27% आरक्षण: मध्य प्रदेश में कानूनी जंग तेज, अब सुप्रीम कोर्ट पर नजर

मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में मोहन यादव सरकार अब सुप्रीम कोर्ट (SC) जाने की तैयारी में है। जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा 27 प्रतिशत आरक्षण के कानून को असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में शीर्ष विधि विशेषज्ञों के साथ बैठक कर आगे की कानूनी रणनीति तैयार की है।
दिल्ली में कानूनी विकल्पों पर मंथन
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नई दिल्ली में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ बैठक की। इस दौरान हाईकोर्ट के हालिया फैसले से जुड़े कानूनी पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की गई। राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक (Stay) की मांग करने के विकल्पों पर काम कर रही है।
हाईकोर्ट ने 14 फीसदी तक सीमित किया था आरक्षण
9 अक्टूबर 2026 को जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में OBC आरक्षण को 27 प्रतिशत करने वाले 2019 के कानून को रद्द कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में इंदिरा साहनी मामले और आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा का हवाला देते हुए OBC आरक्षण को वापस 14 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है। यह 27 प्रतिशत आरक्षण तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा लागू किया गया था।
कांग्रेस-बीजेपी में शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य की भाजपा सरकार ने अदालत में OBC वर्ग का पक्ष मजबूती से नहीं रखा। इसके जवाब में भाजपा का कहना है कि कमलनाथ सरकार द्वारा लाया गया कानून विधिक रूप से कमजोर था, जिसके कारण वह अदालत में टिक नहीं सका और अंततः OBC वर्ग को इसका नुकसान उठाना पड़ा।
उमंग सिंघार की मांग- विशेष सत्र बुलाकर लाएं अध्यादेश
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मांग की है कि अगर OBC आरक्षण पर भाजपा सरकार की नीयत साफ है, तो तुरंत विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए और अध्यादेश लाकर इस आरक्षण को पारित किया जाए।
वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने मुख्यमंत्री की सॉलिसिटर जनरल से मुलाकात पर निशाना साधा। शर्मा ने दावा किया कि कमलनाथ सरकार ने OBC वर्ग को 27% आरक्षण दिया था, लेकिन भाजपा ने इसे कोर्ट में अटकाने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीयत में ही खोट है और सरकार गिराने के बाद उन्हें OBC वर्ग को आरक्षण देना चाहिए था।

