने वॉशिंगटन और अंकारा दोनों को कड़ी चेतावनी दी है।
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि अमेरिका और तुर्की अगर यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई को आगे बढ़ाते हैं तो वे एक और “Pandora’s Box” खोल रहे होंगे।
यानी शांति की बात भी चलती रहे और मिसाइलों की डिलीवरी भी, तो मॉस्को के हिसाब से यह समीकरण कुछ ज्यादा ही विस्फोटक है।
70 ATACMS मिसाइलों की खबर से क्यों मचा बवाल?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका यूक्रेन को तुर्की में मौजूद अमेरिकी हथियारों के भंडार से 70 ATACMS मिसाइलों की आपूर्ति की अनुमति देने की तैयारी कर रहा है।
इन हथियारों की अनुमानित कीमत करीब 280 मिलियन डॉलर बताई गई है।
ATACMS लंबी दूरी की सामरिक मिसाइल प्रणाली है, जिसे यूक्रेन पहले भी रूस के खिलाफ इस्तेमाल कर चुका है।
रिपोर्टों के मुताबिक प्रस्तावित खेप में सिर्फ मिसाइलें ही नहीं, बल्कि अन्य सैन्य उपकरण और हथियार भी शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, प्रस्तावित ट्रांसफर की अंतिम स्थिति अमेरिकी मंजूरी पर निर्भर है।
रूस बोला- ‘शांति की बात और हथियारों की सप्लाई साथ-साथ?’
मारिया जखारोवा ने हथियारों की संभावित सप्लाई को लेकर अमेरिका और तुर्की पर निशाना साधा।
उनके मुताबिक, दोनों देश एक तरफ यूक्रेन में शांति बहाली के प्रयासों की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ कीव को हथियार उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
रूस का दावा है कि इस तरह की नीति से युद्ध खत्म होने के बजाय मौत और तबाही बढ़ेगी।
जखारोवा ने यह भी कहा कि हथियारों की सप्लाई का असर सिर्फ यूक्रेन के युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे रूस के अमेरिका और तुर्की के साथ द्विपक्षीय संबंधों में भरोसा भी कमजोर होगा।
रूस का सबसे बड़ा सवाल: पहल किसने की?
रूसी विदेश मंत्रालय ने संभावित हथियारों की डील को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
जखारोवा के मुताबिक, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस पुनः-निर्यात की पहल किसने की और हथियार यूक्रेन तक कब और किस तरीके से पहुंचेंगे।
यानी मिसाइलों की गिनती सामने है, लेकिन उनका रास्ता अभी कूटनीतिक धुंध में है।
रूस ने डिलीवरी की परिस्थितियों और शर्तों को भी ‘अत्यंत विरोधाभासी’ बताया है।
तुर्की के पास अमेरिकी हथियार, लेकिन बेचने के लिए अमेरिका की मंजूरी जरूरी
मामला थोड़ा तकनीकी है, लेकिन कहानी का अहम हिस्सा भी यही है।
रिपोर्टों के मुताबिक तुर्की के पास अमेरिका में निर्मित हथियारों का स्टॉक मौजूद है।
अगर इन्हें तुर्की से यूक्रेन को दोबारा निर्यात किया जाना है, तो इसके लिए अमेरिकी अनुमति जरूरी होगी।
बताया गया है कि अमेरिकी कांग्रेस के पास इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए 15 कैलेंडर दिनों की अवधि होगी।
दोनों सदनों की मंजूरी के बाद ट्रंप प्रशासन की अनुमति प्रभावी होने की बात कही गई है।
हथियार यूक्रेन पहुंचाने का रास्ता भी तैयार?
रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी मंजूरी मिलने के बाद हथियारों की डिलीवरी तुर्की, बुल्गारिया और अमेरिकी सैन्य एवं लॉजिस्टिक्स कंपनियों के जरिए किए जाने की उम्मीद है।
इससे यह मामला सिर्फ अमेरिका और यूक्रेन के बीच हथियारों की बिक्री का नहीं रह जाता।
तुर्की की भूमिका इसे और दिलचस्प बनाती है।
एक तरफ अंकारा रूस और पश्चिम दोनों से संवाद बनाए रखने की कोशिश करता रहा है, वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन को हथियारों की संभावित आपूर्ति पर मॉस्को की नजर बनी हुई है।
70 मिसाइलों से ज्यादा बड़ा है ‘भरोसे’ का सवाल
रूस की आपत्ति सिर्फ ATACMS की संख्या पर नहीं है।
मॉस्को का कहना है कि यूक्रेन को लगातार हथियार देने से रूस-अमेरिका और रूस-तुर्की संबंधों में आपसी भरोसा कमजोर होगा।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले भी NATO देशों को चेतावनी देते रहे हैं कि यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई युद्ध का परिणाम नहीं बदलेगी, बल्कि संघर्ष को लंबा करेगी।
मॉस्को का तर्क है कि ज्यादा हथियारों का मतलब ज्यादा लड़ाई और ज्यादा जान-माल का नुकसान हो सकता है।
दूसरी तरफ पश्चिमी देशों का तर्क रहा है कि यूक्रेन को अपनी रक्षा के लिए सैन्य सहायता देना जरूरी है।
यानी दोनों पक्षों के पास अपना-अपना तर्क है और बीच में यूक्रेन का युद्धक्षेत्र है।
‘Pandora’s Box’ वाला बयान क्यों महत्वपूर्ण है?
‘Pandora’s Box’ कोई सामान्य मुहावरा नहीं है।
रूस इस शब्द का इस्तेमाल करके संकेत दे रहा है कि हथियारों की नई और ज्यादा घातक खेप युद्ध को एक नए स्तर तक ले जा सकती है।
ATACMS जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों की संभावित आपूर्ति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इससे यूक्रेन की दूर तक हमला करने की क्षमता बढ़ सकती है।
मॉस्को इसे अपनी सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है।
क्या 70 ATACMS से युद्ध का रुख बदल जाएगा?
यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।
सैन्य विशेषज्ञों के आकलन में किसी हथियार प्रणाली का असर सिर्फ उसकी संख्या पर निर्भर नहीं करता। उसके साथ लॉजिस्टिक्स, लक्ष्य-चयन, खुफिया जानकारी, लॉन्च क्षमता और उपलब्ध अन्य हथियार प्रणालियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।
रूस लगातार कहता रहा है कि पश्चिमी हथियार यूक्रेन को युद्ध जिताने में सक्षम नहीं होंगे। वहीं यूक्रेन और उसके समर्थकों का तर्क है कि आधुनिक पश्चिमी हथियार उसकी रक्षा क्षमता को मजबूत करते हैं।
यानी 70 मिसाइलें अकेले युद्ध का पूरा नक्शा नहीं बदलेंगी, लेकिन रणनीतिक तनाव जरूर बढ़ा सकती हैं।
