LTCG टैक्स में कटौती की चर्चा तेज, दुबई में बैठे भारतीय निवेशकों की नजर

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Gautam Kumar Agarwal
Gautam Kumar Agarwal

भारतीय शेयर बाजार में लगातार जारी भारी बिकवाली और विदेशी निवेशकों (FIIs) की निकासी के बीच खुदरा निवेशकों और अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में संकेत दिया है कि सरकार शेयर बाजार पर लगने वाले टैक्स को लेकर निवेशकों की चिंताओं पर विचार करने को तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि सरकार किस विशेष टैक्स में बदलाव करेगी या यह राहत पहले से शेयर होल्ड करने वाले निवेशकों पर लागू होगी या नहीं।

इस सप्ताह एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि वह खुदरा निवेशकों की चिंताओं को समझती हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सीतारमण ने कहा, “मैं उठाई जा रही चिंताओं की काफी सराहना करती हूं और इन सब पर विचार करूंगी।”

क्यों उठी टैक्स समीक्षा की मांग?

भारतीय शेयर बाजार इस साल एशिया के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले बाजारों में से एक रहा है। महंगे शेयर, कमजोर अर्निंग ग्रोथ, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और बढ़ते ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स ने बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

वित्त मंत्री ने भी मौजूदा बाजार परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा, “अब स्थिति बहुत अलग है। परिस्थितियां बदल गई हैं, चुनौतियां बढ़ गई हैं और एफआईआई (FII) की निकासी अधिक हुई है।” उन्होंने कहा कि 7% से अधिक की आर्थिक विकास दर को बनाए रखने के लिए भारत को पूंजी की आवश्यकता है और सरकार इक्विटी बाजार के लिए अधिक समर्थन की मांग सुन रही है।

गौरतलब है कि सरकार ने जुलाई 2024 के बजट में इक्विटी टैक्स दरों में इजाफा किया था। क्वालिफाइंग लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स की दर को 10% से बढ़ाकर 12.5% और शॉर्ट टर्म (STCG) दर को 15% से बढ़ाकर 20% कर दिया गया था।

UAE में रहने वाले NRIs पर क्या होगा असर?

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रह रहे भारतीय निवेशकों पर इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार किस टैक्स में बदलाव करती है:

  • STT (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स): यह टैक्स ट्रेड की कुल वैल्यू पर लगता है। अगर सरकार इसे कम करती है, तो उन निवेशकों को भी सीधे तौर पर फायदा होगा जिनके शेयरों की वैल्यू बाजार में गिरावट के कारण कम हो गई है।

  • लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG): मौजूदा नियमों के तहत, 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए लिस्टेड शेयरों से होने वाले मुनाफे पर 12.5% टैक्स लगता है (1.25 लाख रुपये से अधिक के सालाना मुनाफे पर)। अगर इस दर में कटौती होती है, तो यह केवल उन निवेशकों को फायदा पहुंचाएगा जो टैक्स योग्य मुनाफे पर अपने शेयर बेच रहे हैं।

SBI रिसर्च का नया प्रस्ताव

इस बीच, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की रिसर्च विंग ने एक अलग प्रस्ताव पेश किया है। इसमें सुझाव दिया गया है कि लंबी अवधि के इक्विटी मुनाफे पर लगने वाले टैक्स को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाना चाहिए। हालांकि, इसकी एवज में होल्डिंग अवधि (शेयर रखने की समय-सीमा) को एक साल से बढ़ाकर दो या तीन साल करने की सिफारिश की गई है। वित्त मंत्री ने फिलहाल इस सिफारिश का समर्थन नहीं किया है।

भारत का अगला केंद्रीय बजट फरवरी की शुरुआत में पेश किया जाएगा। यूएई में रहने वाले NRIs और शेयरधारकों की नजरें अब इस बात पर टिकी होंगी कि क्या नए नियम पहले से खरीदे गए शेयरों की भविष्य की बिक्री पर लागू होंगे या नहीं। फिलहाल, पुरानी टैक्स दरें ही प्रभावी रहेंगी।