सिर्फ 38 मिनट में हार गया सुल्तान! जानिए 1896 की उस जंग की पूरी कहानी

दुनिया के इतिहास में पहले और दूसरे विश्व युद्ध जैसी कई लंबी और विनाशकारी जंगें लड़ी गई हैं, जो सालों तक चलीं और जिन्होंने पूरी इंसानी सभ्यता को झकझोर कर रख दिया। लेकिन इतिहास के पन्नों में एक ऐसा युद्ध भी दर्ज है जो महीनों या हफ्तों नहीं, बल्कि सिर्फ 38 मिनट में खत्म हो गया था। इसे इंसानी इतिहास की सबसे छोटी लड़ाई माना जाता है। ब्रिटेन और जांजीबार (Zanzibar) के बीच लड़े गए इस युद्ध ने अपनी छोटी अवधि के बावजूद हमेशा के लिए इतिहास में जगह बना ली।
नए सुल्तान की जिद से शुरू हुआ टकराव
सुल्तान हमद की मौत के तुरंत बाद उनके चचेरे भाई खालिद बिन बरघश ने खुद को जांजीबार का नया सुल्तान घोषित कर दिया। उनका यह कदम ब्रिटेन की मर्जी के खिलाफ था। दोनों के बीच हुई एक पुरानी संधि के मुताबिक, जांजीबार का कोई भी नया सुल्तान केवल ब्रिटिश कौंसल की मंजूरी के बाद ही गद्दी पर बैठ सकता था।
ब्रिटिश अधिकारियों ने इसे समझौते का खुला उल्लंघन माना और खालिद बिन बरघश को तुरंत गद्दी छोड़ने और महल से बाहर आने का आदेश दिया। हालांकि, खालिद ने अंग्रेजों के इस अल्टीमेटम को खारिज कर दिया और ब्रिटिश सेना का मुकाबला करने के लिए महल के चारों तरफ अपने करीब 3000 सैनिकों को तैनात कर दिया।
9 बजे का अल्टीमेटम और नौसेना की बमबारी
ब्रिटिश सेना ने सुल्तान खालिद को आत्मसमर्पण करने के लिए 27 अगस्त की सुबह 9 बजे तक का समय दिया था। जब तय समय तक खालिद ने सरेंडर नहीं किया, तो ठीक 9 बजकर 2 मिनट पर ब्रिटिश नौसेना के युद्धपोतों ने सुल्तान के महल पर भीषण बमबारी शुरू कर दी।
ब्रिटिश जहाजों से दागे गए गोलों ने कुछ ही मिनटों में सुल्तान के महल को मलबे में तब्दील करना शुरू कर दिया। जांजीबार के सैनिकों के पास अंग्रेजों के आधुनिक हथियारों और तोपों का कोई जवाब नहीं था। लगातार हो रही बमबारी के चलते महल की लकड़ी की संरचनाओं में तेजी से आग लग गई।
38 मिनट बाद आत्मसमर्पण, जर्मन दूतावास में सुल्तान की शरण
ब्रिटिश सेना की भारी गोलाबारी के सामने जांजीबार की सेना ज्यादा देर टिक नहीं सकी। सुबह 9 बजकर 40 मिनट पर, यानी बमबारी शुरू होने के ठीक 38 मिनट बाद, सुल्तान के सैनिकों ने युद्ध का झंडा झुका दिया और पीछे हट गए।
मात्र 38 मिनट तक चली इस लड़ाई में जांजीबार को भारी नुकसान उठाना पड़ा। युद्ध में जांजीबार के लगभग 500 सैनिक और नागरिक मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए। इसके विपरीत, आधुनिक हथियारों से लैस ब्रिटिश सेना का केवल एक सैनिक घायल हुआ, जिसकी बाद में जान बच गई।
ब्रिटिश तोपों के सामने टिकना नामुमकिन देखकर सुल्तान खालिद युद्ध के बीच में ही महल के पिछले रास्ते से भाग निकला। उसने स्थानीय जर्मन दूतावास में शरण ले ली। इस 38 मिनट के युद्ध में जीत के साथ ही अंग्रेजों ने जांजीबार पर पूरी तरह से अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया।

