350वां विकेट लेते ही जडेजा ने रचा इतिहास, कपिल-बॉथम के क्लब में पहुंचे

Ravindra Jadeja
साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

गॉल इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे पहले टेस्ट के तीसरे दिन रवींद्र जडेजा ने एक ऐसा मुकाम हासिल किया, जहां पहुंचने वाले खिलाड़ियों की सूची बेहद छोटी है। केशरा नुवान्था को आउट करते ही जडेजा के टेस्ट विकेटों की संख्या 350 हो गई। इसके साथ ही वह 4,000 से ज्यादा टेस्ट रन और 350 से ज्यादा विकेट का डबल पूरा करने वाले क्रिकेट इतिहास के सिर्फ चौथे खिलाड़ी बन गए।

यह उपलब्धि जडेजा को कपिल देव, इयान बॉथम और डेनियल विटोरी की उस विशेष सूची में ले जाती है, जहां गेंद और बल्ले दोनों से लंबे समय तक असर छोड़ने वाले खिलाड़ियों के नाम दर्ज हैं।

गॉल में जडेजा का बड़ा पड़ाव

भारत ने पहली पारी में देवदत्त पडिक्कल के 167 रन की पारी की मदद से 462 रन बनाए। जवाब में श्रीलंका की शुरुआत लड़खड़ा गई और 90 रन तक उसकी आधी टीम पवेलियन लौट चुकी थी। इसके बाद सोनल दिनुशा और निरोशन डिकवेला ने छठे विकेट के लिए 146 रन जोड़कर श्रीलंकाई पारी को संभाला।

इसी दौरान जडेजा ने केशरा नुवान्था का विकेट लेकर अपने 350 टेस्ट विकेट पूरे किए। यह सिर्फ एक व्यक्तिगत आंकड़ा नहीं था। इस विकेट के साथ जडेजा टेस्ट क्रिकेट के उन चुनिंदा ऑलराउंडरों की सूची में पहुंच गए, जिन्होंने 4,000 रन और 350 विकेट दोनों का आंकड़ा पार किया है।

350 विकेट वाले पांचवें भारतीय

जडेजा टेस्ट क्रिकेट में 350 विकेट लेने वाले पांचवें भारतीय गेंदबाज हैं। भारत की ओर से इस सूची में सबसे ऊपर अनिल कुंबले हैं, जिनके नाम 619 टेस्ट विकेट हैं। उनके बाद रविचंद्रन अश्विन 537 विकेट, कपिल देव 434 विकेट और हरभजन सिंह 417 विकेट के साथ आते हैं। जडेजा अब 350 विकेट के साथ इस सूची में पांचवें स्थान पर हैं।

जडेजा की उपलब्धि की खासियत यह भी है कि वह विशेषज्ञ तेज गेंदबाज या पारंपरिक ऑफ-स्पिनर नहीं हैं। बाएं हाथ की स्पिन, सटीक लाइन और लंबे स्पैल के साथ उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में लगातार विकेट निकालकर अपनी अलग पहचान बनाई है।

लेफ्ट-आर्म स्पिन में तीसरा बड़ा नाम

350 टेस्ट विकेट का आंकड़ा पार करने वाले जडेजा अब सिर्फ तीसरे लेफ्ट-आर्म स्पिनर हैं। उनसे पहले श्रीलंका के रंगना हेराथ और न्यूजीलैंड के डेनियल विटोरी इस मुकाम तक पहुंचे थे।

लेफ्ट-आर्म स्पिनरों में टेस्ट विकेटों की सूची में हेराथ 433 विकेट के साथ सबसे ऊपर हैं। विटोरी के नाम 362 और जडेजा के नाम अब 350 विकेट हैं। इसके बाद डेरेक अंडरवुड 297 और तैजुल इस्लाम 271 विकेट के साथ आते हैं।

जडेजा की गेंदबाजी का एक और आंकड़ा उनकी प्रभावशीलता को दिखाता है। कम से कम 125 टेस्ट विकेट लेने वाले लेफ्ट-आर्म स्पिनरों में केशव महाराज का 56.4 का स्ट्राइक रेट जडेजा के करीब 58.1 से बेहतर है। यानी जडेजा ने अपने विकेट अपेक्षाकृत नियमित अंतराल पर हासिल किए हैं।

148 साल में सिर्फ चार खिलाड़ी

जडेजा की उपलब्धि का सबसे बड़ा हिस्सा उनके ऑलराउंड रिकॉर्ड में छिपा है। टेस्ट क्रिकेट के 148 साल के इतिहास में वह 4,000 से अधिक रन और 350 से अधिक विकेट लेने वाले केवल चौथे खिलाड़ी बने हैं।

उनसे पहले यह डबल कपिल देव, इयान बॉथम और डेनियल विटोरी ने हासिल किया था। कपिल देव ने 5,248 रन और 434 विकेट, बॉथम ने 5,200 रन और 383 विकेट तथा विटोरी ने 4,531 रन और 362 विकेट बनाए।

जडेजा के लिए इस सूची में जगह बनाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन तीनों खिलाड़ियों ने अपने दौर में टीमों को केवल एक विभाग में नहीं, बल्कि मैच के अलग-अलग चरणों में प्रभावित किया। जडेजा भी भारत के लिए बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों में लगातार योगदान देने वाले खिलाड़ियों में रहे हैं।

आंकड़े से आगे की कहानी

350 विकेट का आंकड़ा किसी भी टेस्ट गेंदबाज के लिए लंबी निरंतरता का प्रमाण है, लेकिन जडेजा के मामले में कहानी सिर्फ विकेटों की संख्या तक सीमित नहीं रहती। 4,000 से अधिक रन और 350 विकेट उन्हें उस दुर्लभ ऑलराउंडर वर्ग में खड़ा करते हैं, जिसमें क्रिकेट के इतिहास के कुछ सबसे प्रभावशाली नाम शामिल हैं।

गॉल में तीसरे दिन के खेल ने इसलिए जडेजा के लिए एक और व्यक्तिगत रिकॉर्ड जोड़ दिया। केशरा नुवान्था का विकेट श्रीलंका की पारी के आंकड़ों में महज एक विकेट था, लेकिन भारतीय ऑलराउंडर के रिकॉर्ड में वही विकेट 350 का पड़ाव बन गया।