मिडिल ईस्ट संकट: ईरान पर अमेरिकी हमले की तैयारी? UN ने दी चेतावनी

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Jyoti Atmaram Ghag
Jyoti Atmaram Ghag

मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर बड़े सैन्य हमले की सुगबुगाहट तेज हो गई है। एक ओर जहां अमेरिकी सेना महज 96 घंटे के भीतर ईरान पर सैन्य ऑपरेशन शुरू करने के लिए तैयार बताई जा रही है, वहीं संयुक्त राष्ट्र (UN) महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस संभावित टकराव को टालने की सख्त हिदायत दी है।

तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशों के तहत सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारी तेहरान में अहम वार्ता करने जा रहे हैं।

अमेरिका 96 घंटे में कर सकता है बड़ा सैन्य ऑपरेशन

अमेरिकी न्यूज नेटवर्क सीएनएन (CNN) की एक रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सेना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आदेश मिलते ही 96 घंटे के भीतर ईरान के खिलाफ नए और बड़े सैन्य ऑपरेशन शुरू करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

सीएनएन ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि यह ऑपरेशन केवल ईरानी रडार या मिसाइल लॉन्चर तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसका दायरा काफी व्यापक हो सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) और सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक बड़ी ‘टारगेट लिस्ट’ तैयार की है, जिसमें ईरान का एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर, सैन्य ठिकाने और परमाणु प्रतिष्ठान शामिल हैं। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप ने अभी अपने अगले कदम पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन वह कड़े सैन्य एक्शन की तरफ झुकते दिख रहे हैं।

UN महासचिव की चेतावनी: ‘हर कीमत पर रुके हमला’

काहिरा में सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हालात पर गंभीर चिंता जताई।

उन्होंने कहा, “ईरान पर एक बड़े सैन्य हमले और उसके जवाब में खाड़ी देशों पर ईरान के भारी सैन्य पलटवार के खतरे को हर कीमत पर टाला जाना चाहिए। मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह के एस्केलेशन (Escalation) को रोकना इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरी है।”

तनाव घटाने के लिए तेहरान पहुंचे सऊदी और पाक अधिकारी

कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करने के लिए तेहरान पहुंचे हैं। सऊदी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह दौरा संयुक्त रक्षा के लिए मक्का समझौते का हिस्सा है और इसका उद्देश्य बातचीत और कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देना है।

इसके अलावा पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर भी सोमवार को ईरान पहुंचे। पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ने उनके दौरे की पुष्टि की है। बता दें कि पाकिस्तान और कतर मिडिल ईस्ट युद्ध को खत्म करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

इजरायल चुनाव: नेतन्याहू पर उठे सवाल, ईरान बोला- ‘कोई फर्क नहीं पड़ता’

इजरायल में मंगलवार को होने वाले विधायी चुनावों से ठीक पहले देश की राजनीति भी गर्मा गई है। इजरायल के चैनल 12 ने रविवार को दावा किया था कि ईरान पर नई सैन्य कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और सेना प्रमुख ईयाल जमीर के बीच टकराव चल रहा है।

हालांकि, रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इन रिपोर्टों को ‘पूरी तरह से निराधार और झूठा’ करार दिया है। काट्ज ने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व और सेना के बीच ‘पूरा समन्वय’ है और चुनावों से पहले ईरान पर हमले का इजरायल का कोई इरादा नहीं है। दूसरी ओर, विपक्षी नेता यायर लापिड ने आरोप लगाया है कि नेतन्याहू चुनाव टालने के लिए जानबूझकर ईरान के साथ टकराव भड़काना चाहते हैं।

वहीं, इस पूरी हलचल पर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई ने कहा कि इजरायल के चुनाव परिणामों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। बाकेई ने नेतन्याहू की ओर से ईरानी सरकार को गिराने की हालिया धमकियों को “खोखली धमकियां” और “हताशा का संकेत” बताया है।