प्रोजेक्ट चीता को बड़ा झटका, 19 महीने के KNG22 की मौत पर केंद्र सख्त

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संजीव पॉल
संजीव पॉल

देश के महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ (Project Cheetah) की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से जुड़े 19 महीने के नर चीते KNG22 की इलाज के दौरान दुखद मौत हो गई है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि चीते के शरीर से सर्जरी के दौरान 5 गोलीनुमा छर्रे निकाले गए थे। गंभीर आंतरिक चोटों से जूझ रहे इस चीते को बचाने के लिए पशु चिकित्सकों ने काफी प्रयास किए, लेकिन 27 अक्टूबर को उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

मुरैना के जंगल में घायल मिला था चीता

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और मध्य प्रदेश के मुख्य वन्यजीव वार्डन के अनुसार, KNG22 कूनो नेशनल पार्क की मादा चीता निरवा का 19 महीने का शावक था। बीती 25 अक्टूबर 2026 को मॉनिटरिंग टीम को वह कूनो के संरक्षित क्षेत्र से बाहर मुरैना के क्षेत्रीय वन क्षेत्र में घायल अवस्था में मिला था। उसी रात रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उसे कूनो नेशनल पार्क लाया गया और बाद में विशेष इलाज के लिए जबलपुर स्थित पशु चिकित्सा सुविधा केंद्र में रेफर किया गया।

सर्जरी में निकाले गए 5 छर्रे

वन विभाग के मुताबिक, शुरुआती एक्स-रे और सीटी स्कैन में चीते के शरीर के अलग-अलग हिस्सों में बाहरी वस्तुएं दिखाई दी थीं। विस्तृत जांच में पुष्टि हुई कि ये बंदूक के छर्रे थे। डॉक्टरों ने आपातकालीन सर्जरी कर उसके शरीर से पांच फायरआर्म पेलेट्स (गोली के छर्रे) निकाले। मेडिकल रिपोर्ट में सामने आया कि इन छर्रों के कारण चीते के आंतरिक अंगों, मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा था। तमाम कोशिशों के बावजूद 27 अक्टूबर की सुबह चीते ने दम तोड़ दिया।

केंद्र ने भेजी हाई-लेवल टीम, STF भी करेगी जांच

चीते की इस संदेहास्पद मौत को केंद्र सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जमीनी हकीकत जानने के लिए एक उच्चस्तरीय केंद्रीय टीम मध्य प्रदेश भेजी है।

  • केंद्रीय टीम में कौन-कौन: इस टीम में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के वन महानिरीक्षक, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के अतिरिक्त निदेशक और क्षेत्रीय उपनिदेशक शामिल हैं। टीम घटना की परिस्थितियों, साक्ष्यों और वन विभाग के साथ समन्वय कर जांच करेगी।

  • STF का गठन: वहीं, मध्य प्रदेश सरकार ने भी मामले की जांच के लिए वन एवं पुलिस अधिकारियों की संयुक्त स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि चीते को गोली कैसे लगी, क्या यह शिकार का मामला है, या सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ी चूक हुई है। केंद्रीय जांच टीम अपनी रिपोर्ट पर्यावरण मंत्रालय को सौंपेगी, जिसके बाद आगे की सख्त कार्रवाई तय की जाएगी।