China की फिल्म ने Iraq War को दिया नया नैरेटिव, मचाया धमाल

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

बीजिंग: इराक युद्ध की कहानी अगर अमेरिकी या पश्चिमी नजरिए के बजाय चीनी आंखों से दिखाई जाए तो कहानी का फ्रेम बदल जाता है। चीन की नई फिल्म Once Upon a Time in the Middle East इसी प्रयोग के साथ सामने आई है। फिल्म सीधे तौर पर इराक का नाम नहीं लेती, लेकिन कहानी 2000 के दशक की है और इसमें अमेरिकी सैनिकों का एक देश पर हमला दिखाया गया है।

11 अगस्त को रिलीज हुई इस फिल्म ने सोमवार तक चीन में 1 अरब युआन यानी करीब 148 मिलियन डॉलर का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पार कर लिया। फिल्म को विदेशों में भी रिलीज किया जा रहा है। चीन के सरकारी मीडिया और उससे जुड़े सोशल मीडिया चैनल इसे सिर्फ एक युद्ध फिल्म नहीं, बल्कि दुनिया के सामने चीन की अपनी कहानी और दृष्टिकोण रखने की कोशिश के तौर पर पेश कर रहे हैं।

एक चीनी शेफ और युद्ध के बीच फंसे बच्चे

फिल्म की कहानी चीनी शेफ Xu Fu के इर्द-गिर्द घूमती है। युद्ध शुरू होने के वक्त Xu Fu अपने कर्ज चुकाने के लिए एक छोटे से रेस्टोरेंट में काम कर रहा होता है।

युद्ध बढ़ता है तो उसका रेस्टोरेंट धीरे-धीरे स्थानीय अनाथ बच्चों के लिए शरणस्थली बन जाता है। दूसरी तरफ वही जगह अमेरिकी सैनिकों के लिए बार का काम भी करती है।

कहानी आगे बढ़ने के साथ Xu Fu खुद युद्ध की हिंसा का शिकार होता है। उसका कारोबार तबाह होता है और उसे अमेरिकी सैनिकों के साथ-साथ स्थानीय militant groups द्वारा भी कैद किया जाता है। इसके बावजूद वह बच्चों को युद्ध की मार से बचाने की कोशिश करता रहता है।

चीन के सरकारी मीडिया ने कहा है कि फिल्म की कहानी इराक युद्ध के दौरान वहां रह चुके कुछ चीनी रेस्तरां संचालकों के वास्तविक अनुभवों से भी प्रेरित है।

चीन अब ‘नैरेटिव की ताकत’ पर जोर दे रहा

CCTV से जुड़े सोशल मीडिया चैनल Yuyuan Tantian ने फिल्म को चीन की बदलती global narrative strategy से जोड़ा है। चैनल ने कहा कि चीन अब अपनी कहानी खुद सामने रखने की दिशा में बढ़ रहा है।

चैनल के मुताबिक, दशकों तक पश्चिम ने ‘terrorism’, ‘freedom’ और ‘human rights’ जैसे शब्दों और उनकी global interpretation पर मजबूत पकड़ बनाए रखी। उसके अनुसार, Global South की आवाज इस narrative में लंबे समय तक कमजोर रही और अब चीन इस स्थिति को बदलने की कोशिश कर रहा है।

चैनल ने Hollywood को अमेरिकी प्रभाव का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक माध्यम बताते हुए दावा किया कि Chinese cinema अब युद्ध की उन कहानियों को चुनौती दे रहा है जिन्हें लंबे समय से अमेरिकी फिल्मों के जरिए दुनिया के सामने रखा जाता रहा है।

यहीं से फिल्म का cultural impact उसके box office प्रदर्शन से आगे निकल जाता है। कहानी भले एक चीनी शेफ और युद्ध में फंसे बच्चों की हो, लेकिन उसके पीछे चीन के अपने international narrative को स्थापित करने की कोशिश भी दिखाई देती है।

Iran War पर भी China का वही रुख

फिल्म का यह narrative चीन की मौजूदा Middle East policy से भी जुड़ता है। Beijing ने Iran war को लेकर non-interventionist रुख बनाए रखा है और ceasefire की अपील की है।

चीन ने sovereignty के उल्लंघन की भी आलोचना की है। Middle East मामलों के लिए उसके विशेष दूत Zhai Jun को क्षेत्र में भेजकर तनाव कम करने की कोशिश की गई है।

फिल्म को सीधे चीन की Middle East policy का प्रचार मानने से Wen बचती हैं। लेकिन उनके मुताबिक, कहानी में चीन की एक मूल सोच दिखाई देती है, जिसमें focus अंततः human security और humanitarian crises को हल करने पर लौटता है।

‘Dear You’ के बाद सिनेमा बना नया soft power हथियार

चीन पिछले कुछ वर्षों में cinema को soft power के एक महत्वपूर्ण माध्यम के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। इस रणनीति में हालिया बदलाव भी नजर आता है।

इस साल रिलीज हुई indie film Dear You इसका उदाहरण है। Southeast Asia में रहने वाले Chinese diaspora और अपनी cultural heritage को बचाए रखने की कोशिशों पर बनी इस फिल्म को शुरुआत में सीमित रिलीज मिली थी। लेकिन word of mouth के बाद यह चीन में surprise box office hit बन गई।

फिल्म को Malaysia, France, Canada और Japan जैसे देशों में भी दिखाया गया। इसकी लोकप्रियता के बाद चीन के Foreign Ministry ने 150 विदेशी diplomats और उनके परिवारों के लिए विशेष screening आयोजित की। मंत्रालय ने फिल्म को आम चीनी लोगों की kindness समझने की एक खिड़की बताया।

हालांकि, Southeast Asia में कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि फिल्म को Chinese diaspora के बीच Beijing के political और cultural influence को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। Chinese media ने इन आरोपों को खारिज किया।

Wolf Warrior से आगे बढ़ रहा चीन का फिल्मी नैरेटिव

Chinese cinema की soft power strategy में यह बदलाव खास तौर पर ध्यान देने लायक है। पहले Wolf Warrior जैसी फिल्मों में विदेशी धरती पर action, military strength और Chinese heroism ज्यादा प्रमुख थे।

अब Dear You और Once Upon a Time in the Middle East जैसी फिल्मों में कहानी का केंद्र Chinese people’s kindness, warmth और humanitarian values को बनाया जा रहा है।

Once Upon a Time in the Middle East को Foreign Ministry से जुड़े माने जाने वाले social media channel Chaoyang Shaoxia ने भी promote किया है। चैनल ने कहा कि फिल्म दिखाती है कि चीनी लोगों की kindness राजनीतिक रुख से ऊपर है और सीधे humanity से जुड़ती है।

इस तरह Iraq War की एक कहानी अब चीन के लिए सिर्फ cinema नहीं रह गई है। बॉक्स ऑफिस पर मिली सफलता के साथ फिल्म Beijing के उस बड़े प्रयास का हिस्सा बनती दिख रही है, जिसमें Hollywood के प्रभाव वाले global storytelling space में China अपनी आवाज, अपने characters और अपना version of history सामने रखना चाहता है।