वॉशिंगटन नहीं, नई दिल्ली करेगी जम्मू-कश्मीर की समस्याओं का समाधान

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ प्रस्तावित मुलाकात से पहले स्पष्ट कर दिया है कि वह जम्मू-कश्मीर के मुद्दों पर किसी विदेशी मध्यस्थता की मांग नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश की समस्याओं का समाधान वॉशिंगटन नहीं, बल्कि नई दिल्ली को करना है।
‘वॉशिंगटन हमारी समस्याओं का समाधान नहीं करेगा’
अब्दुल्ला ने बैठक को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “वॉशिंगटन हमारी समस्याओं का समाधान नहीं करेगा। हमारी केंद्र सरकार को ही हमारी समस्याओं का समाधान करना होगा। किसी दूसरे देश के राजदूत से शिकायत करना गलत होगा।”
अब्दुल्ला ने कहा कि वह अमेरिकी राजदूत के साथ जम्मू-कश्मीर और वहां के हालात पर चर्चा करेंगे, लेकिन किसी शिकायत के साथ नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा, “मैं जम्मू-कश्मीर और वहां के हालात के बारे में बात करूंगा, लेकिन शिकायत नहीं करूंगा। मैं उनसे अपनी समस्याओं का समाधान खोजने की कोशिश भी नहीं करूंगा।”
‘ज्यादातर उनकी बात सुनना पसंद करूंगा’
अमेरिकी राजदूत के साथ मुलाकात के स्वरूप को लेकर पूछे गए सवाल पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 15 साल से ज्यादा समय में यह पहली बार है जब जम्मू-कश्मीर का कोई मौजूदा मुख्यमंत्री किसी मौजूदा अमेरिकी राजदूत से मुलाकात कर रहा है।
उन्होंने बैठक को लेकर किसी तरह के बड़े एजेंडे का संकेत देने के बजाय बातचीत को सामान्य राजनयिक संवाद के तौर पर पेश किया। अब्दुल्ला ने कहा, “ज़्यादातर, मैं उनकी बात सुनना पसंद करूंगा। हालांकि, वह भी सुनने ही आ रहे हैं। देखते हैं कि किस तरह की बातचीत होती है।”
इस बयान से मुख्यमंत्री ने बैठक को लेकर चल रही अटकलों पर पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर दिया। खास तौर पर जम्मू-कश्मीर के मुद्दों में किसी विदेशी भूमिका की संभावना को लेकर उन्होंने कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी।
राज्य का दर्जा बहाली का मुद्दा अहम
उमर अब्दुल्ला की अमेरिकी राजदूत से मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियां राज्य का दर्जा पूरी तरह बहाल करने की मांग को लगातार उठा रही हैं। इसके साथ ही संवैधानिक गारंटी से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक विमर्श में बने हुए हैं।
मुख्यमंत्री की सरकार भी जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की मांग करती रही है। ऐसे में अमेरिकी राजदूत के साथ बैठक में स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक हालात पर चर्चा की संभावना है, लेकिन अब्दुल्ला ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि इन मुद्दों के समाधान के लिए वह विदेशी हस्तक्षेप की ओर नहीं देख रहे हैं।
अमेरिकी राजदूत की दोहरी भूमिका
सर्जियो गोर की भूमिका इस मुलाकात को सामान्य राजनयिक बैठक से कुछ अधिक अहम बनाती है। वह भारत में अमेरिकी राजदूत होने के साथ दक्षिण और मध्य एशिया के लिए वॉशिंगटन के विशेष दूत की भूमिका भी निभा रहे हैं।
इसी वजह से बैठक पर कूटनीतिक नजर बनी हुई है। जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दे लंबे समय से भारत-अमेरिका संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति में संवेदनशील विषय रहे हैं। हालांकि, उमर अब्दुल्ला ने बैठक से पहले ही भारत की पारंपरिक स्थिति और अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर के आंतरिक मुद्दों का समाधान भारत के भीतर ही होना है।
“अब्दुल्ला के बयान से साफ है कि वह अमेरिकी राजदूत के साथ संवाद को लेकर खुले हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक या संवैधानिक मुद्दों पर किसी विदेशी भूमिका के पक्ष में नहीं हैं।”
