मस्जिद में इमाम की हत्या, सुबह अजान नहीं हुई तो खुला राज

Mosque Murder
अजमल शाह
अजमल शाह

बिहार के गोपालगंज में सोमवार सुबह मस्जिद के भीतर इमाम मोहम्मद सफीक की हत्या ने इलाके में तनाव बढ़ा दिया। उचकागांव थाना क्षेत्र के अरना बाजार स्थित मस्जिद में उनका शव मिलने के बाद ग्रामीणों की भीड़ जुट गई और उन्होंने पुलिस को शव उठाने से रोक दिया। मौके पर कई थानों की पुलिस के साथ हथुआ एसडीपीओ पहुंचे। ग्रामीणों की मांग थी कि पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर आएं और हत्या की जांच का भरोसा दें।

सुबह अजान नहीं हुई, तो खुला हत्या का राज

घटना का पता उस समय चला जब सुबह नमाज के लिए लोग मस्जिद पहुंचे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, नियमित समय पर अजान नहीं हुई तो कुछ लोग मस्जिद के भीतर गए। वहां इमाम मोहम्मद सफीक मृत मिले। उनके शरीर पर चाकू से वार किए जाने के निशान बताए गए हैं। पुलिस ने घटनास्थल को जांच के लिए सुरक्षित किया और फोरेंसिक टीम को भी मौके पर भेजने की बात कही है।

मोहम्मद सफीक मूल रूप से भोरे के सिसई पठान टोला के रहने वाले थे और उचकागांव के अरना बाजार की मस्जिद में पेशइमाम के तौर पर काम कर रहे थे। वह मस्जिद में रहकर बच्चों को धार्मिक शिक्षा भी देते थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी किसी से दुश्मनी की जानकारी उन्हें नहीं थी। हालांकि यह स्थानीय लोगों का दावा है, पुलिस जांच में इसकी पुष्टि होना अभी बाकी है।

हत्या क्यों हुई, यही सबसे बड़ा सवाल

हत्या के पीछे की वजह फिलहाल साफ नहीं है। मृतक के भांजे साहिल शेख ने बताया कि कुछ दिन पहले इमाम का मोबाइल चोरी हुआ था और रविवार को इसी मामले को लेकर गांव में पंचायत हुई थी। उनके मुताबिक पुलिस ने एक युवक को पकड़कर पूछताछ भी की थी। इसके बाद अगले ही दिन इमाम की हत्या हो गई।

लेकिन इन घटनाओं के बीच सीधा संबंध है, ऐसा फिलहाल पुलिस ने नहीं कहा है। यही वह बिंदु है जहां जांच को लेकर सबसे ज्यादा सावधानी जरूरी है। मोबाइल चोरी, पंचायत और हत्या की समय-रेखा जांच का हिस्सा हो सकती है, लेकिन हत्या का मकसद तभी तय होगा जब पुलिस को पूछताछ, सीसीटीवी, कॉल डिटेल, फोरेंसिक साक्ष्य और अन्य सबूतों से ठोस कड़ी मिलेगी।

मस्जिद के भीतर हत्या ने बढ़ाई बेचैनी

मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि हत्या धार्मिक स्थल के भीतर हुई है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। पुलिस के सामने तत्काल चुनौती केवल हत्यारे तक पहुंचने की नहीं, बल्कि इलाके में तनाव को नियंत्रित रखने की भी है।

ग्रामीणों ने शव उठाने से इनकार करते हुए एसपी को मौके पर बुलाने की मांग की। उनका कहना था कि हत्या की निष्पक्ष जांच हो और आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। पुलिस की मौजूदगी बढ़ाए जाने के बाद भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

एसपी बोले, वैज्ञानिक तरीके से होगी जांच

गोपालगंज के एसपी विनय तिवारी ने मोहम्मद सफीक की हत्या की पुष्टि की है। उनके मुताबिक मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। पुलिस परिजनों के बयान का इंतजार कर रही है और परिवार की ओर से किसी व्यक्ति पर संदेह जताया जाता है तो उस एंगल से भी जांच की जाएगी।

एसपी ने घटनास्थल पर फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी यानी एफएसएल की टीम भेजे जाने की बात कही है। इसका मतलब है कि जांच अब केवल पूछताछ तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि घटनास्थल से मिले वैज्ञानिक साक्ष्यों को भी जांच का आधार बनाया जाएगा।

जांच की अगली कड़ी क्या होगी?

अब पुलिस के सामने कुछ अहम सवाल हैं। इमाम की हत्या कब और किस समय हुई? मस्जिद में उनके अलावा कौन मौजूद था? घटनास्थल तक पहुंचने और वहां से निकलने वालों की पहचान क्या है? क्या आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा है? मोबाइल चोरी और रविवार की पंचायत का हत्या से कोई संबंध है या यह महज एक अलग घटना थी? इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय करेंगे।

सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हत्या को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस को साक्ष्यों की कड़ियां जोड़नी होंगी। फिलहाल एक व्यक्ति की हत्या हुई है, आरोपी की पहचान और हत्या का मकसद सामने नहीं आया है। ऐसे में किसी व्यक्ति या समूह पर बिना पुष्ट साक्ष्य के आरोप लगाना जांच और सामाजिक माहौल दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

अब नजर पुलिस की जांच पर

गोपालगंज की इस घटना में फिलहाल तीन चीजें समानांतर चल रही हैं: हत्या की वैज्ञानिक जांच, ग्रामीणों का आक्रोश और इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती। पुलिस ने एसआईटी और एफएसएल जांच शुरू करने की बात कही है। अब इस मामले की असली दिशा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्यों, पूछताछ और घटनास्थल से मिलने वाले सबूतों से तय होगी।

एक मस्जिद के भीतर हुई हत्या ने अरना बाजार में सिर्फ एक परिवार को नहीं, पूरे इलाके को सवालों के बीच खड़ा कर दिया है। इन सवालों का जवाब किसी अफवाह या अनुमान से नहीं, जांच के सबूतों से ही निकलना चाहिए।